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पिता नाबालिग पुत्री से करता था अश्लील हरकत, दुष्कर्म का किया प्रयास, आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार
शहडोल
जिले में रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। जिले की 16 वर्षीय नाबालिग ने अपने ही पिता पर दुष्कर्म के प्रयास और लंबे समय से अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया है। पीड़िता घर से भागकर जबलपुर पहुंची, जहां उसने पुलिस को पूरी आप बीती सुनाई और अपनी बात के समर्थन में मोबाइल से रिकॉर्ड किए गए कुछ वीडियो भी दिखाए।
मामले की जानकारी मिलने के बाद जबलपुर पुलिस ने शहडोल पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद शहडोल पुलिस नाबालिग को अपने साथ शहडोल लेकर आई और महिला थाने में उसकी शिकायत पर आरोपी पिता के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। नाबालिग की पहचान गोपनीय रखने के लिए थाना क्षेत्र का नाम सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है।
किशोरी 9 जुलाई को घर से निकलकर शहडोल रेलवे स्टेशन पहुंची। वहां से कटनी होते हुए वह करीब 180 किलोमीटर दूर जबलपुर पहुंच गई। वह दिनभर शहर में घूमती रही और रात रेलवे स्टेशन पर गुजारी। रेलवे स्टेशन पर बैठे देखकर एक पुलिसकर्मी ने उससे पूछताछ की और उसे महिला थाने ले गया। वहां किशोरी ने अपने साथ हो रही प्रताड़ना की जानकारी पुलिस को दी।
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसका पिता पिछले करीब दो वर्षों से शराब के नशे में घर आता था और उसके साथ अश्लील हरकतें करता था। उसने आरोप लगाया कि पिता अनुचित तरीके से छूता था तथा विरोध करने पर धमकाता भी था। पुलिस अधीक्षक संजय कुमार अग्रवाल ने बताया की पुलिस ने नाबालिग को सुरक्षित शहडोल लाकर महिला थाने में उसकी शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज की और आरोपी पिता की गिरफ्तारी कर ली गई है।
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युवक तलवार लेकर गांव में घूमने से मचा हड़कंप, पुलिस के सामने करता रहा अजीब हरकते
शहडोल
जिले के जैतपुर थाना क्षेत्र की झींक बिजुरी चौकी अंतर्गत ग्राम सेमरिया में एक युवक के हाथ में तलवार लेकर गांव में घूमने का मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन युवक पुलिस के सामने भी तलवार लहराता रहा। पुलिस ने उसे दूर से समझाने का प्रयास किया, हालांकि वह नहीं माना और पुलिस को धमकाते हुए आगे बढ़ गया। इस दौरान किसी ग्रामीण ने घटना का वीडियो बना लिया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
पुलिस के अनुसार सूचना मिली थी कि एक युवक हाथ में तलवार लेकर गांव में घूम रहा है। आशंका जताई गई थी कि वह किसी पर हमला कर सकता है। सूचना मिलते ही झींक बिजुरी चौकी प्रभारी उप निरीक्षक रामपाल वर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
चौकी प्रभारी ने बताया कि युवक की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है। पुलिस ने उसके पास जाने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाकर उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपनी ही धुन में चलता रहा और तलवार लहराते हुए पुलिस को भी धमकाने लगा। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने संयम बरता ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
कुछ देर बाद युवक वहां से चला गया। इस दौरान मौजूद एक व्यक्ति ने पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में युवक हाथ में तलवार लेकर पुलिस के सामने चलता हुआ दिखाई दे रहा है। पुलिस का कहना है कि युवक की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और परिजनों से दोबारा इलाज कराने के लिए कहा जाएगा, ताकि भविष्य में किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। वहीं, पुलिस मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई भी कर रही है।
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कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन में 'अनबॉक्स' थीम पर फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता संपन्न, कल्पनाशीलता की अनूठी उड़ान
अनूपपुर
कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन, अमरकंटक के जूनियर सेक्शन के सीसीए क्लब द्वारा शनिवार को कक्षा तृतीय से पंचम तक के विद्यार्थियों के लिए 'अनबॉक्स' थीम पर फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में नन्हे विद्यार्थियों ने अपनी सृजनात्मक सोच, आत्मविश्वास और कलात्मक प्रतिभा का मनोहारी प्रदर्शन कर सभी का मन मोह लिया।
विद्यालय परिसर रंग-बिरंगी वेशभूषाओं और उत्साहपूर्ण वातावरण से सराबोर रहा। विद्यार्थियों ने निर्धारित थीम के अनुरूप विविध अभिनव एवं आकर्षक परिधानों में मंच पर अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई। प्रत्येक प्रतिभागी ने लगभग 30 सेकंड के संक्षिप्त आत्म-परिचय अथवा अपने पात्र से संबंधित प्रेरक पंक्तियों के माध्यम से अपनी प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बनाया। बच्चों द्वारा तैयार किए गए सरल एवं रचनात्मक प्रॉप्स ने प्रतियोगिता को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों में रचनात्मक चिंतन, मंच संचालन कौशल, अभिव्यक्ति क्षमता, आत्मविश्वास तथा व्यक्तित्व विकास को नई दिशा प्रदान करती हैं। "अनबॉक्स" जैसी प्रेरणादायी थीम बच्चों को परंपरागत सोच से बाहर निकलकर नए विचारों और नवाचार की ओर प्रेरित करती है।प्रतियोगिता के सफल आयोजन में सीसीए क्लब, शिक्षकों एवं अभिभावकों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। यह आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक प्रेरणादायक एवं यादगार पहल सिद्ध हुआ।
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अमरकंटक–कबीर चबूतरा मार्ग जर्जर, माधव सरोवर पुल भी बना हादसे का कारण, मरम्मत की उठी मांग
अनूपपुर
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाले अमरकंटक–कबीर चबूतरा मार्ग की बदहाल स्थिति यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। लगातार हो रही बारिश के बीच सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण वाहनों का आवागमन जोखिम भरा हो गया है। प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले पर्यटक, श्रद्धालु और स्थानीय नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
लंबे समय से मरम्मत की बाट जोह रही है। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका बनी रहती है। यह मार्ग दो राज्यों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग होने के बावजूद इसकी दुर्दशा पर संबंधित विभाग का पर्याप्त ध्यान नहीं है।
अफरोज रोड से बांधा पुल तक सड़क की चौड़ाई भी काफी कम है। सड़क सिंगल लेन होने के कारण आमने-सामने से आने वाले दो बड़े वाहनों की क्रॉसिंग के दौरान जाम और दुर्घटना की स्थिति बन जाती है। सड़क किनारे पर्याप्त पिचिंग और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से बरसात के मौसम में खतरा और बढ़ गया है।
इसी मार्ग पर नर्मदा नदी के बांधा क्षेत्र स्थित माधव सरोवर पुल की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। पुल के दोनों ओर लगी लोहे की रेलिंग क्षतिग्रस्त होकर नदी की ओर झुक गई है और कई स्थानों पर अस्थिर दिखाई दे रही है। वहीं पुल की कंक्रीट सतह टूट चुकी है तथा नीचे की मिट्टी वर्षा के कारण कटाव होने से खोखली हो गई है। ऐसे में भारी वाहनों के गुजरने पर पुल की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगो की मांग है की प्रसाशन ध्यान दे नही तो कभी भी कोई बड़ी घटना घट सकतीं हैं।
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30 साल बाद अमरकंटक के साल वनों पर फिर साल बोरर का संकट, 22 हजार पेड़ प्रभावित
*देहरादून से वैज्ञानिक दल करेगा प्रभावित क्षेत्र का दौरा*
अनूपपुर
मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक के साल वनों पर लगभग तीन दशक बाद एक बार फिर साल बोरर (हार्टवुड बोरर) का प्रकोप बढ़ने लगा है। अमरकंटक वन परिक्षेत्र में वर्ष 2026-27 के सर्वे में साल के वृक्षों में कीट का संक्रमण सामने आया है। वन विभाग के अनुसार 8,584 हेक्टेयर वन क्षेत्र के 18 कक्षों में लगभग 40 लाख साल के वृक्ष हैं, जिनमें करीब लगभग 22 हजार वृक्ष साल बोरर से प्रभावित पाए गए हैं जिसमें अभी तक 15000 से अधिक संख्या में कीट पकड़े जा चुके है ।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अमरकंटक क्षेत्र में इससे पहले वर्ष 1995-96 के दौरान साल बोरर का बड़ा प्रकोप सामने आया था। शुरुआती स्तर पर संक्रमण पर नियंत्रण नहीं होने के कारण उस समय बड़ी संख्या में साल के वृक्ष संक्रमित हुए थे और प्रभावित पेड़ों को काटकर जंगल से हटाना पड़ा था। वर्तमान में संक्रमण स्थानीय स्तर पर है और विभाग इसे नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चला रहा है।
साल बोरर की इल्ली पेड़ की छाल को भेदकर तने के भीतर प्रवेश करती है और सैपवुड व हार्टवुड को नुकसान पहुंचाते हुए सुरंगें बनाती है। इससे पेड़ धीरे-धीरे कमजोर होकर सूखने लगता है। मानसून के दौरान वयस्क कीट बाहर निकलकर अन्य स्वस्थ वृक्षों को संक्रमित करते हैं, जिससे इस मौसम में संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है।
वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष "ट्रैप ट्री ऑपरेशन" शुरू किया है। इसके तहत रस छोड़ रहे संक्रमित वृक्षों को छह से सात टुकड़ों में काटकर जंगल में ही रखा जाता है। इनसे निकलने वाली गंध से आकर्षित होकर साल बोरर कीट बड़ी संख्या में उन पर एकत्र हो जाते हैं। इसके बाद शाम से सुबह तक वनकर्मी और स्थानीय ग्रामीण इन कीटों को एकत्र कर संग्रहण केंद्र में जमा करते हैं। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका नष्टीकरण किया जाता है।
भारतीय वानिकी अनुसंधान संस्थान देहरादून से वैज्ञानिकों का दल अमरकंटक पहुंचकर प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन करेगा। विशेषज्ञ कीट के व्यवहार, संक्रमण के कारणों तथा प्रभावी नियंत्रण के उपायों पर वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे, जिससे भविष्य में इसके स्थायी प्रबंधन की रणनीति तैयार की जा सके।
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दो दिवसीय आयोजित दंगल का हुआ समापन, देश-विदेश के पहलवानों ने आजमाया दांव पेंच, रहा रोमांचक मुकाबला
अनूपपुर
जिले के कोयलांचल क्षेत्र नगर पालिका पसान के जमुना कालरी के मेन दुर्गा पंडाल में आयोजित दो दिवसीय भव्य दंगल (कुश्ती) प्रतियोगिता का शनिवार को भव्य समापन हुआ। दो दिनों तक चले इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों एवं पड़ोसी देश नेपाल से आए पहलवानों ने अपने दमदार दांव-पेंच और शानदार खेल कौशल का प्रदर्शन कर हजारों दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। प्रतियोगिता का सबसे बड़ा आकर्षण महिला पहलवानों का शानदार प्रदर्शन रहा। दूसरे दिन भी महिला पहलवानों ने पुरुष पहलवानों को रोमांचक मुकाबलों में पराजित कर अपनी प्रतिभा और ताकत का लोहा मनवाया।
इस प्रतिष्ठित दंगल प्रतियोगिता में राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली तथा नेपाल से आए 7 महिला और 18 पुरुष, कुल 25 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवानों ने भाग लिया। प्रत्येक मुकाबले में पहलवानों ने बेहतरीन तकनीक, फुर्ती और दमखम का परिचय दिया। कई मुकाबले इतने रोमांचक रहे कि अंतिम क्षण तक जीत-हार का फैसला नहीं हो पाया और निर्णायक दांव लगते ही पूरा अखाड़ा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
प्रतियोगिता को देखने के लिए अनूपपुर जिले के आसपास के क्षेत्रों से हजारों खेल प्रेमी पहुंचे। महिलाओं, युवाओं और बच्चों की भारी भीड़ ने पूरे उत्साह के साथ मुकाबलों का आनंद लिया। आयोजन स्थल पर पूरे समय मेले जैसा माहौल बना रहा।
दो दिवसीय इस भव्य दंगल ने खेल प्रेमियों के दिलों में अपनी अलग छाप छोड़ी। विशेष रूप से महिला पहलवानों के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि आज वे किसी भी चुनौती का सामना करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
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पनिका समाज की राष्ट्रीय बैठक संपन्न, अनुसूचित जनजाति दर्जा बहाल करने की मांग तेज करने का ऐलान
अनूपपुर
अमरकंटक के कपिलधारा मार्ग स्थित धारकुंडी आश्रम में पनिका समाज की अखिल भारतीय राष्ट्रीय बैठक आयोजित हुई। समाजसेवी बिहारीदास मुरचुले के नेतृत्व में आयोजित बैठक में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आए सामाजिक पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य विषय पनिका समाज को पुनः अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिलाने के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक स्तर पर साझा रणनीति तैयार करना रहा।
पनिका समाज ने कहा की वर्ष 1971 से पहले अविभाजित मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में पनिका, पनका, पंख एवं पान जातियां अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल थीं। बाद में संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश, 1950 में 8 दिसंबर 1971 को किए गए संशोधन के बाद इन जातियों पर क्षेत्रीय प्रतिबंध लागू कर दिया गया, जिसके कारण कई राज्यों में एक ही समुदाय के लोगों को अलग-अलग वर्गों में विभाजित कर दिया गया।
एक ही जाति के लोगों को कहीं अनुसूचित जनजाति तो कहीं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखना संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 16 में प्रदत्त समानता के अधिकारों की भावना के विपरीत है। उन्होंने मांग की कि वर्ष 1971 से पूर्व की स्थिति बहाल करते हुए पनिका, पनका, पंख एवं पान जातियों को पूरे देश में पुनः अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया जाए।
पूर्व में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती के कार्यकाल में 2004 में केंद्र सरकार को अनुशंसा भेजी गई थी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ सरकार ने भी वर्ष 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के माध्यम से प्रधानमंत्री को अनुशंसा पत्र भेजा था। समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस विषय पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, शिवराज सिंह चौहान तथा रमन सिंह के समक्ष भी मांग रखी जा चुकी है। बैठक में समाज ने एकजुट होकर आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने पर जोर दिया।
समाचार 08
जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की बैठक आज
उमरिया
राज्य शासन व्दारा खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन, भंडारण की रोकथाम हेतु जिला स्तरीय टास्क फोर्स का गठन कर खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन तथा भंडारण की रोकथाम हेतु कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए गए है । जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन तथा भंडारण के रोकथाम, नियंत्रण हेतु 20 जुलाई को समय सीमा की बैठक के पश्चात दोपहर 12 बजे से कलेक्टर सभागार में जिला टास्क फोर्स समिति की बैठक आयोजित की गई है। बैठक में सर्व संबंधितों से उपस्थिति की अपेक्षा की गई है।
समाचार 09
सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आज
उमरिया
जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की वर्चुअल एवं फिजिकल बैठक का आयोजन कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय की अध्यक्षता में 20 जुलाई को समय सीमा बैठक के पश्चात कलेक्ट्रेट सभागार में किया गया है। बैठक में सर्व संबंधितों से उपस्थिति की अपेक्षा की गई है।
समाचार 10
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी
उमरिया
वर्षाकाल के दौरान झरने या अन्य वॉटरबॉडी के नजदीक जाने एवं अन्य गतिविधियों के दौरान जनहानि की घटनाओं को रोकने के लिए उपखंड मजिस्ट्रेट उपखंड बांधवगढ़ अम्बिकेश प्रताप सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 में प्रदत्त किये गये अधिकारों को प्रयोग में लाते हुये सम्पूर्ण अनुविभाग बांधवगढ़ क्षेत्र में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।
जारी आदेश अनुसार झरने व अन्य वॉटर बॉडी एवं ऐसे दुर्घटना संभावित क्षेत्र से 50 मीटर के भीतर प्रवेश करना एवं पिकनिक मनाना आदि पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। झरने व अन्य वॉटर बॉडी एवं ऐसे दुर्घटना संभावित क्षेत्र से 50 मीटर के भीतर वीडियों /फोटोग्राफी पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। झरने व अन्य वॉटर बॉडी एवं ऐसे दुर्घटना संभावित क्षेत्र से 50 मीटर के भीतर स्नान करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। झरने व अन्य वॉटर बॉडी एवं ऐसे दुर्घटना भावित क्षेत्र से 50 मीटर के भीतर वाहन पार्किंग एवं वाहन उपयोग आदि पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। झरने व अन्य वॉटर बॉडी एवं ऐसे दुर्घटना संभावित क्षेत्र से 50 मीटर के भीतर दुकान लगाना, रेहड़ी लगाना एवं खाद्य पदार्थों की बिक्री करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। उपखंड बांधवगढ़ की सीमा अंतर्गत समस्त जलाशयों में संचालित अनुमति रहित, नाव, नौकाओं या अन्य जल क्रीड़ा संबंधी यंत्र पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
अनुभाग क्षेत्र बांधवगढ़ अंतर्गत आने वाले समस्त जलाशयों में अवैध रूप से बिना अनुमति के संचालित हो रहे नाव/नौकाओं तथा समस्त झरनों एवं वॉटरबॉडी के पास वर्षाकाल में जाना पूर्णतः प्रतिबंधात्मक होगा। जनहानि/धनहानि से बचाव एवं कानून और सुरक्षा व्यवस्था हेतु यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है। आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा-223 के तहत कार्यवाही की जावेगी। यह आदेश तत्काल से प्रभावशील हो गया है।