जर्जर पानी की टंकी हो सकता है बड़ा हादसा, भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं लोग, एसईसीएल प्रबंधन मौन
*समस्या हल नही तो होगा आंदोलन*
अनूपपुर/कोतमा
एक तरफ जहां सूरज की तपिश और भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है, वहीं दूसरी तरफ एसईसीएल जमुना कोतमा क्षेत्र के प्रबंधन की उदासीनता के कारण कोतमा वार्ड क्रमांक 13 के निवासी पानी के लिए हाहाकार मचा हैं। वार्ड में स्थित पानी की टंकी बेहद जर्जर हालत में पहुंच चुकी है, जिसके कारण क्षेत्र में पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह स्थिति अचानक पैदा नहीं हुई है वार्ड वासियों द्वारा कई बार सोशल मीडिया, मुख्यधारा की मीडिया और मौखिक रूप से एसईसीएल प्रबंधन को मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं, प्रबंधन को साफ तौर पर अवगत कराया गया था कि पानी की टंकी पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है और कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है, इसके बावजूद, एसईसीएल के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी
प्रबंधन की इसी लापरवाही का नतीजा आज वार्ड क्रमांक 13 के सैकड़ों परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। नई पानी टंकी का निर्माण न होने से इस कड़कती धूप और गर्मी में लोगों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, दैनिक जरूरतों के लिए भी पानी नसीब नहीं हो पा रहा है, जिससे स्थानीय जनता में एसईसीएल के प्रति भारी आक्रोश है।
"एसईसीएल सिर्फ कोयला निकालने में व्यस्त है, उसे यहां रहने वाले लोगों की मूलभूत सुविधाओं से कोई सरोकार नहीं है, बार-बार ध्यान आकर्षण कराने के बाद भी आज तक नई पानी टंकी का निर्माण नहीं कराया गया, अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
जब एसईसीएल को समय रहते जर्जर टंकी की सूचना दे दी गई थी, तो नए निर्माण में देरी क्यों की जा रही है। क्या एसईसीएल प्रबंधन किसी बड़े हादसे या जनता के पूरी तरह सड़क पर उतरने का इंतजार कर रहा है।
क्षेत्र की जनता ने अब जिला प्रशासन और एसईसीएल के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मामले को संज्ञान में लेते हुए युद्ध स्तर पर नई पानी टंकी का निर्माण कराया जाए और तब तक वार्ड में पानी के वैकल्पिक इंतजाम सुचारू रूप से किए जाएं।
