बाबा कल्याण दास महाराज के आशीर्वाद व भक्तिभाव से संपन्न हुई दिव्य कलश यात्रा
अनूपपुर
माँ नर्मदा की पावन जन्मभूमि अमरकंटक में नवरात्रि के प्रथम दिवस पर भक्ति और आस्था से सराबोर हो उठी। पारंपरिक और बहुप्रतीक्षित विशाल कलश यात्रा ने नगर को अलौकिक आभा से भर दिया। कल्याण आश्रम से आरंभ हुई इस यात्रा में नगर की महिलाएं और कन्याएं देवी स्वरूपा बनकर कलश लेकर शामिल हुईं। नर्मदा उद्गम मंदिर से पावन जल भरकर नगर भ्रमण के लिए बढ़ती इस यात्रा ने श्रद्धा, भक्ति और शक्ति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक झांकियों, वाद्य यंत्रों और भक्तिमय गीतों ने नगर को देवभूमि जैसा स्वरूप प्रदान किया। हर गली और चौक पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया और वातावरण “जय माता दी” के जयघोष से गूंज उठा।
इस दिव्य आयोजन के केंद्र में कल्याण आश्रम के मुखिया, तपस्वी परम बाबा कल्याण दास महाराज रहे। उनका जीवन साधना, सेवा और तपस्या को समर्पित रहा है। वर्षों से नर्मदा तट पर साधना करते हुए उन्होंने समाज और संस्कृति के संरक्षण का कार्य किया है। उनके सानिध्य और आशीर्वाद से ही यात्रा अनुशासन, भक्ति और दिव्यता का अद्भुत उदाहरण बनी। वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक विधि-विधान के साथ कलश तथा देवी भागवत पुराण का पूजन-अर्चन कराया। भव्य शोभायात्रा में जनप्रतिनिधि सम्मिलित हुए। नगर के पत्रकार धनंजय तिवारी, उमाशंकर पांडे व संजय श्रीवास भी इस आयोजन के साक्षी बने।
यात्रा के सफल आयोजन हेतु नगर परिषद अमरकंटक ने मार्ग पर विशेष साफ-सफाई और जल छिड़काव कराया। सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी अमरकंटक पुलिस थाना बल ने संभाली। इस विशाल आयोजन की कमान कल्याण सेवा आश्रम के प्रबंधक ट्रस्टी हिमाद्री मुनि महाराज ने संभाली। उनके नेतृत्व और साधु-संतों के सहयोग से महिलाएं, बच्चे और नगरवासी पूरे उत्साह और उमंग के साथ इस दिव्य कलश यात्रा में सम्मिलित हुए। यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि आस्था, एकता और संस्कारों का जीवंत प्रतीक बनकर अमरकंटक के आध्यात्मिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ गई।
