जिले का निवासी यूक्रेन में MBBS कर रहा हिमांशु ने सुरक्षित निकालने की लगाई गुहार

जिले का निवासी यूक्रेन में MBBS कर रहा हिमांशु ने सुरक्षित निकालने की लगाई गुहार


अनुपपुर/कोतमा 

रूस द्वारा यूक्रेन में किए गए हमले से वहां बने विषम हालातों के कारण फ से देश के हजारों लोगों के साथ अनूपपुर जिले के कोतमा निवासी लालाराम सोनी के पुत्र हिमांशु सोनी भी शामिल है । एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन के जफ रोचिया शहर के स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की प्रथम वर्ष की पढ़ाई करने गए थे ।

*देखे वीडियो*👇🏿👇🏿👇🏿👇🏿


हिमांशु सोनी के परिवार में भाई तो है लेकिन भारत सरकार पर भरोसा भी है कि उनके बच्चे को सुरक्षित निकाल दिया जाएगा और वह बहुत जल्द अपने घर लौट आएंगे । घर परिवार नगर सहित जिले बासी भी हिमांशु के सुरक्षित घर लौट आने की आशा कर रहे हैं । माता-पिता व परिवार के लोगों की लगातार उससे बात हो रही है जो उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं वहीं जिला प्रशासन भी अब जानकारी जुटाने में जुट गया है वही थाना प्रभारी अजय बैगा ने भी 26 फरवरी को परिवार के लोगों से हिमांशु सोनी के बारे में जानकारी जुटाई । उन्होंने भी परिवार के लोगों को ढांढस बधाया और उन्होंने कहा कि भारत सरकार जल्द ही यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों एवं भारतीयों को लाने का प्रयास कर रही है।

*देखे विडियो*👇🏿👇🏿👇🏿👇🏿

वीडियो भेज दिखाया हाल 26 फरवरी को यूक्रेन के जफरोचिया शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई का यह प्रथम वर्ष है। 26 फरवरी की सुबह हिमांशु ने एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें उसने वहां की विकट स्थितियों को बताते हुए सुरक्षित निकालने की गुहार भारत सरकार से लगाई है वीडियो में हिमांशु ने बताया कि 25 फरवरी को शाम 8:00 बजे उन्हें व उनके साथियों को यूनिवर्सिटी से बंकर  में ले जाया गया था जहां से उन्हें रात्रि 2:00 बजे सुरक्षित यूनिवर्सिटी में पहुंचा दिया गया था उनके साथ मध्यप्रदेश के 8 से 10 छात्र है जो सागर इंदौर एवं उज्जैन के रहने वाले हैं हिमांशु ने बताया कि जिस यूनिवर्सिटी में वह पढ़ाई कर रहे हैं वहां भारत के लगभग 2000 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं । उसने बताया कि जैसे ही पता चला कि यूक्रेन पर अटैक हुआ है खाने पीने का सामान खरीद लिया था अभी हालात गंभीर हैं सभी लोग दहशत में हैं अटैक के बाद से डर बढ़ गया है उसने बताया कि 26 फरवरी को दोपहर में सायरन बजने की आवाज सुनी तभी यूनिवर्सिटी के सारे छात्र अपना अपना सामान लेकर बनकर की ओर जाने लगे लेकिन बाद में पता चला कि यह अटैक होने का सायरन नहीं है यह सायरन कर्फ्यू का है सब कुछ जान में जान आई । लेकिन दोपहर में दोबारा सायरन बजा और हम लोगों को यह निर्देश मिले कि आप सबको बंद करने जाना है और सब लोग हम अपना सामान लेकर फिर बनकर पहुंच गए । उसने बताया कि मोबाइल नेटवर्क भी में भी परेशानी हो रही है यूनिवर्सिटी में वाईफाई की व्यवस्था की गई है जिसके कारण परिजनों से बात हो जा रही है उन्हें डर है कि कहीं cyber-attack भी ना हो जाए एक दूसरे स्टूडेंट की मदद सब लोग मिलकर कर रहे हैं।

सभी सामानों का किया स्टाक - फंसे हुए छात्र हिमांशु सोनी ने बताया कि जहां अटैक हुआ है वहां से हमारा शहर 200 किलोमीटर की दूरी पर है स्थानीय लोग शहर छोड़कर गांव की ओर जा रहे हैं हम लोग भी ट्रेवल नहीं कर पा रहे हैं सभी वाहन बंद हैं कभी भी बुक नहीं हो रहा है कार्ड से पेमेंट भी नहीं हो रहा है हम जैसे ही हमले की जानकारी लगी हम लोगों ने खाने के सामानों के साथ ही अन्य सामग्रियां तथा 1 सप्ताह के लिए पानी का भी स्टाक भी कर लिए हैं सरकार अगर पहले ही मदद करती तो 15से20 दिन पहले ही हम लोग वापस अपने घर आ सकते थे विश्व युद्ध की सेक्सी एशियन थी तो हमें पहले निकालना था हमारी टीम भी इसे पॉलीटिकल स्टंट मानती रही मीडिया कब से न्यूज़ दिख रहा है कि युद्ध के हालात हैं लेकिन हमारी एसएमबी पॉलीटिकल स्टंट मानती रही अब जब अटैक हो गया है सब फस गए तब रिस्क की बात की जा रही है आज जब मौत की स्थिति आ गई तब निकालने की बात की जा रही है । हिमांशु सोनी ने बताया कि यूनिवर्सिटी के द्वारा यह कहा जा रहा है कि दो से 3 दिन के अंदर रोमानिया पोलैंड हंगरी के रास्ते भारत भेजने की व्यवस्था की जा रही है हिमांशु सोनी ने बताया कि 26 फरवरी को शाम तक 300 भारतीय छात्रों को निकालने की बात कही जा रही है जिसमें सभी बच्चियां शामिल है।

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