श्रावण के प्रथम दिवस पर शिवमय हुआ अमरकंटक, "बोल बम" के जयघोष से गूंज उठी तपोभूमि


अनूपपुर

पावन श्रावण मास के प्रथम दिवस से ही विश्व प्रसिद्ध तीर्थ एवं तपोभूमि अमरकंटक भगवान भोलेनाथ की भक्ति में सराबोर हो उठा है। मां नर्मदा की पावन नगरी इन दिनों "बोल बम", "हर-हर महादेव" और "जय भोले" के जयघोष से गुंजायमान है। केसरिया वस्त्र धारण किए हजारों शिवभक्त मां नर्मदा के उद्गम स्थल पर पहुंचकर पवित्र जल अपने कांवड़ में भर रहे हैं और विभिन्न शिवधामों की ओर अपनी कठिन पदयात्रा प्रारंभ कर रहे हैं। संपूर्ण अमरकंटक क्षेत्र श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति के दिव्य रंग में रंगा दिखाई दे रहा है।

श्रावण मास के साथ ही छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कांवड़िये अमरकंटक पहुंच रहे हैं। यहां से मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर वे लगभग 200 किलोमीटर दूर स्थित विख्यात भोरमदेव महादेव में जलाभिषेक करने के लिए पैदल यात्रा कर रहे हैं। वहीं बिलासपुर एवं आसपास के श्रद्धालु मां नर्मदा का जल लेकर रतनपुर स्थित भगवान शिव का अभिषेक करने निकल रहे हैं, जबकि शहडोल अंचल के कांवड़िये अमोलेश्वर धाम पहुंचते हैं तथा भगवान्  भोलेनाथ को जलाभिषेक कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं।

अमरकंटक पहुंचने वाले श्रद्धालु सर्वप्रथम मां नर्मदा उद्गम मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसके बाद वे मां नर्मदा के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य एवं मंगलमय जीवन का संकल्प लेते हैं। श्रद्धालु अमरेश्वर महादेव तथा जालेश्वर महादेव सहित अन्य प्राचीन शिवालयों में दर्शन-पूजन कर अपनी यात्रा का शुभारंभ करते हैं। मंदिरों में गूंजते वैदिक मंत्र, घंटियों की मधुर ध्वनि झांझ, मजीरा और ढोलक - मांदल की थाप और शिवभक्तों के जयघोष से संपूर्ण वातावरण शिवमय हो उठ रहा है।

शासकीय स्कूल की छत का गिरा प्लास्टर, तीन छात्र हुए घायल, जर्जर स्कूल में पढ़ने को मजबूर बच्चे


उमरिया

जिला मुख्यालय के अंतिम छोर में पड़ने वाले गांव अखराड़ के सरकारी स्कूल में एक घटना देखने को मिली। यहां एक क्लास की छत के प्लास्टर का बड़ा हिस्सा छात्रों के ऊपर गिर गया। इसकी वजह से दो से तीन छात्र घायल हो गए।

इस मामले में हैरान कर देने वाली बात यह है कि शासकीय विद्यालय में इतनी बड़ी घटना हो गई लेकिन इसकी खबर किसी को नहीं लगी। जिला शिक्षा अधिकारी ने भी इस घटना से अनजान होने की बात कही है। जो छात्र घायल हुए हैं। उसमें से एक की हालत गंभीर है क्योंकि उसके सिर और कंधे सहित शरीर के कई हिस्से में फैक्चर हुआ है।

हादसे में जो छात्र घायल हो गए हैं। उनके मुताबिक बाथरूम से लौटते वक्त अचानक छत का प्लास्टर ऊपर से गिर गया। मामले की सूचना लगने पर परिजन मौके पर पहुंचे तो प्राचार्य ने इलाज की जिम्मेदारी लेकर सबको शांत कर दिया। स्कूल प्राचार्य ने घायल छात्रों का चुपचाप इलाज करा कर अफसर को इस बात की खबर नहीं लगने दी। यही वजह रही कि इस बारे में किसी को भी जानकारी नहीं लगी।

स्कूल के जिस कक्षा में यह घटना हुई है वहां पर अभी भी मलबे के रूप में बड़े-बड़े पत्थर पड़े हुए हैं। लगभग 5 फीट से ज्यादा का प्लास्टर टूटा है। हादसे के बाद क्लास को दूसरे कमरे में शिफ्ट कर दिया गया है। प्राचार्य ने बताया है कि एक छात्र ज्यादा घायल हुआ है उसके एक्सरे भी कराए हैं। मैंने उन्हें छात्र का इलाज अपने स्तर पर ठीक तरह से कराने के लिए निर्देशित किया है।

पानी बिजली की समस्या को लेकर, छात्रावास की छात्राएं सड़को पर उतरी, प्रशासन के आश्वासन के बाद हुई वापस


शहडोल

बिजली, पानी और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर जिले के बुढ़ार विकासखंड स्थित माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर की दर्जनों आदिवासी छात्राएं सड़क पर उतर आईं। छात्राओं ने कलेक्टर से सीधे अपनी बात कहने के लिए करीब 30 किलोमीटर पैदल जिला मुख्यालय जाने का फैसला कर लिया। हालांकि प्रशासन ने बीच रास्ते में पहुंचकर उन्हें समझाइश दी और समस्याओं के समाधान का आश्वासन देकर वापस छात्रावास भेज दिया, लेकिन इस घटना ने व्यवस्था और छात्रावासों की सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्राम कटकोना स्थित माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर का है। जहां संस्था तो है लेकिन मूलभूत सुविधाएं न के बराबर हैं। इन्ही मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर एकजुट होकर छात्रावास से बाहर निकल आईं और छात्राएं पैदल ही कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हो गईं। छात्राओं का कहना था कि जब बार-बार शिकायतों के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो अब वे सीधे कलेक्टर के सामने अपनी बात रखेंगी।

इसकी सूचना प्रशासन को जैसे ही मिली जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त आनंद राय सिन्हा सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने छात्राओं से चर्चा की, इस दौरान उन्होंने छात्राओं की समस्याएं सुनीं और जल्द समाधान का भरोसा दिलाया इसके बाद छात्राएं वापस परिसर लौट गईं। 

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