रोका गया था निर्माण, फिर शुरू हुआ कार्य, नगर परिषद कार्यालय निर्माण में नियमों की उड़ा रहे हैं धज्जियां

*800 नागरिकों सहित कई पार्षदों ने निर्माण को लेकर की थी शिकायत*


अनूपपुर

नगर परिषद बनगवा-राजनगर में निर्माणाधीन नगर परिषद कार्यालय भवन एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। आरोप है कि शासन के स्पष्ट नियमों और जनता की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए बिना स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन के निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया है। इस पूरे मामले ने नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, इस भवन निर्माण को लेकर पूर्व में स्थानीय पार्षदों एवं नगरवासियों द्वारा विधिवत शिकायतें की गई थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि भवन निर्माण कार्य बिना आवश्यक तकनीकी स्वीकृतियों और ड्राइंग-डिजाइन के शुरू किया जा रहा है। मामला भोपाल तक पहुंचने के बाद विभागीय स्तर पर संज्ञान लिया गया था तथा संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब भी किया गया था। इसके बाद कुछ समय के लिए निर्माण कार्य रोक दिया गया था।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि जैसे ही प्रशासनिक परिस्थितियां बदलीं, नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों और उपयंत्री द्वारा बिना किसी सार्वजनिक जानकारी एवं बिना ड्राइंग-डिजाइन की अंतिम स्वीकृति प्राप्त किए निर्माण कार्य पुनः शुरू करा दिया गया। जबकि नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन के बिना किसी भी शासकीय भवन का निर्माण प्रारंभ नहीं किया जा सकता।



स्थानीय लोगों का कहना है कि इस भवन के निर्माण स्थल को लेकर भी व्यापक विरोध दर्ज कराया गया था। नगर के लगभग 800 नागरिकों एवं कई पार्षदों ने लिखित रूप से मांग की थी कि भवन का निर्माण किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर कराया जाए, लेकिन जनता की इस मांग को पूरी तरह नजर अंदाज कर दिया गया। आरोप है कि जनता की आवाज को दबाकर और शिकायतों को ठंडे बस्ते में डालकर निर्माण कार्य को जल्दबाजी में आगे बढ़ाया जा रहा है।

नगरवासियों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में लोगों द्वारा की गई शिकायतों, पार्षदों के विरोध और विभागीय नोटिसों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ संदेश होगा कि जनता की आवाज का कोई महत्व नहीं रह गया है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर वे भी मूकदर्शक बनकर नियमों की खुलेआम हो रही अनदेखी को देखते रहेंगे।

समाचार 01 फ़ोटो 01

रोका गया था निर्माण, फिर शुरू हुआ कार्य, नगर परिषद कार्यालय निर्माण में नियमों की उड़ा रहे हैं धज्जियां

*800 नागरिकों सहित कई पार्षदों ने निर्माण को लेकर की थी शिकायत*

अनूपपुर

नगर परिषद बनगवा-राजनगर में निर्माणाधीन नगर परिषद कार्यालय भवन एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। आरोप है कि शासन के स्पष्ट नियमों और जनता की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए बिना स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन के निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया है। इस पूरे मामले ने नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, इस भवन निर्माण को लेकर पूर्व में स्थानीय पार्षदों एवं नगरवासियों द्वारा विधिवत शिकायतें की गई थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि भवन निर्माण कार्य बिना आवश्यक तकनीकी स्वीकृतियों और ड्राइंग-डिजाइन के शुरू किया जा रहा है। मामला भोपाल तक पहुंचने के बाद विभागीय स्तर पर संज्ञान लिया गया था तथा संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब भी किया गया था। इसके बाद कुछ समय के लिए निर्माण कार्य रोक दिया गया था।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि जैसे ही प्रशासनिक परिस्थितियां बदलीं, नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों और उपयंत्री द्वारा बिना किसी सार्वजनिक जानकारी एवं बिना ड्राइंग-डिजाइन की अंतिम स्वीकृति प्राप्त किए निर्माण कार्य पुनः शुरू करा दिया गया। जबकि नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन के बिना किसी भी शासकीय भवन का निर्माण प्रारंभ नहीं किया जा सकता।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस भवन के निर्माण स्थल को लेकर भी व्यापक विरोध दर्ज कराया गया था। नगर के लगभग 800 नागरिकों एवं कई पार्षदों ने लिखित रूप से मांग की थी कि भवन का निर्माण किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर कराया जाए, लेकिन जनता की इस मांग को पूरी तरह नजर अंदाज कर दिया गया। आरोप है कि जनता की आवाज को दबाकर और शिकायतों को ठंडे बस्ते में डालकर निर्माण कार्य को जल्दबाजी में आगे बढ़ाया जा रहा है।

नगरवासियों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में लोगों द्वारा की गई शिकायतों, पार्षदों के विरोध और विभागीय नोटिसों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ संदेश होगा कि जनता की आवाज का कोई महत्व नहीं रह गया है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर वे भी मूकदर्शक बनकर नियमों की खुलेआम हो रही अनदेखी को देखते रहेंगे।

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श्मशान घाट में युवक को बुलाकर डॉक्टर ने किया अशोभनीय हरकत, सिविल सर्जन के खिलाफ कलेक्टर से हुई शिकायत

*संवेदनशील अंगों को छूने व दबाव बनाने का लगाया आरोप*

उमरिया

जिला अस्पताल उमरिया के सिविल सर्जन डॉ. के.सी. सोनी पर एक युवक ने गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में अशोभनीय हरकत, अनुचित शारीरिक संपर्क का प्रयास तथा बाद में झूठे आरोप लगाकर दबाव बनाने की बात कही गई है। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे सहित पूरे जिले में चर्चा का माहौल है।

जेल बिल्डिंग के पीछे निवासी 20 वर्षीय अरमान सोनी ने अपने आवेदन में बताया है कि 7 जून  की रात करीब 10:30 से 11 बजे के बीच सिविल सर्जन डॉ. के.सी. सोनी ने उसे सिगरेट पीने के बहाने कब्रिस्तान क्षेत्र में बुलाया। युवक का आरोप है कि वहां पहुंचने पर संबंधित अधिकारी ने उसके साथ अशोभनीय व्यवहार किया और शरीर के संवेदनशील अंगों को अनुचित तरीके से छूने का प्रयास किया। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बाद में बीयर पीने और “एन्जॉय” करने जैसी बातें कही गईं, जिससे उसे उनकी मंशा पर संदेह हुआ।

शिकायतकर्ता के अनुसार जब दोबारा अनुचित शारीरिक संपर्क का प्रयास किया गया तो उसने तत्काल अपने भाई एवं अन्य परिजनों को फोन कर मौके पर बुलाया। युवक का दावा है कि परिजनों के पहुंचने के बाद संबंधित अधिकारी ने अपनी गलती स्वीकार की। इसके बाद सभी लोग शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचे।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि अपने बचाव में संबंधित अधिकारी ने उस पर और उसके साथियों पर मारपीट तथा पैसे लूटने जैसे आरोप लगाना शुरू कर दिया। युवक का कहना है कि ऐसा वास्तविक घटना से ध्यान हटाने और उन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से किया गया। अरमान सोनी ने सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने यह भी आशंका जताई है कि प्रभावशाली पद पर बैठे व्यक्ति के कारण निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।

फिलहाल आवेदन कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच चुका है। शिकायत में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, लेकिन इनकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। 

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तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई, घटना स्थल पर युवक की हुई मौत, पुलिस जांच में जुटी

शहडोल

जिले के सीधी थाना क्षेत्र के ओदारी नदी नर्सरी के पास एक युवक की जान उस समय चली गई, जब उसकी बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे पेड़ से जा भिड़ी। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। मृतक की पहचान भजन सिंह (35 वर्ष) निवासी तेंदुडोल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि भजन सिंह अपनी बाइक से कूदरी से सीधी की ओर जा रहा था। इसी दौरान ओदारी नदी नर्सरी के पास उसकी बाइक अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे खड़े पेड़ से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

पुलिस शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई शुरू की। आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ कर दुर्घटना के कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है। प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार बताई जा रही है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।

इस हादसे के बाद मृतक के परिवार में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। क्षेत्र के लोगों ने भी घटना पर दुख व्यक्त किया है। लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को लेकर लोगों ने वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन करने और सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की अपील की है। पुलिस ने भी लोगों से तेज रफ्तार से वाहन न चलाने और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी है।

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मध्य प्रदेश शिक्षक संघ की संभागीय बैठक संपन्न, मंडल संरचना का गठन शत् प्रतिशत करने पर धन्यवाद प्रस्ताव पास

उमरिया

मध्य प्रदेश शिक्षक संघ संभाग शहडोल की विशिष्ट संभागीय बैठक जिला उमरिया के नेशनल पार्क बांधवगढ़ में टाइगर इन रिजॉर्ट में आयोजित किया गया। मध्य प्रदेश प्रांताध्यक्ष छत्रबीर सिंह राठौड़ एवं प्रांतीय महामंत्री राकेश गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक का संचालन प्रांतीय सचिव महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने किया। बैठक में सर्वप्रथम प्रांत अध्यक्ष छत्रवीर सिंह राठौड़ एवं प्रांतीय महामंत्री राकेश गुप्ता ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष द्वीप प्रज्वलित कर तथा माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

संभागीय बैठक में तीनों जिलों क्रमशः शहडोल अनूपपुर उमरिया के 48 अपेक्षित पदाधिकारी सहित अन्य उपस्थित प्रतिभागियों को अंग वस्त्र देकर सभी का स्वागत किया। द्वितीय सत्र में प्रांतीय प्रकोष्ठ प्रमुख अनिल कुमार सिंह ने शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं विशेषतया जनजाति कार्य विभाग से संबंधित समस्याओं पर प्रांत अध्यक्ष एवं प्रांतीय महामंत्री को अवगत कराया तथा संभाग की ओर से दिए गए पांच बिंदुओं पर ज्ञापन सौंपा गया। 

हमारे प्रयास से ही मध्य प्रदेश शासन ने इस संबंध में उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की। आज पुनर्विचार याचिका का फैसला आ चुका है। उच्चतम न्यायालय ने हमारी मंशा अनुसार ही परीक्षा पास करने की समय सीमा में एक वर्ष की वृद्धि की है। यह थोड़ी राहत हो सकती है किंतु प्रदेश ही नहीं पूरे राष्ट्र के लगभग 25 लाख शिक्षक इस परीक्षा से अन्यथा प्रभावित हो रहे हैं । आगामी मानसून सत्र में शिक्षकों को आदेश के भूत लक्षी प्रभाव से मुक्त कर, परीक्षा की बाध्यता को खत्म करने के लिए नियम बनाने अध्यादेश लाने पर लगातार प्रयासरत है। शिक्षा विभाग के शिक्षकों को चतुर्थ क्रमोन्नति वेतनमान मिल चुका है किंतु जनजाति कार्य विभाग में अभी तक आदेश जारी नहीं होने से शिक्षक लाभ से वंचित है 

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कन्या शिक्षा परिसर में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच शुरू, संभागीय उपायुक्त ने बनाया जांच दल 

उमरिया

जिले के पाली विकास खंड के शबरी माता कन्या शिक्षा परिसर में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के लिए बनायी गयी जांच समिति विद्यालय पहुँच कर दस्तावेजों को खंगालने का काम शुरू कर दिया है। बताया जाता है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक ने पिछले 16 मई को संभागीय उपायुक्त को आवेदन पत्र देकर माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर पाली के तत्कालीन प्राचार्य पर छात्रवृत्ति घोटाले का सनसनीखेज आरोप लगाते हुए, उन्हें खंड शिक्षा अधिकारी के पद से हटाते हुए कन्या शिक्षा परिसर की जांच कराने की मांग की गयी थी, जिस पर संभागीय उपायुक्त ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राचार्य के विरूद्ध जांच कमेटी बना कर जांच कराने के निर्देश जारी किये गए हैं। विदित होवे की संभागीय उपायुक्त के व्दारा बनायी गयी जांच समिति में जगदीश प्रसाद नापित सहायक संचालक, अनुराग श्रीवास्तव क्षेत्र संयोजक, और संजय कुमार अवस्थी सहायक ग्रेड 02 लेखाधिकारी की जांच समिति का गठन कर दस दिनों के अंदर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किये गए हैं, जिसके तारतम्य में आज जांच समिति कन्या शिक्षा परिसर पाली पहुच कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। बताया जाता है कि माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर में अध्ययन रत छात्राओं के बैंक खाते में आयी छात्रवृत्ति की राशि का आहरण कराकर तत्कालीन प्राचार्य ने अपने कब्जे में ले लिया था, जिससे छात्राओं में व्यापक आक्रोश व्याप्त था, जिसके लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आवाज उठायी थी, परिणामस्वरूप संभागीय उपायुक्त शहडोल ने जांच दल गठित कर मामले में जांच के आदेश जारी किये गए हैं।

गौर तलब है कि पाली विकास खंड में गत एक वर्ष के अंतराल में तीन आर्थिक घोटाले हुये जिनमें व्यापक स्तर पर जांच हुई, जिनकी गूंज जिला से लेकर राजधानी तक हुई, लेकिन अब तक दो मामले में जिला प्रशासन ने ऐसा क्लीन चिट दे दिया जैसे कुछ हुआ ही नहीं है, जबकि लाखों, करोड़ों का वारा न्यारा हुआ और सभी दोषी आज भी मलाई दार पदो पर आसीन होकर अपना राज कायम किये हुए हैं, इस मामले में भी इसी तरह घोटाले बाजों को अभय दान देकर दोष मुक्त कर दे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा।

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भारतीय शक्ति चेतना पार्टी ने धूमधाम से मनाया स्थापना दिवस, नशा मुक्ति रैली निकालकर लोगों दिया संदेश

अनूपपुर

भारतीय शक्ति चेतना पार्टी अनूपपुर जिले पुष्पराजगढ़ ब्लॉक मे हजारों की जनसंख्या में विशाल नशा मुक्ति रैली निकालकर बड़े धूमधाम से स्थापना दिवस मनाया गया। स्थापना दिवस  के शुभ अवसर पर उपस्थित, केंद्रीय उप संगठन मंत्री कृष्ण मणि मिश्रा ने नशा मुक्ति रैली में शामिल होकर नशा मुक्ति का संदेश दिए, वही भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के कार्यालय प्रांगण पर आम सभा को संबोधित करते हुए कहा कि स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर राष्ट्र के रूप में देश भर के सभी सम्मानित मतदाताओं, समर्थकों और हमारे कर्मठ कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ। इस पार्टी के संस्थापक योगीराज शक्तिपुत्र महाराज के द्वारा स्थापना किया गया था।

आज का दिन केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि हमारे उस संकल्प को दोहराने का दिन है, जिसके लिए इस पार्टी की नींव रखी गई थी। हमारा ध्येय स्पष्ट है की राजनीति को भय, भूख भ्रष्टाचार, जातिवाद और सांप्रदायिकता से मुक्त कर एक नशामुक्त, मांसाहारमुक्त और चरित्रवान समाज का निर्माण करना।

हमारे लाखों निस्वार्थ कार्यकर्ता जो 'सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय' की भावना के साथ रात-दिन समाज के नैतिक नव-निर्माण में लगे हैं, उनकी मेहनत और समर्पण को मेरा नमन है। आपके इसी विश्वास और साथ से हम एक स्वस्थ, स्वच्छ और सशक्त भारत का सपना साकार करेंगे।

आइए इस स्थापना दिवस पर हम सब मिलकर एक बार फिर सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने का संकल्प लें। वही आम सभा के अंतिम संबोधन में पार्टी के जिला अध्यक्ष रामकिशोर सिंह राणा ने आए हुए समस्त पार्टी के कार्यकर्ता पदाधिकारी भाई-बहन जनता जनार्दन को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई देते हुए आभार व्यक्त किया कि, आज आपने जो हजारों की जनसंख्या में इस कड़कती धूप में अपना अमूल्य समय दिया राष्ट्र निर्माण निश्चित ही बहुत ही सराहनीय है।

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ज्येष्ठ अधिमास में मां नर्मदा के दर्शन-पूजन हेतु उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़, लगा रहे हैं आस्था की डुबकी

अनूपपुर

धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल अमरकंटक में ज्येष्ठ अधिमास के पावन अवसर पर पतित पावनी पुण्य सलिला मां नर्मदा के दर्शन, पूजन एवं पवित्र स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। विगत एक सप्ताह से देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले भक्तजन बड़ी संख्या में अमरकंटक पहुंच रहे हैं।

प्रातःकाल से ही नर्मदा नदी के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। भक्तजन मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाकर स्नान, ध्यान एवं पूजा-अर्चना कर रहे हैं। स्नान के उपरांत श्रद्धालु नर्मदा मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए लंबी कतारों में खड़े होकर मां नर्मदा का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

अधिमास के कारण संपूर्ण अमरकंटक क्षेत्र में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। नगर के विभिन्न आश्रमों एवं धार्मिक स्थलों पर कथा, प्रवचन एवं अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु इन आयोजनों में भाग लेकर धर्म लाभ अर्जित कर रहे हैं।

वर्तमान में शांति कुटी आश्रम, मृत्युंजय आश्रम, गुरु नानक गुरुद्वारा, धारकुंडी आश्रम, आरंडी संगम तथा बब्बा की बाड़ी सहित अनेक स्थानों पर श्रीमद्भागवत महापुराण, शिव महापुराण एवं नर्मदा महापुराण की कथाओं का आयोजन चल रहा है। इन धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा श्रवण कर रहे हैं तथा अधिमास के पुण्य काल का लाभ उठा रहे हैं। अमरकंटक में इन दिनों श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है और पूरा क्षेत्र भक्ति एवं श्रद्धा के रंग में रंगा हुआ दिखाई दे रहा है।

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करोड़ो के अस्पताल नही होता इलाज, एम्बुलेंस बनी शोपीस, वार्ड बॉय सम्भाल रहे हैं अस्पताल

शहडोल

जिले के जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की हकीकत सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल रही है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी चमचमाती अस्पताल बिल्डिंग तो खड़ी है, लेकिन यहां मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टर नदारद हैं। हालात ऐसे हैं कि खासकर रविवार को बीमार पड़ना किसी मुसीबत से कम नहीं, क्योंकि अस्पताल में मरीजों का इलाज डॉक्टर नहीं बल्कि वार्ड बॉय और आउटसोर्स कर्मचारी करते नजर आते हैं।

अस्पताल में दो-दो 108 एंबुलेंस खड़ी होने के बावजूद मरीजों को उनका लाभ नहीं मिल पा रहा। इसके पीछे की वजह एंबुलेंस में डीजल नहीं होना था। ताजा मामला गाड़ाघाट लांघा निवासी आनंद यादव का है, जहां सड़क हादसे में घायल लोगों को इलाज के लिए जैतपुर अस्पताल लाया गया। लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने पर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। 

परिजन एंबुलेंस की उम्मीद लगाए बैठे रहे, मगर डीजल नहीं होने का हवाला देकर वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। आखिरकार घायल को प्राइवेट वाहन से जिला मुख्यालय ले जाना पड़ा। अस्पताल में रोजाना करीब 60 मरीजों की ओपीडी होती है। तीन डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है, लेकिन आरोप है कि डॉक्टर अस्पताल पहुंचते ही नहीं। ऐसे में इलाज की जिम्मेदारी वार्ड बॉय और आउटसोर्स कर्मचारियों पर आ जाती है।

हिंदुस्तान पॉवर प्लांट के खिलाफ, ड्यूटी छोड़ रेलवे कर्मचारी करता रहा अनिश्चितकालीन धरना, प्रदर्शन 

*नियम विरुद्ध आंदोलनकारियों के साथ मंच पर बैठकर देता रहा समर्थन*


अनूपपुर

जिले के जैतहरी स्थित हिंदुस्तान पॉवर प्लांट (मोजर वेयर) के खिलाफ  स्थानीय ट्रांसपोर्टरों, जनप्रतिनिधियों, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं एवं आम नागरिकों द्वारा अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया गया। यह आंदोलन प्लांट प्रबंधन के कथित मनमाने रवैये और ट्रांसपोर्टरों के साथ हो रहे अन्याय के विरोध में आयोजित किया गया था। आंदोलन में शामिल सैकड़ों लोगों ने प्लांट से निकलने वाली राखड़ से भरी गाड़ियों को गेट से बाहर निकलते ही सड़क पर रोक दिया, जिससे क्षेत्र में कई घंटों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। धरना प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्टर और स्थानीय लोग मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि हिंदुस्तान पॉवर प्लांट द्वारा स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की लगातार उपेक्षा की जा रही है और बाहरी लोगों को प्राथमिकता देकर क्षेत्रीय लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा किया जा रहा है। ओवरलोड गाड़ी चलवाई जा रही, जिससे दुर्घटना होती हैं, सड़के खराब हों रही है एवं अन्य मुद्दे को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया।

लेकिन इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा एक रेलवे कर्मचारी की मौजूदगी को लेकर हो रही है। सूत्रों से जानकारी के अनुसार रेलवे फाटक अमलाई पर पदस्थ कर्मचारी करुणा निधान सिंह की ड्यूटी थी, मगर वह ड्यूटी छोड़कर दोपहर 1 बजे से शाम 6 बजे तक अपनी ड्यूटी छोड़कर कई घंटों तक धरना प्रदर्शन में शामिल रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वे आंदोलनकारियों के बीच सक्रिय रूप से मौजूद थे और प्रदर्शन के दौरान लगातार वहीं बने रहे।

अब सवाल यह उठ रहा है कि एक शासकीय कर्मचारी, विशेषकर रेलवे जैसे संवेदनशील विभाग में कार्यरत कर्मचारी, ड्यूटी के समय किसी धरना, प्रदर्शन या आंदोलन में कैसे शामिल हो सकता है? रेलवे विभाग के नियमों के अनुसार ड्यूटी के दौरान लापरवाही या बिना अनुमति कार्यस्थल छोड़ना गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना जाता है। ऐसे में करुणा निधान सिंह की भूमिका को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों की मानें तो यह पहला मामला नहीं है जब उक्त कर्मचारी पर ड्यूटी में लापरवाही के आरोप लगे हों। इससे पहले भी उनके खिलाफ कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे फाटक जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर तैनात कर्मचारी का ड्यूटी छोड़कर किसी और को अपनी जगह तैनात करके आंदोलन में शामिल होना किसी बड़े हादसे को निमंत्रण देने जैसा है। यदि उस दौरान कोई रेल दुर्घटना या अन्य अप्रिय घटना घट जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता।

इस पूरे मामले को लेकर अब रेलवे विभाग की भूमिका पर भी निगाहें टिक गई हैं। आम जनता और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि विभाग इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं करता, तो यह अन्य कर्मचारियों के लिए भी गलत संदेश होगा। वहीं कुछ लोगों का आरोप है कि विभाग अक्सर ऐसे मामलों में कर्मचारियों को संरक्षण देता आया है, जिससे अनुशासनहीनता बढ़ती जा रही है।

धरना प्रदर्शन के बाद क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या रेलवे प्रशासन करुणा निधान सिंह के खिलाफ विभागीय जांच बैठाएगा या फिर मामले को दबाकर उन्हें अभयदान दे दिया जाएगा। अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और नियमों की अवहेलना करने वाले कर्मचारी पर क्या कार्रवाई करता है। 

रेलवे के एक कर्मचारी का कहना है की कोई भी रेलवे कर्मचारी रेलवे ट्रेड यूनियन के अलावा किसी भी धरना, प्रदर्शन, आंदोलन में शामिल नही हों सकता है।

इनका कहना है।

मैं अपने निजी कार्य से जैतहरी गया था, धरना, प्रदर्शन, आंदोलन में शामिल होने नही गया था।

*करुणा निधान सिंह गेट कीपर रेलवे फाटक अमलाई*


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