विद्यालय में बड़ा खेल? फर्जी आवक रजिस्टर, गायब आवेदन और अतिथि शिक्षक भर्ती में कथित धांधली का खुलासा

विद्यालय में बड़ा खेल? फर्जी आवक रजिस्टर, गायब आवेदन और अतिथि शिक्षक भर्ती में कथित धांधली का खुलासा

*"आवेदन गायब करो, फिर कहो मिला ही नहीं" — अभ्यर्थी का गंभीर आरोप*

*फिर से हुई अतिथि शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी तो अन्य कई गंभीर मुद्दों के साथ हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की चेतावनी*


उमरिया

जिले के बिरसिंहपुर पाली क्षेत्र के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शाहपुर एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में है। अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के बाद अब विद्यालय में आवेदन प्राप्त करने और अभिलेख संधारण की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अभ्यर्थी दिलीप कुमार द्विवेदी ने आरोप लगाया है कि विद्यालय में प्राप्त होने वाले आवेदनों को नियमित शासकीय अभिलेख में दर्ज न कर कथित रूप से एक अलग रजिस्टर में दर्ज किया जाता है, ताकि बाद में आवेदन प्राप्त होने से ही इनकार किया जा सके।

आवेदक के अनुसार, 8 जुलाई 2026 को आवेदन जमा करने के बाद पावती देने से मना कर दिया गया। विद्यालय के भृत्य ने कथित रूप से कहा कि विद्यालय की सील और रजिस्टर प्रभारी प्राचार्य के पास हैं, इसलिए उनके आने के बाद ही पावती मिलेगी। वहीं जब प्रभारी प्राचार्य श्री सिंह परस्ते से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कथित रूप से कहा कि सील और आवक-जावक रजिस्टर उनके पास नहीं, बल्कि विद्यालय में ही रहते हैं। दोनों कथनों में विरोधाभास ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया।

आवेदक का कहना है कि 10 जुलाई 2026 को पावती मांगने पर प्रभारी प्राचार्य की मौजूदगी में कंप्यूटर ऑपरेटर से आवेदन दर्ज कराया गया। इसके बाद जो पावती दी गई, उसमें आवक की सील के स्थान पर जावक की सील लगी थी। इतना ही नहीं, रजिस्टर में आवक क्रमांक 03 दर्ज था, जबकि पावती पर 031 अंकित किया गया था बाद में उसे कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा सुधारा गया इससे अभिलेखों की प्रामाणिकता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित रूप से प्रमाणित रजिस्टर में जनवरी 2025 से जुलाई 2026 तक केवल तीन पत्र ही दर्ज मिले। यदि यह सही है, तो इतने लंबे समय में विद्यालय को क्या  केवल तीन ही पत्र  प्राप्त हुए? अन्य आवेदन कहाँ गए? आवेदक का आरोप है कि पहले भी उसके कई आवेदन गायब कर दिए गए और बाद में अधिकारियों के समक्ष यह कह दिया जाता है कि आवेदन मिला ही नहीं।

आवेदक ने यह भी दावा किया है कि संभागीय जांच समिति की रिपोर्ट में अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन, पुराने वैध पैनल की उपेक्षा तथा भर्ती में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में विद्यार्थियों को होम एग्जाम में कथित रूप से अनियमित तरीके से उत्तीर्ण कराने जैसे मामलों का भी उल्लेख होने का दावा किया गया है।

ग्रामीणों द्वारा प्रभारी प्राचार्य पर पैसे लेकर विद्यार्थियों को पास कराने जैसे आरोप लगाए जाने की बात भी सामने आई है। आवेदक का कहना है कि संभाग स्तरीय गठित जांच के जांच रिपोर्ट में भी कई मामलों में अनियमितताएं उजागर हुई हैं।

दिलीप कुमार द्विवेदी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सत्र 2026-27 की अतिथि शिक्षक भर्ती में फिर से किसी प्रकार की अनियमितता हुई तो प्रभारी प्राचार्य, एसएमडीसी अध्यक्ष, सचिव, संबंधित सदस्यों तथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी और संपूर्ण अभिलेख न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में जानकारी दी जा चुकी है।

*अब उठ रहे हैं बड़े सवाल*

क्यों विद्यालय में शासकीय आवक रजिस्टर के स्थान पर कोई अलग बिना प्रमाणित रजिस्टर उपयोग में लाया जाता रहा, आपत्ति करने पर रजिस्टर को केवल पेज संख्या के आधार पर प्रमाणित किया गया।जनवरी 2025 से जुलाई 2026 तक केवल तीन आवेदन दर्ज होने का कारण क्या है। आवेदन की पावती देने में देरी और सील संबंधी विरोधाभास क्यों सामने आया। क्यों आवक की जगह जावक का शील लगाया गया। क्या इतने वर्षों में 3 पत्रों के अलावा विद्यालय में कोई पत्र व्यवहार नहीं हुआ। अतिथि शिक्षक भर्ती में जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं का उल्लेख है, तो जिम्मेदारों पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? प्रभारी प्राचार्य श्री सिंह परस्ते का सिर्फ वेतन वृद्धि भर  रोकना क्या पक्षपात नहीं है।

जांच रिपोर्ट में अतिथि शिक्षक भर्ती में धांधली उजागर हुई है और अन्य कई अनियमिताएं सामने आई है तो उनके पद पर बने रहना क्या न्यायसंगत है जबकि विद्यालय में उनसे दो वरिष्ठ उच्च माध्यमिक शिक्षक है। सहायक आयुक्त उमरिया को इसकी जानकारी दी गई लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया।

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