थाना में पुलिसकर्मी ने बनाया रील, सोशल मीडिया में किया वायरल, कौन करेगा कार्यवाही, देखे वायरल वीडियो


अनूपपुर

एक ओर जहां पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना है, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वीडियो में एक पुलिसकर्मी ड्यूटी के अनूपपुर जिले के चचाई थाना अंतर्गत थाने में रील बनाते नजर आ रहा है। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। अब सवाल उठता है कि क्या वर्दी में रहते हुए इस तरह का आचरण उचित है, क्या ड्यूटी के दौरान मनोरंजन को प्राथमिकता देना सही है, और सबसे महत्वपूर्ण, इस पुलिसकर्मी पर क्या कार्रवाई होनी चाहिए।

अगर नियमों की बात करें, तो पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोपरि होता है। सरकारी आदेशों के मुताबिक, ड्यूटी के दौरान किसी भी प्रकार की निजी गतिविधि, जो कार्यक्षमता को प्रभावित करे, अनुशासनहीनता मानी जाती है। इस मामले में संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय जांच हो सकती है और अनुशासनात्मक कार्रवाई भी संभव है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के साथ पुलिस कर्मियों की इस तरह की हरकतें उनकी छवि पर भी असर डालती हैं। हालांकि, क्या इस पर कोई ठोस नीति बनाई जानी चाहिए। क्या सिर्फ विभागीय जांच से मामला खत्म हो जाएगा, या फिर इससे बड़ा संदेश देने की जरूरत है।

*देखे वायरल रील वीडियो 01*

देखे*वायरल वीडियो 02*




समाचार 01 फ़ोटो 01

तहसील व एसडीएम कार्यालय के स्थान परिवर्तन को लेकर भाजपा पदाधिकारियों ने विधायक को सौंपा ज्ञापन

*विधायक ने कलेक्टर को लिखा पत्र*

अनूपपुर

नगरपालिका द्वारा जारी एक रजिस्टर्ड पत्र जो सोशल मीडिया के माध्यम से जन,जन, तक पहुंच रहा है जिसमे उल्लेख है कि ग्राम सामतपुर में एसडीएम एवं तहसील कार्यालय भवन निर्माण हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र की मांग किया गया था। संदर्भित पत्र के मुताबिक पत्र क्र०. 153/री-1/भूमिआवंटन /2024-25 अनूपपुर में लेख है कि ग्राम सामतपुर प०ह० अनूपपुर तहसील अनूपपुर स्थित आ०ख0नं0-7/1/1/1 रकवा 2.069 हे0 के अंश रकवा 0.809 हे. भूमि पर एसडीएम एवं तहसील कार्यालय भवन निर्माण हेतु इस निकाय से अनापत्ति प्रमाण पत्र चाही गई है। यदि शासन दिशा निर्देशानुसार उक्त आराजी में एसडीएम एवं तहसील कार्यालय भवन का निर्माण किया जाता है तो इस निकाय को कोई आपत्ति नही होगी। खबर लगते ही वर्तमान में स्थित उपरोक्त कार्यालय के भवन परिवर्तन के विरोध में अनूपपुर नगर ही नही तहसील एवं अनुभाग क्षेत्र की जनता में आक्रोश व्याप्त था । नगर सहित जिले भर के भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी ने स्थान परिवर्तन के विरोध में क्षेत्रीय विधायक बिसाहू लाल सिंह से मुलाकात कर ज्ञापन सोपा।

*विधायक से की मांग*

विद्यायक बिसाहूलाल सिंह विधानसभा क्षेत्र क्र.67 (पूर्व कैबिनेट मंत्री) जिला अनूपपुर  से मांग की गई है कि  तहसील भवन का प्रशासन द्वारा वर्तमान में स्थित तहसील कार्यालय को दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना बनाई जा रही है। यह निर्णय जनहित और स्थानीय जनता के लिए सुविधाजनक नहीं है। तहसील कार्यालय का स्थान वर्तमान में केंद्रित और स्थानीय नागरिकों के लिए सुलभ है,  जिससे प्रशासनिक कार्यों में शीघ्रता और दक्षता बनी रहती है। यदि तहसील भवन को स्थानांतरित किया जाता है, तो इससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि नई जगह तक पहुंचने के लिए समय और खर्च बढ़ जाएगा। इसके अलावा, अन्य स्थान पर शिफ्ट होने से कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में निवेदन हैं कि तहसील भवन के स्थानांतरण की योजना को पुनः विचार किया जाए और इसे पुनः मूल स्थान पर बनाए रखा जाए। 

*विधायक ने कलेक्टर को लिखा पत्र*

विधानसभा क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ताओं आमजनमानस की सुविधाओं के साथ रोजगार के हनन को मद्देनजर रखते हुए अनूपपुर विधायक ने पत्र क्रमांक 990 कलेक्टर अनूपपुर को अवगत कराया है कि तहसील कार्यालय/अनुविभागीय अधिकारी को यथावत पुराने स्थान पर रखे जाने हेतु कलेक्टर को पत्र लिखा है।

समाचार 02 फ़ोटो 02

कोल माफिया का काला खेल आमाडाड खुली खदान में रोड सेल के नाम पर चार हजार की लूट

हैंड लोडिंग से हो रहा खेल, अधिकारियों के सह में हो रहा हैं खेल*

अनूपपुर

जिले के आमाडाड खुली खदान में कोल माफिया के दम पर कोयला खदानें केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और माफियागिरी का अड्डा बन चुकी हैं, खनन क्षेत्र में यदि ईमानदारी की लौ जलती भी है तो उसे काले धुएं में दबा दिया जाता है, एसईसीएल में इन दिनों एक संगठित लूट का तंत्र चल रहा है, जहां रोड सेल के नाम पर चार हजार प्रति ट्रक की अवैध वसूली की जा रही है यह अवैध कारोबार किसी एक स्तर पर नहीं, बल्कि गेटकीपर से लेकर जीएम तक का हिस्सा तय है। इस काले खेल के पीछे ट्रांसपोर्टर, लोडिंग इंचार्ज, रोड सेल इंचार्ज, कांटा घर के कर्मचारी, मैनेजर और ऊंचे पदों पर बैठे सफेदपोशों का गठजोड़ है ट्रकों को कोयला तभी मिलता है जब मोल-भाव पूरा हो जाता है जो जितना देता है उसे उतनी ही बेहतर गुणवत्ता का कोयला मिलता है और जो नहीं देता उसका रास्ता बंद कर दिया जाता है 

आमाडाड खुली खदान में हैंड लोडिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है खदानों से निकला कोयला उसी ग्रेड में डीईओ धारकों को मिलना चाहिए, जिसके लिए नीलामी हुई है। लेकिन सच्चाई इससे उलटा हैं।प्रतिबंध के बावजूद टैरेक्स मशीनों से उच्च गुणवत्ता का कोयला चोरी-छिपे निकाला जा रहा है और  उन ट्रकों में लोड किया जाता है जो सही कीमत चुकाते हैं इस पूरी प्रक्रिया को रोड सेल इंचार्ज की निगरानी में अंजाम दिया जाता है। कोयले से लदे ट्रकों का गेट पास और ट्रांसपोर्टरों की बिल्टी पूरी तरह संदेह के घेरे में हैं, रोज़ करोड़ों रुपये का गोरखधंधा चल रहा है लेकिन प्रशासन सब कूल-कूल के अंदाज में आंख मूंदे बैठा है।

हैंड लोडिंग में लगे मजदूरों को कोई सुरक्षा बीमा या पीएफ नहीं मिलता, इन्हें ठेकेदारों के भरोसे छोड़ दिया जाता है और कभी भी हादसा हो जाए कोई जिम्मेदारी लेने वाला नहीं, कई बार हैंड लोडिंग करने वालों में झगड़े और हिंसा तक हो जाती है। खुली खदान में जो देगा वही लेगा की नीति चल रही है, कोल माफिया के आगे हर सिस्टम बौना साबित हो रहा है, सवाल यह उठता है कि जब इस पूरे खेल की जानकारी स्थानीय प्रशासन पुलिस और खदान प्रबंधन को है तो कार्रवाई क्यों नहीं होती।

ट्रकों की आवाजाही पर नज़र रखने के लिए सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं लेकिन उनकी असली भूमिका प्राइवेट गुंडों की तरह वसूली करवाने की है, जो ट्रक न्यूनतम चार हजार नहीं देता उसे खदान के अंदर घुसने ही नहीं दिया जाता, खदान के बाहर प्राइवेट लोग बिठाए गए हैं जो सही ट्रक और गलत ट्रक का फैसला करते हैं, जिन ट्रकों से वसूली नहीं हो पाती उन्हें अंदर जाने नहीं दिया जाता। आमाडाड खुली खदान में चल रही अवैध वसूली और कोयला हेराफेरी को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिम्मेदार अधिकारी क्यों चुप हैं। क्या यह मुमकिन है कि बिना ऊपर की मिलीभगत के यह सब चल सके। क्या रोड सेल इंचार्ज ट्रांसपोर्टर कांटा बाबू और मैनेजर अकेले यह खेल चला रहे हैं या फिर इसका हिस्सा ‘बड़े साहब भी हैं?

आमाडाड खुली खदान का यह घोटाला सिर्फ एक उदाहरण है यह पूरा तंत्र इस बात का सुबूत है कि कोल माफिया का प्रभाव इतना मजबूत है कि सरकारी नियम प्रशासन और कानून इनके सामने बौने साबित हो जाते हैं। हर दिन कोई न कोई ट्रक अवैध रूप से लोड होकर निकलता है हर दिन कोई न कोई मजदूर इस शोषण का शिकार बनता है और हर दिन लाखों-करोड़ों की काली कमाई ‘बड़े अधिकारियों’ की जेब में जाती है। यह मामला केवल कोयला चोरी का नहीं बल्कि एक पूरे तंत्र के भ्रष्टाचार में लिप्त होने का जीता-जागता उदाहरण है। अब देखना यह है कि क्या यह माफिया राज यूं ही चलता रहेगा या फिर कोई इस गोरखधंधे पर रोक लगाएगा।

समाचार 03 फ़ोटो 03

लिफ्ट मांगकर गाड़ी लेकर भागे बदमाश, पुलिस ने बोलेरो जप्तकर  आरोपी को किया गिरफ्तार

शहडोल

शहडोल। ब्यौहारी पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए चोरी की गई बोलेरो गाड़ी को 24 घंटे के भीतर बरामद कर लिया है। इस घटना में शामिल एक बदमाश को गिरफ्तार कर लिया गया है, इस मामले में कुल 6 लाख रुपये का मशरूका भी जप्त किया गया है।

जानकारी के अनुसार फरियादी महेन्द्र द्विवेदी, जो कि उमरिया जिले के ग्राम बरा के निवासी है, अपने ड्रायवर पवन कुशवाहा के साथ न्यायालय पेशी के लिए सीधी गए थे। पेशी के बाद जब वे खामघाटी में चाय पीने के लिए रुके, तो वहां खड़े 4-5 लोगों ने उनसे पूछा कि वे कहां जा रहे हैं। महेंद्र ने बदमाशों को बताया कि हम मानपुर जा रहे हैं तो बदमाशों ने कहा कि हमें भी ले चले। बातचीत में फरियादी ने उन्हें अपनी बोलेरो गाड़ी में बैठा लिया। जैसे ही गाड़ी बेड़रा जंगल में पहुंची, दो आरोपियों ने पेशाब करने के बहाने गाड़ी रुकवाने का आग्रह किया। जैसे ही फरियादी और उनके ड्रायवर गाड़ी से बाहर गए, आरोपियों ने गाड़ी स्टार्ट कर भागने में सफलता हासिल कर ली। इस घटना के बाद महेन्द्र द्विवेदी ने पुलिस थाना ब्यौहारी में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया।

पुलिस अधीक्षक शहडोल ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया और थाना प्रभारी ब्यौहारी को अज्ञात आरोपियों की तलाश के लिए निर्देशित किया। थाना प्रभारी ने दो टीमों का गठन कर लगातार जांच की। मुखबिर द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, सभी आरोपी ग्राम खाम एवं आसपास के क्षेत्रों के रहने वाले है। पुलिस ने सक्रियता से छापेमारी की और आरोपी विकास सिंह उर्फ रोहित सिंह गोंड, उम्र 19 वर्ष, को गिरफ्तार किया। आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर इस अपराध को अंजाम दिया था। ब्यौहारी थाना प्रभारी ने बताया, हमने इस मामले को गंभीरता से लिया और हमारी प्राथमिकता थी कि गाड़ी और आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। हमें खुशी है कि हम 24 घंटे के भीतर सफल रहे।

समाचार 04 फ़ोटो 04

ट्रैक्टर की ठोकर से बाइक से गिरा युवक ट्रक के नीचे आया, कुचलकर हुई मौत

शहड़ोल

जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र के गुरा घाटी में एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक बाइक सवार युवक की जान चली गई, जबकि दो अन्य युवक घायल हो गए। घटना का विवरण बताते हुए पुलिस ने बताया कि तीन युवक घोरसा गांव से बाइक में सवार हो कर ब्यौहारी जा रहे थे। तभी अचानक सामने से आ रहे एक ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। यह टक्कर इतनी भयानक थी कि बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई और पीछे बैठे संतोष चर्मकार (32) सड़क पर गिर गए। तभी पीछे से आ रहे एक तेज़ रफ्तार ट्रक ने संतोष को कुचल दिया। हादसे में संतोष की मौत हो गई। हादसे के बाद बाइक पर सवार दो अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि जब ट्रैक्टर ने बाइक को ठोकर मारी तब बाइक अनियंत्रित हो गई और बाइक पर बैठे तीनों युवक इधर-उधर गिर गए। लेकिन पीछे बैठा संतोष सड़क के बीचों-बीच गिर गया, इस दौरान पीछे से आ रहे ट्रैक ने संतोष को कुचल दिया ट्रक चालक जब तक कुछ समझ पाता जब तक देर हो चुकी थी और ट्रैक का पहिया संतोष के ऊपर चढ़ चुका था। ब्यौहारी थाना प्रभारी अरुण पांडे ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई थी। हमने दुर्घटनास्थल से दोनों वाहन, ट्रैक्टर और ट्रक, जब्त कर थाने में खड़ा कर दिया है। जांच जारी है और सभी संबंधित पक्षों से बयान लिए जा रहे हैं।

समाचार 05 फ़ोटो 05

तीन एकड़ सरकारी भूमि को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर कराया अतिक्रमण मुक्त2

शहडोल

जैतपुर के साखी गांव में शासकीय विद्यालय की भूमि पर किए गए अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने ठोस कदम उठाया है। तहसीलदार अर्चना मिश्रा और नायब तहसीलदार शिवकुमार सिंह के नेतृत्व में की गई कार्रवाई में तीन एकड़ से अधिक शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। जानकारी के अनुसार कुछ लोगों ने विद्यालय की शासकीय भूमि पर कच्चे मकान और बड़ी बाउंड्री का निर्माण कर लिया था। इस अतिक्रमण की जानकारी सबसे पहले विद्यालय के प्रचार और स्थानीय निवासियों ने तहसील कार्यालय में दी थी। शिकायत के आधार पर प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई। इस संदर्भ में तहसीलदार अर्चना मिश्रा ने कहा कि हमने स्थानीय लोगों की शिकायत पर तेजी से कार्रवाई की।

यह भूमि शासकीय और इसका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। हम किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं करेंगे। नायब तहसीलदार शिवकुमार सिंह ने भी कहा कि यह कार्रवाई उन लोगों के लिए चेतावनी है जो सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई के दौरान पुलिस बल भी मौके पर मौजूद था। जेसीबी की मदद से अतिक्रमण को हटाने का कार्य पूरा किया गया, जिससे शासकीय भूमि को फिर से उपलब्ध कराया जा सका।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि हमारे गांव की भूमि पर अवैध कब्जा करना गलत था और अब जब प्रशासन ने कार्रवाई की है तो हम सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यह हमारी और आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि कुछ स्थानीय लोग इस कार्रवाई को लेकर असंतोष जता रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने पहले से स्थानीय निवासियों से बातचीत की होती तो शायद स्थिति को संभाला जा सकता था। इस पर तहसीलदार अर्चना मिश्रा ने कहा कि हमारा उद्देश्य हमेशा शासकीय संपत्ति की रक्षा करना है और हम आगे भी इस प्रकार की कार्रवाई जारी रखेंगे।

समाचार 06 फ़ोटो 06

मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन के तहत सुरेन्द्र वाराणसी, काशी व आयोध्या रवाना

उमरिया

मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत उमरिया रेलवे स्टेशन से वाराणसी काशी तथा आयोध्या के लिए स्पेशल ट्रेन रवाना हुई । वाराणसी काशी तथा आयोध्या के लिए 200 तीर्थ यात्री रवाना हुए  जिसमें सुरेंद्र कुमार पटेल उम्र 63 साल निवासी पाली भी शामिल है। सुरेंद्र कुमार पटेल पिता महेश प्रसाद पटेल निवासी वार्ड क्रमांक 2 पाली ने बताया कि मन में तीर्थ करने की इच्छा थी। मेंरे इस सपनें को प्रदेश सरकार ने पूरा कर दिया है , आज मैं वाराणसी काशी तथा आयोध्या के लिए स्पेशल ट्रेन रवाना हो रहा हूं। उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार ने हर वर्ग को ध्यान मे रखते हुए योजनाओं का संचालन किया है । सरकार ने बुजुर्गाे को ध्यान मे रखते हुए मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का संचालन किया है। उनका कहना था कि आर्थिक अभाव के कारण तीर्थ पर नही जा पाते थे, लेकिन हमारे इस सपनें को प्रदेश सरकार ने पूरा लिया है । यह योजना बुजुर्गाे के लिए मील का पत्थर साबित हुई है। मैं इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डा मोहन यादव , जिला प्रशासन को धन्य वाद देता हूं।

समाचार 07 फोटो 07

रक्तवीर हिमांशु तिवारी 25 वर्ष की आयु में 27वीं बार रक्तदान कर दिया सामाजिक सद्भाव का संदेश

उमरिया

रक्त दान ,जीवनदान ये सलोगन तो आपने भी कई बार सुना होगा। पर क्या आप जानते हैं कि आज भी देश में कई लोग रक्तदान की बात सुनते ही सहम तक जाते हैं। जिले के रहने वाले हिमांशु तिवारी 25 की उम्र में 27  बार रक्तदान कर चुके है। हिमांशु तिवारी ने बताया कि जरूरतमंदों के लिए रक्तदान की शुरुआत 09 साल पहले हुई थी. इन 09 साल में वो अब तक 27 बार रक्तदान कर चुके हैं. इसका सिलसिला अब भी जारी है।

उन्होंने अब तक 27 बार ब्लड डोनेट करने के पड़ाव को पार कर रक्तवीर बनने का गौरव हासिल किया है।पहली बार उन्होंने 18 साल की उम्र में रक्तदान किया था। उन्होंन बताया कि अब वह युवाओं को रक्तदान के लिए जागरूक कर रहे हैं। जिसका नतीजा रहा कि 100 युवा उनके साथ रक्तदान के लिए तैयार हैं। जो जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से भी रक्तदान की अपील की है ताकि रक्त की कमी से किसी की जान न जाए। लोग सुरक्षित रहें।वहीं जो लोग रक्त दान करते हैं उनमें से कई लोगों का इसी रक्त दान के चलते बिना आपसी जान पहचान के खून का रिश्ता तक बन चुका है।जानकारों की मानें तो जागरुकता की कमी के चलते ब्लड डोनेशन नहीं किए जाने की स्थिति में जरूरतमंदों को समय पर ब्लड नहीं मिल पाता जिसके कारण आज भी लोग मौत का शिकार हो रहे हैं।ब्लड डोनेशन को लेकर हमारे समाज में इतनी भ्रांतियां हैं कि लोग अपने परिवार के सदस्यों को भी रक्तदान करने से डरते हैं।अंधविश्वास के कारण ब्लड बैंक में भी अक्सर कैंसर, थैलेसीमिया और एक्सीडेंट के मरीजों को ब्लड के लिए परेशान होना पड़ता है। इस बीच युवा हिमांशु तिवारी ऐसे भी हैं जो न सिर्फ ब्लड डोनेशन कर रहे हैं बल्कि अन्य को प्रेरित भी कर रहे हैं।कोई हर तीन माह में ब्लड डोनेशन करता है तो कोई अपनी पॉकेटमनी से मरीजों की मदद करता है तो कोई बिजनेस या जॉब से छुट्टी लेकर ब्लड देने पहुंच जाता है।उन्होंने कहा कि रक्तदान को लेकर लोगों में अभी भी कई भ्रांतियां है। इसके कारण वह रक्तदान करने के लिए आगे नहीं आते हैं। रक्तदान शिविर में कई लोग ऐसे थे जो कई बार रक्तदान कर चुके हैं।उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया है जिले में या जिले के बाहर किसी भी व्यक्ति को रक्त की आवश्यकता होती है तो तत्काल प्रभाव से व्यवस्था करके उन व्यक्तियों को रक्त की व्यवस्था कराई जाती है।रक्तदान से बड़ा दान कुछ भी नहीं है। लोगों द्वारा दिया गया रक्त किसी की जिंदगी बचा सकती है। इसलिए सभी को मिलकर रक्तदान करना चाहिए।रक्तदान महादान है। इसकी महत्ता को समझें और बेझिझक रक्तदान करें। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में अधिकांश रक्तदाता स्वयं सेवक होते हैं, जो सामुदायिक आपूर्ति के लिए रक्तदान करते हैं।

 समाचार 08 फ़ोटो 08

शिवानी पैरामेडिकल में विचार एवं परामर्श सम्मेलन संपन्न, एक राष्ट्र एक चुनाव राष्ट्रव्यापी प्रगति के लिये सकारात्मक

शहड़ोल

भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में समूचे भारत देश में एक राष्ट्र एक चुनाव राष्ट्रव्यापी विचार एवं परामर्श सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में एक राष्ट्र एक चुनाव समिति शहडोल के द्वारा शिवानी पैरामेडिकल कॉलेज में विचार एवं परामर्श सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि जैसिंहनगर विधानसभा क्षेत्र विधायक मनीषा सिंह, भाजपा शहडोल जिला अध्यक्ष अमिता चपरा, जिला संयोजक चंद्रेश द्विवेदी, संस्था संचालक डॉ. डी. के. द्विवेदी, समाजसेवी अमित गुप्ता आदि ने मंच साझा किया। विधायक मनीषा सिंह ने एक राष्ट्र एक चुनाव के बहुआयामी सकारात्मक परिणाम की सोच के लिये प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरे भारत देश में आयोजित हो रहे विचार एवं परामर्श सम्मेलन हेतु धन्यवाद किया। अमिता चपरा ने बताया कि यह सम्मेलन महिलाओं, युवाओं, पेंशनर्स, प्रोफेशनल्श तथा समाज में हर वर्ग के लोगों के बीच आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सभी लोगों का पूर्ण समर्थन प्राप्त हो रहा है। जिला संयोजक चंद्रेश द्विवेदी ने इस सम्मेलन के माध्यम से बताया कि जब कोई चुनाव आयोजित होता है तो न सिर्फ उस चुनावी क्षेत्र बल्कि अन्य क्षेत्रों के राजनैतिक जनप्रतिनिधि, शासकीय कर्मचारी तथा सुरक्षा व्यवस्था इत्यादि में अत्यधिक आर्थिक व्यय व चुनावी अमला लगता है। साथ ही इस दौरान शासन-प्रशासन के मध्य अत्यधिक अस्थिरता निर्मित होती है। आजादी के बाद वर्ष 1964 तक पूरे भारत देश में एक साथ चुनाव होते थे, किन्तु उसके बाद से स्थितियां बदल गई। अब वर्तमान में फिर से पूरे भारत देश में एक राष्ट्र एक चुनाव सम्मेलनों का आयोजन कर सभी भारतीय मतदाताओं के बीच जाकर इसके बहुआयामी सकारात्मक परिणाम पर चर्चा की जा रही है तथा सभी समर्थकों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन भारत के महामहिम राष्ट्रपति को सौंपा जावेगा। उक्त कार्यक्रम में संस्था शिवानी पैरामेडिकल कॉलेज के संचालक डॉ.डी.के.द्विवेदी ने एक राष्ट्र एक चुनाव के बहुआयामी सकारात्मक परिणामों की अपेक्षा से भारत के महामहिम राष्ट्रपति के नाम उपस्थित सभी संस्था कर्मचारियों व छात्र/छात्राओं के बीच ज्ञापन पढा गया जिसे सुनकर सभी उपस्थित जनों ने अपने दोनों हाथ उठाकर समर्थन व्यक्त किये व ज्ञापन में हस्ताक्षर दर्ज किये। उक्त कार्यक्रम में संस्था के पैरामेडिकल प्राचार्य डॉ. रुद्र द्विवेदी, नर्सिंग प्राचार्य श्रीमती मंगला श्रीवास, कौशल विकास प्रभारी अभिषेक तिवारी व सभी शैक्षणिक स्टाफ व छात्र/छात्राएं उपस्थित रहें। कार्यक्रम का संचालन व आभार प्रदर्शन अभिषेक तिवारी ने किया।

*परिचय*

आनंद पाण्डेय पिता स्व. रामरूप पाण्डेयव निवासी वार्ड़ नं. 12 अमरकंटक रोड़ अनूपपुर। मेरा जन्म 9 अक्टूबर 1973 में अनूपपुर (मध्यप्रदेश) हुआ। शंभूनाथ शुक्ल महाविद्यालय शहडोल से बी ए व एमए परीक्षा पास की। डिप्लोमा इन एजुकेशन (डीएड) व शीघ्रलेखन मुद्रलेखन (टाइपिंग) की परीक्षा शहडोल से पास की। 2003 से अभी तक पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहा हूँ। वर्तमान में दैनिक उज्ज्वल समाचार पत्र जो भोपाल व ग्वालियर से प्रकाशित होता है, उसमें सह संपादक, दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर में संभाग ब्यूरो, न्यूज़ 24 एक्सप्रेस टीवी में जिला ब्यूरो, दैनिक पीपुल्स समाचार जबलपुर में जिला रिपोर्टर, भारत 24 नेशनल टीवी में रिपोर्टर, एसेम्बली ऑफ जर्नलिस्ट यूनियन में संभाग महासचिव, भारत विकास परिषद में सचिव पद कार्य कर रहा हूँ।

.................................................................................................

*देश का चौथा स्तंभ, पत्रकारिता का बदलता दौर, कलम हो गई आवारा व दागदार*

*पत्रकारिता समाज का आईना मगर धर्म, जातिवाद, मन्दिर मस्जिद की तथाकथित राजनीति से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं*

.................................................................................................

बदलते दौर की पत्रकारिता में सब कुछ संभव है। भारत मे न्यायपालिका, कार्यपालिका व व्यवस्थापिका तीन स्तंभ माने गए है, इसके अलावा भारत का चौथा स्तंभ पत्रकारो को कहा जाता है। चौथा स्तंभ की हालत दयनीय है। भारत मे तीनो स्तम्भों को विशेषाधिकार प्राप्त है, लेकिन भारत के चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारो को अभी तक कोई विशेषाधिकार प्राप्त नही हुआ है। समाज का आईना के साथ पत्रकारो को जनता और सरकार के बीच की एक कड़ी मानी जाती है, जो एक दूसरे की बात पहुचाने का कार्य करती है। आज की पत्रकारिता पूरी तरह व्यवसाय का रूप धारण कर चुकी हैं, इसका स्वरूप भी बहुत बदल गया है, जिस कारण से पत्रकारो की कलम भी दूषित होती जा रही है, कलम बिकते जा रही है, लिखने की कला लिखावट बदलती जा रही है, कलम की स्याही बदलते जा रही हैं, पत्रकारिता के मायने बदलता जा रहा है, स्वच्छ पत्रकारिता कही न कही कराह रही है। पुराने दौर में कलमकार की कलम को कुचलने की कोशिश होती रही है और आज भी यही हो रहा है। आज के परिवेश में स्वच्छ पत्रकारिता की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

*पत्रकारिता क्या है*

समाचारों को लिखने, इकट्ठा करने, संपादित करने और प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को पत्रकारिता कहते हैं, यह एक गद्य शैली है, पत्रकारिता, आधुनिक सभ्यता का एक प्रमुख व्यवसाय है। पत्रकारिता में समाचारों को सटीक, संक्षिप्त, और स्पष्ट तरीके से लिखा जाता है। पाठको का ध्यान रखना पड़ता है। समाचारों को प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से प्रस्तुत किया जाता है। समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए अखबार, पत्रिकाएं, रेडियो, टेलीविजन व वेब-पत्रकारिता, समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए कई तरह के लोग जैसे संवाददाता, स्तंभकार, सम्पादक, फ़ोटोग्राफ़र, पृष्ठ डिजाइनर व अन्य लोग कार्य करते हैं।

*पत्रकारिता का वर्तमान स्वरुप*

40 वर्ष पुरानी पत्रकारिता व आज का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है।बदलते वक्त के साथ बाजारवाद और पत्रकारिता के अन्तर्सम्बन्धों ने पत्रकारिता की विषय-वस्तु तथा प्रस्तुति शैली में व्यापक परिवर्तन किए।वर्तमान में भारतीय पत्रकारिता सरकारी गजट या नोटिफिकेशन बनकर रह गई है। लगभग सभी मीडिया संस्थान और चैनल दिन रात सरकार का गुणगान करते हैं। इक्कीसवीं सदी में दुनिया विज्ञान और टेक्नोलॉजी पर बात कर रही है परन्तु भारतीय मीडिया धर्म, जातिवाद, मन्दिर मस्जिद की तथाकथित राजनीति से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। इस तरह की पत्रकारिता भारतीय समाज में अन्धविश्वास, धार्मिक उन्माद, सामाजिक विघटन ही पैदा करेगी। वर्तमान समय में मीडिया की नजरों में सेक्युलर, उदारवादी या संविधानवादी होना स्वयं में एक गाली हो गया है।

*कॉपी पेस्ट की पत्रकारिता*

पहले के दौर में पत्रकारिता का एक सीमित संशाधन के माध्यम से किया जाता था, कॉपी पेस्ट की सम्भावना बहुत ही कम हुआ करती थी, मगर आज के दौर में पत्रकारिता के संसाधन का स्तर बहुत ही ज्यादा बढ़ गया हैं, इसलिए कॉपी पेस्ट का दौर शुरू हो गया है। कॉपी-पेस्ट पत्रकारिता, जिसे "कॉपी पेस्ट जर्नलिज्म" भी कहा जाता है, एक ऐसी पत्रकारिता शैली है जिसमें पत्रकारिता में पत्रकार किसी अन्य स्रोत (जैसे कि वेबसाइट, समाचार पत्र, या ब्लॉग) से किसी और के काम को बिना उचित श्रेय या अनुमति के कॉपी करके उसे अपनी कहानी या रिपोर्ट में बिना बदलाव या संशोधन के शामिल कर लेते हैं। लेना।  कर लेते हैं। कॉपी की गई सामग्री को बिना किसी अपनी कहानी या रिपोर्ट में शामिल कर लिया जाता है। कॉपी-पेस्ट पत्रकारिता एक गंभीर समस्या है जो पत्रकारिता की विश्वसनीयता को कम करती है जो पाठकों के साथ धोखा है। पत्रकारों को हमेशा अपनी सामग्री को मूल रूप से तैयार करना चाहिए और दूसरों के काम को उचित श्रेय देना चाहिए।

*पत्रकारिता में सोशल मीडिया का दखल*

सोशल मीडिया पत्रकारिता के लिए एक शक्तिशाली और तेजी से उभरता हुआ माध्यम है, जो खबरों को तुरंत साझा करने, दर्शकों के साथ बातचीत करने और सूचना के लोकतंत्रीकरण में मदद करता है।सोशल मीडिया पत्रकारिता को खबरों को तुरंत और तेजी से साझा करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे पत्रकार दुनिया भर में होने वाली घटनाओं के बारे में तत्काल जानकारी दे सकते हैं। ऑनलाईन पत्रकारिता से लोगो का अखबारों से मोह भंग हो गया हैं। व्हाट्सएप्प, फेसबुक, इंस्ट्राग्राम, एक्स के अलावा ऑनलाइन पोर्टल, वेब पोर्टल, यू ट्यूब का उपयोग पत्रकारिता के लिए बहुत तेजी से हो रहा है। ऑनलाईन पत्रकारिता का अच्छा परिणाम व दुष्परिणाम देखने को मिलता हैं।सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और भ्रामक सामग्री फैलने का खतरा ज्यादा होता है, जिससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर असर पड़ता हैं। सोशल मीडिया में सरकार का अंकुश न होने पर इसके माध्यम से गलत खबरे भी परोस दी जाती है, भ्रामक खबरो के कारण आम जनता के बीच अफवाह फैलने से बड़ी घटना घट जाती है।

*दागदार होती पत्रकारिता*

आज की पत्रकारिता पूरी तरह से बदल गई हैं। बेरोजगारी के दौर में दूर के ढोल सुहावने वाली कहावत पर पत्रकारिता की चकाचौन्ध के कारण अपात्र लोग भी पत्रकारिता में घुसकर पत्रकारिता को कलंकित करने का का काम कर रहे है। आज पत्रकारिता का यह हाल हो गया हर मोहल्ले से एक पत्रकार तैयार हो रहे है। जिनके पास न तो कोई डिग्री हैं न अनुभव जिसके कारण पत्रकारिता बदनाम हों रही है। आज की पत्रकारिता पूरी तरह व्यवसाय बनकर रह गयी हैं। संपादक 2 हजार से 5 हजार रुपया लेकर किसी को भी पत्रकार बना दे रहे हैं। ऐसे में अवैध कार्य करने वाले, जिनके ऊपर अपराध दर्ज है, सजा हो चुकी हैं, किसी पार्टी का नेता हैं बहुत हीं आसानी से पत्रकार बन जाते है। और पत्रकारिता को कही न कही कलंकित करते रहते हैं। रुपए की लालच में संपादक ये पता करने की बिल्कुल कोशिश नही करते कि सामने वाले का स्टेटस क्या है।

*कलम का असर खत्म*

लगभग 30 से 40 वर्ष पहले सोशल मीडिया नहीं था गिनती के अखबार प्रकाशित होते थे, न्यूज़ चैनल भी सीमित थे, उस समय की पत्रकारिता में कोई भी खबर चल जाती थी तो उस खबर पर तुरंत कार्यवाही हो जाती थी, पीड़ित को जल्द ही न्याय मिल जाता था। मग़र आज के जमाने मे हजारों टीवी चैनल, लाखो अखबार, यू ट्यूब, पोर्टल, वेब साइट व फेसबुक, व्हाट्सएप्प, एक्स के होने के कारण जल्द खबर चलाने की होड़ में बहुत सारी खबर झूटी अफवाह होने के कारण खबरों के आधार पर कार्यवाही नही होती, हर खबर की जांच करना आसान नही रह गया है। जिले में बैठा अधिकारी भी जनता है अब के पत्रकारो की कलम में वह सच्चाई व धार नही रह गई हैं की खबर छपते कार्यवाही हो जाये। खबरों की इस होड़ में सही खबर भी दबकर रह जाती है

*पत्रकारो की आवारा कलम* 

पत्रकारिता में पत्रकारो की कलम बिलकुल सटीक, सच व सही होनी चाहिए, मगर बदलती पत्रकारिता में यह संभव नही दिख रहा है। शब्दो का चयन भाषा का जमकर दुरुपयोग हो रहा है, सारी मर्यादाए तोड़कर कलम की लिखावट दूषित किया जा रहा हैं, किसी के बारे में कौन कितना लिख सकता है इसकी बराबरी करने में लगे हुए हैं। सोश ल मीडिया में कोई भी खबर वायरल हुई, उस खबर की सच्चाई जाने बिना खबर चलाने की होड़ में 10 मिनट में सोशल मीडिया प्लेटफार्म में खबर चलने लगती हैं, बाद में पता चलती हैं कि सच्चाई कुछ और हैं। लोगो की झूठी शिकायत पर बिना सच्चाई जाने खबर चलाकर आरोपी बना दिया जाता है जो सही नहीं है। आज के पत्रकार किसी के बारे में कुछ भी लिखने से परहेज नही करते, खबरों के माध्यम से ब्लैकमेल भी किया जाता है, विज्ञापन के नाम पर दबाब बनाया जाता हैं। पत्रकारो को लिखने की स्वतंत्रता है मगर उसका भी एक दायरा हैं, दायरे से बाहर जाकर झूठ को सच बनाकर पेश करना पत्रकारिता नही है।

*असीमित प्लेटफार्म और तेज खबर*

आज के पत्रकारिता में बहुत कुछ नया, अच्छा, खराब सब कुछ सीखने को मिल रहा हैं, मीडिया का प्लेटफार्म बहुत ही बड़ा व असीमित हो गया है। जिससे बहुत कुछ नया करने की ललक पत्रकारो में जग रही हैं। जिसके परिणाम अच्छे बुरे दोनो हो सकते हैं। मगर यह बिल्कुल सच है कि पत्रकारिता का स्तर गिरता जा रहा हैं, जो सभी के लिए चिंतनीय विषय है। इस विषय पर देश के बड़े संपादक व पत्रकारो को बैठकर सोचना होगा कि यह पत्रकारिता कितनी दूर तक लेकर जाएगी और इसके परिणाम कितने घातक हो सकते हैं। एक बात यह भी है कि सोशल मीडिया के जमाने मे पत्रकारिता इतनी तेज हों गयी हैं कि पलक झपकते खबरे वायरल होकर पूरी दुनिया मे फैल जाती है। जिससे लोगो को पलभर में खबरे मिल जाती है। टीवी का जमाना अब जाता रहा, मोबाइल के जमाने मे मानो क्रांति आ गयी हैं। इतनी तेज खबर परोस दी जाती जो लोगो ने कभी ऐसा सोचा भी नही रहा होगा। 

*लोकतांत्रिक समाज में मीडिया महत्वपूर्ण*

समाचार पत्र और पत्रिकाएँ लोगों के दिन की अच्छी शुरुआत करती हैं। समाचार पत्र आमतौर पर हमारा मानसिक नाश्ता होता हैं, और दिन की सुर्खियाँ जानने की ईक्षा होती हैं। कभी पॉजिटिव खबरे तो कभी निगेटिव खबरों से दिन की शुरुआत होती हैं। दूसरी ओर, पत्रिकाएँ हमें हमारे परिवेश में होने वाली विभिन्न घटनाओं पर एक बड़ा और अधिक संपूर्ण परिप्रेक्ष्य प्रदान करती हैं। पत्रकारिता अन्य चीजों के अलावा समाचार, राय और रिपोर्ट के संदर्भ में एक पत्रकार के काम को संदर्भित करती है। आजकल लोग चल रही घटनाओं से अवगत रहने के लिए प्रेस पर भरोसा करते हैं। एक आधुनिक समाचार पत्र सिर्फ एक समाचार स्रोत से कहीं अधिक है, यह वर्तमान सूचनाओं का भंडार, सार्वजनिक आलोचना का उपकरण और जनमत को आकार देने वाला भी है। एक लोकतांत्रिक समाज में मीडिया महत्वपूर्ण है। जनमत के निर्माण पर उनका बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। उन्हें आम आदमी की ओर से राजनीति के बारे में सोचने वाला माना जा सकता है। एक आधुनिक समाचार पत्र समाचार स्रोत के रूप में सेवा करने के अलावा वर्तमान सूचनाओं के पुस्तकालय, सार्वजनिक आलोचना के उपकरण और जनमत को आकार देने वाले के रूप में कार्य करता है। एक लोकतांत्रिक समाज में मीडिया महत्वपूर्ण है। जनमत को आकार देने पर उनका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। 

*पत्रकारिता दुनिया के लिए महत्वपूर्ण*

पत्रकारिता "बेजुबानों की आवाज़" के रूप में कार्य करती है, जो हमारे समाज के सभी सदस्यों के विचारों को व्यक्त करती है। यह अधिकारियों और आम जनता के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करती है। एक आधुनिक समाचार पत्र में कर्मचारियों में सक्षम चित्रकार, कार्टूनिस्ट, फोटोग्राफर आदि भी होते है। विज्ञापन प्रबंधक और संचालन प्रबंधक की आवश्यकता होती है। पत्रकार, या न्यूज़पेपरमैन, उन सभी व्यक्तियों के लिए सामूहिक शब्द है जो एक समाचार पत्र के लिए काम करते हैं। क्योंकि अब हम एक विश्वव्यापी अर्थव्यवस्था और व्यावहारिक रूप से एक वैश्विक समाज हैं, पत्रकारिता दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। एक सक्षम पत्रकार अपनी खुद की विशिष्ट शैली विकसित करता है। वह समझता है कि रुचि कैसे जगाई जाए और जो उसे देना है उसके लिए मांग कैसे की जाए। पत्रकारिता के बारे में याद रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह केवल सार्वजनिक हित की सेवा के लिए मौजूद है। एक साहित्यिक महानता की आकांक्षा रखता है, जबकि दूसरा प्रचार को अधिक महत्व देता है। इसका अनुप्रयोग का क्षेत्र बहुत व्यापक है, और इसमें कितना सुधार किया जा सकता है इसकी कोई सीमा नहीं है। हालाँकि, लेखक को संपादक के विश्वासों को पाठकों पर थोपने के लिए समाचारों को तुच्छ और खंडित करने की वर्तमान प्रवृत्ति से सावधान रहना चाहिए। अंत में, पत्रकारिता "आलोचना और बहस के लिए एक सार्वजनिक स्थान प्रदान करती है। यह एक लोकतांत्रिक समाज के लिए महत्वपूर्ण है।

आनंद पाण्डेय (पत्रकार)

*सह संपादक दैनिक उज्ज्वल भोपाल*

*संभागीय ब्यूरो दैनिक रेवांचल टाइम्स*

*दैनिक पीपुल्स समाचार, भारत 24 टीवी, न्यूज़ 24 एक्सप्रेस टीवी*

वार्ड़ नं. 12 अमरकंटक रोड़ अनूपपुर म.प्र.

मोबाईल- 9806418220, 9893103531

MKRdezign

,

संपर्क फ़ॉर्म

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget