पादरी निकला पेंगोलीन का शिकारी, आरोपी गिरफ्तार, हथपुरा गांव मे फैलाया था तस्करी का खेल

पादरी निकला पेंगोलीन का शिकारी, आरोपी गिरफ्तार, हथपुरा गांव मे फैलाया था तस्करी का खेल


उमरिया

जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम हथपुरा मे हुए कथित अपहरण मामले की जांच के दौरान लुप्तप्राय वन्यजीव पेंगोलीन के शिकार और तस्करी की अहम जानकारी सामने आई है। शहडोल दक्षिण वन मंडल की डीएफओ श्रद्धा पेन्द्रों ने बताया कि वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डबल्यूसीसीबी) से मिली सूचना के आधार पर जैतपुर की विभागीय टीम द्वारा कार्रवाई की थी। इस दौरान शहडोल जिले के सुशील अधिकारी के पास से पेंगोलिन की खपटे (स्केल्स) जब्त की गई थीं। पूछताछ मे सुशील ने बताया कि ये खपटे उसने ग्राम हथपुरा के पादरी लक्षपत सिंह से खरीदे हैं। आरोपी की निशानदेही पर 26 अक्टूबर की रात लगभग 11 बजे लक्षपत सिंह को गिरफ्तार किया गया और इसकी सूचना परिवार को दी गई। इसके बावजूद उसी रात लक्षपत के पुत्र जितेंद्र सिंह ने पाली थाना पहुंच कर अपने पिता के अपहरण की शिकायत दर्ज करा दी। बताया गया है कि पादरी लक्षपत सिंह ने लंबे समय से क्षेत्र मे पेंगोलीन की तस्करी का मायाजाल फैला रखा है।   

अपहरण की सूचना मिलते ही पाली पुलिस सकते मे आ गई। अमला रात भर लक्षपत की खोजबीन करता रहा। इतना ही नहीं जिले के पुलिस अधीक्षक विजय भागवानी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति की जानकारी ली। जांच के बाद लक्षपत के अपहरण की बात झूठी निकली। डीएफओ श्रद्धा पेन्द्रों ने बताया कि यह एक अंतर-जिला वन्यजीव शिकार गिरोह है। अब तक शहडोल, कटनी, उमरिया, डिंडौरी और अनूपपुर जिलों से कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके कब्जे से लगभग 1 किलो 900 ग्राम पेंगोलिन की खपटे जब्त की गई हैं। 

उन्होंने बताया कि पेंगोलिन एक दुर्लभ व विलुप्तप्राय प्राणी है और इसका संरक्षण वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध है। पेंगोलिन की खपटे निकालने के लिए इस प्रजाति को पानी में उबाल कर मारा जाता है। यह न केवल क्रूर है बल्कि कानूनन गंभीर अपराध भी है। जप्त मात्रा से अनुमान लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने कई पेंगोलिनों का शिकार किया होगा। गौरतलब है कि उमरिया जिले का हथपुरा ग्राम घुनघुटी वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आता है, जो बाघ और अन्य वन्यजीवों का प्रमुख आवास माना जाता है। इस क्षेत्र से पहले भी बाघ के शिकार की घटनायें सामने आ चुकी हैं। इलाके से पेंगोलीन के शिकारियों का खुलासा होने से वन विभाग और सूचना तंत्र की सक्रियता पर भी गंभीर सवाल खडे हो गये हैं।

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