जिस आरोप पर गई सरपंची, उसी मामले पर कमिश्नर ने सचिव को किया दोष मुक्त, जिला पंचायत की दोहरी कार्रवाई कटघरे में
जिस आरोप पर गई सरपंची, उसी मामले पर कमिश्नर ने सचिव को किया दोष मुक्त, जिला पंचायत की दोहरी कार्रवाई कटघरे में
*पूर्व सरपंच को न्याय की जगी आस*
उमरिया
जिले की पाली जनपद पंचायत की आदिवासी ग्राम पंचायत गिजरी में अमृत सरोवर निर्माण में विलंबित भुगतान को लेकर जिला पंचायत की पूरी प्रक्रिया अब कठघरे में है। आयुक्त शहडोल के फैसले ने जिला पंचायत की कार्रवाई की मंशा पर ही सवाल* खड़े कर दिए हैं।
बताया जाता है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत उमरिया ने अमृत सरोवर में भुगतान न करने के मामले में पहले सचिव सुरेन्द्र शुक्ला को निलंबित किया। फिर इतने में भी काम नहीं बना तो सरपंच नन्हू सिंह को भी बलि का बकरा बना दिया। सचिव-सरपंच पर समान रूप से भुगतान न करने के आरोप थे।
जिला पंचायत उमरिया की इस कार्रवाई से असंतुष्ट सचिव ने आयुक्त शहडोल में अपील कर न्याय की फरियाद लगाई। जिस पर विचारण करते हुए आयुक्त ने जांच प्रतिवेदन और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर पाया कि जिला पंचायत की कार्यवाही विधि संगत नहीं है और सचिव को दोषमुक्त कर निलंबन से बहाल कर दिया।
आयुक्त ने अपने पारित फैसले में पाया कि किसी भी शासकीय निर्माण कार्य के भुगतान के लिये तय मापदंड में उपयंत्री द्वारा कार्य का मूल्यांकन के पश्चात ही भुगतान किये जाने का प्रावधान है। जब संबंधित उपयंत्री ने मूल्यांकन ही नहीं किया तो भुगतान की कार्यवाही नहीं हो सकी।
आयुक्त ने जनपद पंचायत पाली के खण्ड पंचायत अधिकारी के जांच प्रतिवेदन का आधार लेते हुए कहा कि समय पर उपयंत्री द्वारा कार्य का मूल्यांकन नहीं करने के लिए सचिव-सरपंच को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
जांच प्रतिवेदन में यह बात सामने आई कि सचिव ने उपयंत्री से मूल्यांकन की मांग करने के बाद भी उपयंत्री ने मूल्यांकन क्यों नहीं किया। साथ ही जिला पंचायत में शिकायत के बाद भी मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मामले में संज्ञान लेते हुए उपयंत्री पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। उसी समय ग्राम पंचायत गिजरी के सरपंच नन्दू सिंह को पद से मुक्त कर दिया गया था, आयुक्त शहडोल के न्यायालय में फरियाद लगाकर जिला पंचायत उमरिया के आदेश को रद्द करने की मांग की है


