हिंदुस्तान पॉवर प्लांट के खिलाफ, ड्यूटी छोड़ रेलवे कर्मचारी करता रहा अनिश्चितकालीन धरना, प्रदर्शन
*नियम विरुद्ध आंदोलनकारियों के साथ मंच पर बैठकर देता रहा समर्थन*
अनूपपुर
जिले के जैतहरी स्थित हिंदुस्तान पॉवर प्लांट (मोजर वेयर) के खिलाफ स्थानीय ट्रांसपोर्टरों, जनप्रतिनिधियों, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं एवं आम नागरिकों द्वारा अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया गया। यह आंदोलन प्लांट प्रबंधन के कथित मनमाने रवैये और ट्रांसपोर्टरों के साथ हो रहे अन्याय के विरोध में आयोजित किया गया था। आंदोलन में शामिल सैकड़ों लोगों ने प्लांट से निकलने वाली राखड़ से भरी गाड़ियों को गेट से बाहर निकलते ही सड़क पर रोक दिया, जिससे क्षेत्र में कई घंटों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। धरना प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्टर और स्थानीय लोग मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि हिंदुस्तान पॉवर प्लांट द्वारा स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की लगातार उपेक्षा की जा रही है और बाहरी लोगों को प्राथमिकता देकर क्षेत्रीय लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा किया जा रहा है। ओवरलोड गाड़ी चलवाई जा रही, जिससे दुर्घटना होती हैं, सड़के खराब हों रही है एवं अन्य मुद्दे को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया।
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा एक रेलवे कर्मचारी की मौजूदगी को लेकर हो रही है। सूत्रों से जानकारी के अनुसार रेलवे फाटक अमलाई पर पदस्थ कर्मचारी करुणा निधान सिंह की ड्यूटी थी, मगर वह ड्यूटी छोड़कर दोपहर 1 बजे से शाम 6 बजे तक अपनी ड्यूटी छोड़कर कई घंटों तक धरना प्रदर्शन में शामिल रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वे आंदोलनकारियों के बीच सक्रिय रूप से मौजूद थे और प्रदर्शन के दौरान लगातार वहीं बने रहे।
अब सवाल यह उठ रहा है कि एक शासकीय कर्मचारी, विशेषकर रेलवे जैसे संवेदनशील विभाग में कार्यरत कर्मचारी, ड्यूटी के समय किसी धरना, प्रदर्शन या आंदोलन में कैसे शामिल हो सकता है? रेलवे विभाग के नियमों के अनुसार ड्यूटी के दौरान लापरवाही या बिना अनुमति कार्यस्थल छोड़ना गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में माना जाता है। ऐसे में करुणा निधान सिंह की भूमिका को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो यह पहला मामला नहीं है जब उक्त कर्मचारी पर ड्यूटी में लापरवाही के आरोप लगे हों। इससे पहले भी उनके खिलाफ कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे फाटक जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर तैनात कर्मचारी का ड्यूटी छोड़कर किसी और को अपनी जगह तैनात करके आंदोलन में शामिल होना किसी बड़े हादसे को निमंत्रण देने जैसा है। यदि उस दौरान कोई रेल दुर्घटना या अन्य अप्रिय घटना घट जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता।
इस पूरे मामले को लेकर अब रेलवे विभाग की भूमिका पर भी निगाहें टिक गई हैं। आम जनता और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि विभाग इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं करता, तो यह अन्य कर्मचारियों के लिए भी गलत संदेश होगा। वहीं कुछ लोगों का आरोप है कि विभाग अक्सर ऐसे मामलों में कर्मचारियों को संरक्षण देता आया है, जिससे अनुशासनहीनता बढ़ती जा रही है।
धरना प्रदर्शन के बाद क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या रेलवे प्रशासन करुणा निधान सिंह के खिलाफ विभागीय जांच बैठाएगा या फिर मामले को दबाकर उन्हें अभयदान दे दिया जाएगा। अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और नियमों की अवहेलना करने वाले कर्मचारी पर क्या कार्रवाई करता है।
रेलवे के एक कर्मचारी का कहना है की कोई भी रेलवे कर्मचारी रेलवे ट्रेड यूनियन के अलावा किसी भी धरना, प्रदर्शन, आंदोलन में शामिल नही हों सकता है।
इनका कहना है।
मैं अपने निजी कार्य से जैतहरी गया था, धरना, प्रदर्शन, आंदोलन में शामिल होने नही गया था।
*करुणा निधान सिंह गेट कीपर रेलवे फाटक अमलाई*
