रोका गया था निर्माण, फिर शुरू हुआ कार्य, नगर परिषद कार्यालय निर्माण में नियमों की उड़ा रहे हैं धज्जियां
*800 नागरिकों सहित कई पार्षदों ने निर्माण को लेकर की थी शिकायत*
अनूपपुर
नगर परिषद बनगवा-राजनगर में निर्माणाधीन नगर परिषद कार्यालय भवन एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। आरोप है कि शासन के स्पष्ट नियमों और जनता की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए बिना स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन के निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया है। इस पूरे मामले ने नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, इस भवन निर्माण को लेकर पूर्व में स्थानीय पार्षदों एवं नगरवासियों द्वारा विधिवत शिकायतें की गई थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि भवन निर्माण कार्य बिना आवश्यक तकनीकी स्वीकृतियों और ड्राइंग-डिजाइन के शुरू किया जा रहा है। मामला भोपाल तक पहुंचने के बाद विभागीय स्तर पर संज्ञान लिया गया था तथा संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब भी किया गया था। इसके बाद कुछ समय के लिए निर्माण कार्य रोक दिया गया था।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि जैसे ही प्रशासनिक परिस्थितियां बदलीं, नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों और उपयंत्री द्वारा बिना किसी सार्वजनिक जानकारी एवं बिना ड्राइंग-डिजाइन की अंतिम स्वीकृति प्राप्त किए निर्माण कार्य पुनः शुरू करा दिया गया। जबकि नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन के बिना किसी भी शासकीय भवन का निर्माण प्रारंभ नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस भवन के निर्माण स्थल को लेकर भी व्यापक विरोध दर्ज कराया गया था। नगर के लगभग 800 नागरिकों एवं कई पार्षदों ने लिखित रूप से मांग की थी कि भवन का निर्माण किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर कराया जाए, लेकिन जनता की इस मांग को पूरी तरह नजर अंदाज कर दिया गया। आरोप है कि जनता की आवाज को दबाकर और शिकायतों को ठंडे बस्ते में डालकर निर्माण कार्य को जल्दबाजी में आगे बढ़ाया जा रहा है।
नगरवासियों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में लोगों द्वारा की गई शिकायतों, पार्षदों के विरोध और विभागीय नोटिसों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ संदेश होगा कि जनता की आवाज का कोई महत्व नहीं रह गया है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर वे भी मूकदर्शक बनकर नियमों की खुलेआम हो रही अनदेखी को देखते रहेंगे।


