दो दिवसीय आयोजित दंगल का हुआ समापन, देश-विदेश के पहलवानों ने आजमाया दांव पेंच, रहा रोमांचक मुकाबला


अनूपपुर

जिले के कोयलांचल क्षेत्र नगर पालिका पसान के जमुना कालरी के मेन दुर्गा पंडाल में आयोजित दो दिवसीय भव्य दंगल (कुश्ती) प्रतियोगिता का शनिवार को भव्य समापन हुआ। दो दिनों तक चले इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों एवं पड़ोसी देश नेपाल से आए पहलवानों ने अपने दमदार दांव-पेंच और शानदार खेल कौशल का प्रदर्शन कर हजारों दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। प्रतियोगिता का सबसे बड़ा आकर्षण महिला पहलवानों का शानदार प्रदर्शन रहा। दूसरे दिन भी महिला पहलवानों ने पुरुष पहलवानों को रोमांचक मुकाबलों में पराजित कर अपनी प्रतिभा और ताकत का लोहा मनवाया।

इस प्रतिष्ठित दंगल प्रतियोगिता में राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली तथा नेपाल से आए 7 महिला और 18 पुरुष, कुल 25 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवानों ने भाग लिया। प्रत्येक मुकाबले में पहलवानों ने बेहतरीन तकनीक, फुर्ती और दमखम का परिचय दिया। कई मुकाबले इतने रोमांचक रहे कि अंतिम क्षण तक जीत-हार का फैसला नहीं हो पाया और निर्णायक दांव लगते ही पूरा अखाड़ा तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

प्रतियोगिता को देखने के लिए अनूपपुर जिले के आसपास के क्षेत्रों से हजारों खेल प्रेमी पहुंचे। महिलाओं, युवाओं और बच्चों की भारी भीड़ ने पूरे उत्साह के साथ मुकाबलों का आनंद लिया। आयोजन स्थल पर पूरे समय मेले जैसा माहौल बना रहा।

दो दिवसीय इस भव्य दंगल ने खेल प्रेमियों के दिलों में अपनी अलग छाप छोड़ी। विशेष रूप से महिला पहलवानों के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि आज वे किसी भी चुनौती का सामना करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

30 साल बाद साल वनों पर फिर साल बोरर का संकट, 22 हजार पेड़ प्रभावित, देहरादून का वैज्ञानिक दल करेगा जांच

*वर्ष 1995-96 में साल बोरर का आया था बड़ा प्रकोप*


अनूपपुर

मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक के साल वनों पर लगभग तीन दशक बाद एक बार फिर साल बोरर (हार्टवुड बोरर) का प्रकोप बढ़ने लगा है। अमरकंटक वन परिक्षेत्र में वर्ष 2026-27 के सर्वे में साल के वृक्षों में कीट का संक्रमण सामने आया है। वन विभाग के अनुसार 8,584 हेक्टेयर वन क्षेत्र के 18 कक्षों में लगभग 40 लाख साल के वृक्ष हैं, जिनमें करीब  लगभग 22 हजार वृक्ष साल बोरर से प्रभावित पाए गए हैं जिसमें अभी तक 15000 से अधिक संख्या में कीट पकड़े जा चुके है । 

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अमरकंटक क्षेत्र में इससे पहले वर्ष 1995-96 के दौरान साल बोरर का बड़ा प्रकोप सामने आया था। शुरुआती स्तर पर संक्रमण पर नियंत्रण नहीं होने के कारण उस समय बड़ी संख्या में साल के वृक्ष संक्रमित हुए थे और प्रभावित पेड़ों को काटकर जंगल से हटाना पड़ा था। वर्तमान में संक्रमण स्थानीय स्तर पर है और विभाग इसे नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चला रहा है।

साल बोरर की इल्ली पेड़ की छाल को भेदकर तने के भीतर प्रवेश करती है और सैपवुड व हार्टवुड को नुकसान पहुंचाते हुए सुरंगें बनाती है। इससे पेड़ धीरे-धीरे कमजोर होकर सूखने लगता है। मानसून के दौरान वयस्क कीट बाहर निकलकर अन्य स्वस्थ वृक्षों को संक्रमित करते हैं, जिससे इस मौसम में संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है।

वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष "ट्रैप ट्री ऑपरेशन" शुरू किया है। इसके तहत रस छोड़ रहे संक्रमित वृक्षों को छह से सात टुकड़ों में काटकर जंगल में ही रखा जाता है। इनसे निकलने वाली गंध से आकर्षित होकर साल बोरर कीट बड़ी संख्या में उन पर एकत्र हो जाते हैं। इसके बाद शाम से सुबह तक वनकर्मी और स्थानीय ग्रामीण इन कीटों को एकत्र कर संग्रहण केंद्र में जमा करते हैं। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका नष्टीकरण किया जाता है।

भारतीय वानिकी अनुसंधान संस्थान देहरादून से वैज्ञानिकों का दल अमरकंटक पहुंचकर प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन करेगा। विशेषज्ञ कीट के व्यवहार, संक्रमण के कारणों तथा प्रभावी नियंत्रण के उपायों पर वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे, जिससे भविष्य में इसके स्थायी प्रबंधन की रणनीति तैयार की जा सके।

छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाली कबीर चबूतरा मार्ग जर्जर, माधव सरोवर पुल भी बना हादसे का कारण, मरम्मत की उठी मांग


अनूपपुर

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाले अमरकंटक–कबीर चबूतरा मार्ग की बदहाल स्थिति यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। लगातार हो रही बारिश के बीच सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण वाहनों का आवागमन जोखिम भरा हो गया है। प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले पर्यटक, श्रद्धालु और स्थानीय नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

लंबे समय से मरम्मत की बाट जोह रही है। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका बनी रहती है। यह मार्ग दो राज्यों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग होने के बावजूद इसकी दुर्दशा पर संबंधित विभाग का पर्याप्त ध्यान नहीं है।

अफरोज रोड से बांधा पुल तक सड़क की चौड़ाई भी काफी कम है। सड़क सिंगल लेन होने के कारण आमने-सामने से आने वाले दो बड़े वाहनों की क्रॉसिंग के दौरान जाम और दुर्घटना की स्थिति बन जाती है। सड़क किनारे पर्याप्त पिचिंग और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से बरसात के मौसम में खतरा और बढ़ गया है।

इसी मार्ग पर नर्मदा नदी के बांधा क्षेत्र स्थित माधव सरोवर पुल की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। पुल के दोनों ओर लगी लोहे की रेलिंग क्षतिग्रस्त होकर नदी की ओर झुक गई है और कई स्थानों पर अस्थिर दिखाई दे रही है। वहीं पुल की कंक्रीट सतह टूट चुकी है तथा नीचे की मिट्टी वर्षा के कारण कटाव होने से खोखली हो गई है। ऐसे में भारी वाहनों के गुजरने पर पुल की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगो की मांग है की प्रसाशन ध्यान दे नही तो कभी भी कोई बड़ी घटना घट सकतीं हैं।

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