राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर बढ़ता दुर्घटना का खतरा, 5 किलोमीटर तक मोड़ों पर खड़े भारी वाहन बढ़ा रहे जोखिम
अनूपपुर/कोतमा
राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर सड़क सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि फॉरेस्ट डिपो से बस्कहली चौराहा तक कई स्थान ऐसे हैं जहां मोड़ों, चौराहों और सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। नागरिकों के अनुसार सड़क के संवेदनशील स्थलों पर पर्याप्त यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में वाहन चालकों को कई बार जोखिम भरी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
फॉरेस्ट डिपो क्षेत्र से बुढ़ानपुर चौराहा, केशवाही चौराहा, गोहंड्रा चौराहा और बस्कहली चौराहा तक लगभग 5 किलोमीटर का हिस्सा सड़क सुरक्षा की दृष्टि से विशेष माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन क्षेत्रों में लगातार भारी वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। विशेष रूप से केशवाही चौराहा क्षेत्र में पान गुमटियों, ढाबों, चाय दुकानों, गैराजों और पंचर दुकानों के आसपास बड़े वाहनों का जमाव देखा जाता है। कई बार वाहन सड़क के काफी समीप खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे यातायात प्रभावित होता है और सड़क की दृश्यता कम हो जाती है।
नागरिकों का कहना है कि चौराहों और मोड़ों के पास खड़े ट्रक, डंपर और अन्य भारी वाहन सामने से आने वाले वाहनों को देखने में बाधा उत्पन्न करते हैं। ऐसी स्थिति में कई बार वाहन चालक अंतिम क्षणों में सामने आने वाले वाहन को देख पाते हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार विशेष रूप से सुबह और शाम के समय जब यातायात का दबाव अधिक रहता है, तब यह समस्या और गंभीर रूप ले लेती है।
स्थानीय नागरिकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े संबंधित विभागों एवं प्रशासन से मांग की है कि फॉरेस्ट डिपो से बस्कहली चौराहा तक के संवेदनशील स्थलों का सड़क सुरक्षा से जुड़े इन मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर यात्रा करने वाले लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
यातायात प्रधान आरक्षक यू ट्यूबर को एसपी ने किया निलंबित, सोशल मीडिया में छिड़ी बहस, सिपाही ने दी सफाई
शहडोल
यातायात शाखा में पदस्थ प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी को पुलिस अधीक्षक शहडोल ने निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश में उल्लेख किया गया है कि आरक्षक 19 मई 2026 से लगातार ड्यूटी से अनुपस्थित थे। साथ ही अनुपस्थिति अवधि के दौरान उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर विभिन्न स्थानों के वीडियो अपलोड किए जाने को सेवा नियमों के उल्लंघन के रूप में माना गया है। आरोप है कि ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के दौरान उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो अपलोड किए गए, जिन्हें निजी प्रचार और लाभ से जोड़कर देखा गया।
कार्रवाई के बाद विवेकानंद तिवारी ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने 19 मई को ड्यूटी की थी, लेकिन अचानक तबीयत खराब होने पर चिकित्सकीय उपचार लिया। उनका दावा है कि उन्होंने मेडिकल अवकाश की जानकारी अपने यातायात प्रभारी को दे दी थी, इसके बावजूद उन्हें अनुपस्थित दर्शाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जिस अवधि के वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड हुए, उन्हें उनकी पत्नी और टीम ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से पोस्ट किया था।
बता दें कि विवेकानंद तिवारी सोशल मीडिया पर सड़क सुरक्षा और यातायात जागरूकता से जुड़े वीडियो के लिए काफी लोकप्रिय हैं। उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। निलंबन की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को लेकर बहस शुरू हो गई है। जहां कुछ लोग पुलिस विभाग की कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में उनके समर्थक इसे अनुचित बताते हुए प्रतिक्रिया दे रहे हैं। फिलहाल मामला पुलिस विभाग और सोशल मीडिया दोनों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।