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जिस आरोप पर गई सरपंची, उसी मामले पर कमिश्नर ने सचिव को किया दोष मुक्त, जिला पंचायत की दोहरी कार्रवाई कटघरे में

*पूर्व सरपंच को न्याय की जगी आस*

उमरिया

जिले की पाली जनपद पंचायत की आदिवासी ग्राम पंचायत गिजरी में अमृत सरोवर निर्माण में विलंबित भुगतान को लेकर जिला पंचायत की पूरी प्रक्रिया अब कठघरे में है। आयुक्त शहडोल के फैसले ने जिला पंचायत की कार्रवाई की मंशा पर ही सवाल* खड़े कर दिए हैं।

बताया जाता है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत उमरिया ने अमृत सरोवर में भुगतान न करने के मामले में पहले सचिव सुरेन्द्र शुक्ला को निलंबित किया। फिर इतने में भी काम नहीं बना तो सरपंच नन्हू सिंह को भी बलि का बकरा बना दिया। सचिव-सरपंच पर समान रूप से भुगतान न करने के आरोप थे। 

जिला पंचायत उमरिया की इस कार्रवाई से असंतुष्ट सचिव ने आयुक्त शहडोल में अपील कर न्याय की फरियाद लगाई। जिस पर विचारण करते हुए आयुक्त ने जांच प्रतिवेदन और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर पाया कि जिला पंचायत की कार्यवाही विधि संगत नहीं है और सचिव को दोषमुक्त कर निलंबन से बहाल कर दिया।

आयुक्त ने अपने पारित फैसले में पाया कि किसी भी शासकीय निर्माण कार्य के भुगतान के लिये तय मापदंड में उपयंत्री द्वारा कार्य का मूल्यांकन के पश्चात ही भुगतान किये जाने का प्रावधान है। जब संबंधित उपयंत्री ने मूल्यांकन ही नहीं किया तो भुगतान की कार्यवाही नहीं हो सकी।  

आयुक्त ने जनपद पंचायत पाली के खण्ड पंचायत अधिकारी के जांच प्रतिवेदन का आधार लेते हुए कहा कि समय पर उपयंत्री द्वारा कार्य का मूल्यांकन नहीं करने के लिए सचिव-सरपंच को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

जांच प्रतिवेदन में यह बात सामने आई कि सचिव ने उपयंत्री से मूल्यांकन की मांग करने के बाद भी उपयंत्री ने मूल्यांकन क्यों नहीं किया। साथ ही जिला पंचायत में शिकायत के बाद भी मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मामले में संज्ञान लेते हुए उपयंत्री पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। उसी समय ग्राम पंचायत गिजरी के सरपंच नन्दू सिंह को पद से मुक्त कर दिया गया था, आयुक्त शहडोल के न्यायालय में फरियाद लगाकर जिला पंचायत उमरिया के आदेश को रद्द करने की मांग की है। 

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​GNS फाइनेंशियल में 500 करोड़ का घोटाला, 1200 निवेशक ठगी के शिकार, नपा उपाध्यक्ष के परिसर से चल रहा था ऑफिस

*बड़े मोहरे फरार, कार्यवाही सिर्फ एजेंटों पर, सफेदपोशो को मिला संरक्षण*

​शहडोल

जिले के बुढार-धनपुरी क्षेत्र में जनता के खून-पसीने की कमाई पर जो 'डाका' डाला गया है, उसका पैमाना और भी खौफनाक है। लगभग 500 करोड़ रुपये की इस कथित निवेश ठगी ने हजारों परिवारों को तबाह कर दिया है। बावजूद इसके, व्यवस्था की सुस्ती और जांच की कछुआ चाल चीख-चीखकर सवाल पूछ रही है कि क्या अपराधियों को कानून से ज्यादा किसी के रसूख का 'कवच' मिला हुआ है?

​दर्ज एफआईआर के मुताबिक, GNS फाइनेंशियल कंपनी के शातिर संचालकों—सुखनंदन यादव, सरोज यादव और मुकेश यादव ने 'डबल मुनाफे' का मायाजाल बुनकर करीब 1200 से अधिक सीधे-साधे निवेशकों को अपने जाल में फंसाया। लूट का आंकड़ा शुरुआती शिकायतों में जो आंकड़ा करोड़ों में था, वह अब 250 करोड़ से लेकर 500 करोड़ रुपये के बीच बताया जा रहा है।

​जैसे ही पाप का घड़ा भरा, कंपनी के संचालक जनता की गाढ़ी कमाई समेटकर रफूचक्कर हो गए। पीड़ितों का सवाल: जब महीनों से पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा था, तब स्थानीय खुफिया तंत्र और प्रशासन की आंखें क्यों बंद थीं।

​इस पूरे महाघोटाले में सबसे तीखा और गंभीर सवाल उन किरदारों' पर उठ रहा है, जिन्होंने इस अवैध धंधे को फलने-फूलने के लिए अपनी जमीन और साख उधार दी थी। ​कानून का सीधा सिद्धांत यदि किसी अवैध गोदाम, वाहन या भवन से कोई गैरकानूनी धंधा संचालित होता है, तो सबसे पहले उसके मालिक को शिकंजे में लिया जाता है। तो फिर GNS कंपनी के मामले में यह ढिलाई क्यों?

जिस आलीशान भवन से इस ठगी के साम्राज्य को चलाया जा रहा था, वह धनपुरी नगरपालिका परिषद के उपाध्यक्ष और रसूखदार कांग्रेस नेता हनुमान खंडेलवाल का है। ​क्या एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को यह भनक तक नहीं थी कि उनके भवन में करोड़ों के वारे-न्यारे हो रहे हैं। ​क्या यह सिर्फ एक साधारण 'मकान-किराएदार' का रिश्ता था, या इसके पीछे संरक्षण और हिस्सेदारी का कोई गहरा खेल है?

इसमें पूंजीपति का पैसा नहीं है। इसमें खेतों में पसीना बहाने वाले किसान, दिहाड़ी मजदूर, छोटे व्यापारी, अपनी पेंशन का एक-एक पैसा जोड़ने वाले बुजुर्ग और घर चलाने वाली महिलाएं शामिल हैं। कई लोगों ने अपनी पैतृक जमीनें बेचकर और रिटायरमेंट फंड इस उम्मीद में लगा दिया था कि बच्चों का भविष्य सुधरेगा। 

​डायरेक्टरों के साथ संरक्षकों की भी हो गिरफ्तारी। जांच का दायरा केवल यादव बंधुओं तक सीमित न रहे। उन्हें वर्षों तक 'अभयदान' देने वाले हर सफेदपोश की भूमिका खंगाली जाए। इस 500 करोड़ की राशि को किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया, किन बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया, इसकी फोरेंसिक ऑडिट हो। आरोपियों और उनके करीबियों की चल-अचल संपत्तियों को अविलंब कुर्क कर निवेशकों की पाई-पाई की रिकवरी की जाए।  

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शिक्षा से दूर बच्चे, नौनिहालों से कराया जा रहा टीका-चंदन,  मंदिर परिसर में संदिग्ध लोगों की सक्रियता पर उठे सवाल

अनूपपुर

पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित मां नर्मदा मंदिर परिसर, कोटितीर्थ कुंड एवं रामघाट क्षेत्र में इन दिनों एक चिंताजनक स्थिति देखने को मिल रही है। यहां मासूम बच्चों से बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के माथे पर चंदन-टीका लगवाकर उनसे राशि लेने का कार्य कराया जा रहा है। बच्चों के हाथों में चंदन के डिब्बे, ब्रश तथा 'नर्मदे हर', 'ॐ' और 'महाकाल' अंकित सांचे दिखाई देते हैं। श्रद्धालुओं को रोककर उनके माथे पर टीका लगाया जाता है और इसके बाद उनसे स्वेच्छा अथवा अपेक्षित रूप से धनराशि ली जाती है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिन नन्हे हाथों में इस उम्र में किताबें, कॉपियां और स्कूल का बस्ता होना चाहिए, वे हाथ दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच टीका-चंदन लगाने के कार्य में व्यस्त नजर आते हैं। उनका आरोप है कि कुछ अभिभावक तात्कालिक आर्थिक लाभ के लालच में बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के बजाय इस कार्य में लगा देते हैं। परिणामस्वरूप उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है और उनका भविष्य भी संकट में पड़ता दिखाई दे रहा है।

जानकारी के अनुसार, इस कार्य से प्रतिदिन लगभग 200 से 300 रुपये तक की आय हो जाती है। इसी कारण कई बच्चे सुबह से शाम तक मंदिर परिसर में इसी गतिविधि में लगे रहते हैं। सामाजिक रूप से यह स्थिति न केवल बाल शिक्षा के अधिकार पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि बाल संरक्षण और बाल श्रम जैसे गंभीर मुद्दों की ओर भी संकेत करती है।

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि मंदिर परिसर में कुछ बाहरी एवं संदिग्ध व्यक्ति भी इसी प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त हैं। इनकी पहचान, सत्यापन और उद्देश्य को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए यह स्थिति सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंता का विषय मानी जा रही है।

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नशे पर वार, सड़क सुरक्षा बरकरार, ड्रिंक एंड ड्राइव में 2 ट्रक व 1 पिकअप जब्त

अनूपपुर

जिले में सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने और नशे के विरुद्ध जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक अनूपपुर विक्रांत मुराब के निर्देशन में संचालित "नशे से दूरी है जरूरी 2.0" अभियान के तहत यातायात पुलिस द्वारा ड्रिंक एंड ड्राइव के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्यवाही की जा रही है।

इसी क्रम में विशेष चेकिंग के दौरान शराब के नशे में वाहन चलाते पाए जाने पर 2 ट्रक एवं 1 पिकअप वाहन को जब्त किया गया। तीनों चालकों के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही करते हुए उन्हें न्यायालय में पेश किया गया।

 नशे की हालत में वाहन चलाना सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण है। अभियान का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि लोगों में यह जागरूकता पैदा करना है कि नशे की स्थिति में वाहन चलाना स्वयं के साथ-साथ अन्य लोगों के जीवन को भी खतरे में डालता है।

"नशे से दूरी है जरूरी 2.0" अभियान के अंतर्गत जिलेभर में ड्रिंक एंड ड्राइव के विरुद्ध सघन जांच एवं कार्यवाही आगे भी निरंतर जारी रहेगी। आम नागरिकों से अपील की गई है कि यदि शराब का सेवन किया है तो किसी भी परिस्थिति में वाहन न चलाएं तथा सुरक्षित और जिम्मेदार यातायात का परिचय दें।

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अवैध रेत उत्तखनन व परिवहन पर ट्रैक्टर ट्रॉली जप्त, मामला दर्ज

अनूपपुर

बेखौफ खनन माफियाओं के द्वारा दिन दहाड़े नदी नालों से रेत चोरी की जा रही है। कोतमा पुलिस ने जमगांव सड़कटोला के पास नदी से रेत उत्खनन कर परिवहन करने के दौरान ट्रैक्टर ट्रॉली जप्त कर कार्रवाई की गई है। पकड़े गए वाहन को थाने में खड़ा करवाते हुए वाहन स्वामी एवं चालक के खिलाफ के धारा 303(2 )317 (5 ) बीएनएस एवं  खनिज अधिनियम की धारा4/21 के तहत भी प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। वाहन में 4 घनमीटर रेत कीमती 5 हजार एवं ट्रैक्टर_ट्रॉली कुल कीमती 5 लाख 5 हजार को जप्त किया गया है। विदित रहे कि एक सप्ताह पूर्व भी छुलहा गांव के पास केवाई नदी से रेत चोरी करते ट्रैक्टर की जप्त किया गया था।

पुलिस ने बताया कि अवैध रेत परिवहन करते ट्रैक्टर को जप्त किया गया। बिना नंबर के ट्रैक्टर ट्रॉली मालिक के द्वारा परिवहन संबंधी कोई दस्तावेज नहीं दिखाया गया। रेत चोरी, खनिज अधिनियम सहित मोटर व्हीकल एक्ट में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना जारी है।

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वायुदूत अंकुर अभियान के तहत कल्याणिका महाविद्यालय में हुआ वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

अनूपपुर 

पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के संकल्प को साकार करने की दिशा में कल्याणिका महाविद्यालय, अमरकंटक द्वारा वायुदूत अंकुर अभियान के अंतर्गत सोमवार, 20 जुलाई 2026 को महाविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपित कर पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के निर्माण का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. आर. एस. कुशवाहा ने की। इस अवसर पर उप प्राचार्य बृजेन्द्र मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजेंद्र बिष्ट ने पौधारोपण कर अभियान का शुभारंभ किया तथा पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वृक्ष मानव जीवन के आधार हैं और प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में अधिक से अधिक पौधे लगाकर उनके संरक्षण का दायित्व निभाना चाहिए।

प्राचार्य डॉ. आर. एस. कुशवाहा ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि उनके संरक्षण एवं संवर्धन की जिम्मेदारी भी निभाएं। उप प्राचार्य बृजेन्द्र मिश्रा ने कहा कि वायुदूत अंकुर अभियान युवाओं में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करने की एक सार्थक पहल है और इस प्रकार के कार्यक्रम समाज को हरित एवं स्वच्छ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पौधारोपण किया तथा पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। 

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नशा मुक्त अभियान, नुक्कड़ नाटक और जागरूकता रैली के माध्यम से गूंजा नशामुक्ति का संदेश

उमरिया

मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा संचालित “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” अभियान के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक उमरिया विजय भगवानी के निर्देशन एवं एसडीओपी पाली  शिवचरण बोहित के मार्गदर्शन में पाली पुलिस एवं युवा टीम उमरिया (म.प्र.) द्वारा सगरा तालाब स्थित सब्जी मंडी परिसर में नुक्कड़ नाटक एवं जन-जागरूकता रैली का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन, विशेषकर युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए उन्हें नशामुक्त एवं स्वस्थ जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना था। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने प्रभावशाली प्रस्तुति देते हुए नशे से होने वाले सामाजिक, आर्थिक एवं पारिवारिक दुष्प्रभावों को जीवंत रूप में दर्शाया। वहीं जागरूकता रैली के दौरान पुलिस एवं युवा टीम के सदस्यों ने प्रेरक नारों के माध्यम से नगरवासियों को नशे से दूर रहने तथा स्वस्थ एवं सुरक्षित समाज के निर्माण में सहभागिता निभाने का संदेश दिया।

इस अवसर पर पाली थाना प्रभारी उपनिरीक्षक वीरेंद्र यादव  ने उपस्थित नागरिकों को संबोधित करते हुए नशे के दुष्परिणामों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार, भविष्य और समाज—चारों के लिए घातक है। उन्होंने सभी नागरिकों से नशे से दूर रहने, युवाओं को इसके प्रति जागरूक करने तथा अवैध मादक पदार्थों से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने की अपील की।कार्यक्रम के अंतर्गत प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक का कुशल संचालन युवा टीम उमरिया के टीम संयोजक हिमांशु तिवारी द्वारा किया गया, जिसकी उपस्थित नागरिकों ने सराहना की।

पाली पुलिस एवं युवा टीम उमरिया का यह संयुक्त प्रयास जनसहभागिता के माध्यम से नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक प्रेरणादायक एवं सराहनीय पहल साबित हुआ। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 15 से 30 जुलाई 2026 तक संचालित इस अभियान का उद्देश्य प्रदेशभर में जनजागरूकता के माध्यम से नशे के विरुद्ध सशक्त सामाजिक वातावरण तैयार करना है।

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क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य ने किया जिला चिकित्सालय का निरीक्षण, दिए निर्देश

अनूपपुर

शहडोल एवं रीवा संभाग के क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा डाॅ. जी.एस. परिहार  ने जिला चिकित्सालय अनूपपुर का  निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं, दवा वितरण, साफ-सफाई, मरीजों को प्रदान की जा रही सेवाओं तथा आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य ने अस्पताल प्रबंधन एवं स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देशित करते हुए कहा कि मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अस्पताल में पाई गई कमियों को शीघ्र दूर करने तथा आवश्यक सुधारात्मक कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित साफ-सफाई, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार एवं स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने के कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है।

उन्होंने एनीमिया की जांच करने, मौसमी बीमारियों को दृष्टिगत रखते हुए सभी दवाइयां उपलब्ध कराने, गर्भवती माता की विशेष जांच करने, बच्चों का टीकाकरण नियमित रूप से हो आदि स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

सशक्त हस्ताक्षर की स्वर्णिम 50 वीं काव्य गोष्ठी में गूॅंजी साहित्य की स्वर धारा 


जबलपुर

सशक्त हस्ताक्षर की50 वीं काव्य गोष्ठी चंचलबाई महाविद्यालय में सानंद सम्पन्न हुई। संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा ने सभी अतिथियों, साहित्य मनीषियों का अपनी ओर से सभी का अभिनंदन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अलकेश चतुर्वेदी, अध्यक्षता महामहोपाध्याय आचार्य डॉ. हरिशंकर दुबे, विशिष्ट अतिथि डॉ. सुरेन्द्रलाल साहू निर्विकार, डॉ. अरुणा पान्डे मंगल भाव कवि संगम त्रिपाठी की गरिमामय उपस्थिति रही। अरुण शुक्ल, अमरनाथ सोनी, महेश स्थापक, दिवाकर शर्मा,प्रीति शुक्ला की स्वागत अभिनंदन में सहभागिता रही। सरस्वती वंदना अनुराधा गर्ग दीप्ति ने की।

           गोष्ठी का शुभारंभ कवि कालिदास ताम्रकार काली ने की । सुवीर श्रीवास्तव वीर, शिवानी भगत, इन्द्राना से प्रकाशसिंह ठाकुर, भेड़ाघाट से कुंजीलाल चकवर्ती निर्झर , उर्मिला श्रीवास्तव, विवेक कुमार गुप्ता सहर, आशा मालवीय, अखिलेश खरे अखिल,प्रेम कुमार पालीवाल,दीनदयाल तिवारी बेताल,जय प्रकाश श्रीवास्तव,कौशिक सेन गुप्ता,प्रभा विश्वकर्मा शील,लखन रजक, विजय सिन्हा कमर इलाहावादी, सुशील श्रीवास्तव, मदन श्रीवास्तव,श्रीमती तरुणा श्रीवास्तव, प्रीति नामदेव भूमिजा,विजय विश्वकर्मा,पं निरंजन द्विवेदी वत्स ,डॉ. मुकुल तिवारी, अमर सिंह वर्मा, वंदना सोनी विनम्र, संध्या द्विवेदी,एम. एल. शर्मा नयन,ज्योति  मिश्रा ने एक से बढ़कर एक रचनाओं की प्रस्तुति देकर मंच को चरम पर पहुंचाया । मंचस्थ अतिथियों ने भी रचना पाठ कर मंच को ऊँचाईयाँ दी । संचालन गणेश श्रीवास्तव प्यासा व आभार प्रदर्शन तरुणा खरे तनु ने किया।

नपा उपाध्यक्ष के परिसर से चलाया जा रहा था, 500 करोड़ का महाघोटाला, मोहरे भाग गए, सफेदपोशो को मिला संरक्षण

*​GNS फाइनेंशियल कांड में सुलगते सवाल, आखिर कब तक 'रसूखदारों' की चौखट के बाहर थमी रहेगी जांच की रफ्तार*


​शहडोल

जिले के बुढार-धनपुरी क्षेत्र में जनता के खून-पसीने की कमाई पर जो 'डाका' डाला गया है, उसका पैमाना और भी खौफनाक है। लगभग 500 करोड़ रुपये की इस कथित निवेश ठगी ने हजारों परिवारों को तबाह कर दिया है। बावजूद इसके, व्यवस्था की सुस्ती और जांच की कछुआ चाल चीख-चीखकर सवाल पूछ रही है कि क्या अपराधियों को कानून से ज्यादा किसी के रसूख का 'कवच' मिला हुआ है?

​*1200 शिकार, 500 करोड़ की 'लूट'*

​दर्ज एफआईआर के मुताबिक, GNS फाइनेंशियल कंपनी के शातिर संचालकों—सुखनंदन यादव, सरोज यादव और मुकेश यादव ने 'डबल मुनाफे' का मायाजाल बुनकर करीब 1200 से अधिक सीधे-साधे निवेशकों को अपने जाल में फंसाया। लूट का आंकड़ा शुरुआती शिकायतों में जो आंकड़ा करोड़ों में था, वह अब 250 करोड़ से लेकर 500 करोड़ रुपये के बीच बताया जा रहा है।

​जैसे ही पाप का घड़ा भरा, कंपनी के संचालक जनता की गाढ़ी कमाई समेटकर रफूचक्कर हो गए। पीड़ितों का सवाल: जब महीनों से पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा था, तब स्थानीय खुफिया तंत्र और प्रशासन की आंखें क्यों बंद थीं।

​*किराएदार भागा मकान मालिक की जिम्मेदारी कहा गई* 

​इस पूरे महाघोटाले में सबसे तीखा और गंभीर सवाल उन किरदारों' पर उठ रहा है, जिन्होंने इस अवैध धंधे को फलने-फूलने के लिए अपनी जमीन और साख उधार दी थी। ​कानून का सीधा सिद्धांत यदि किसी अवैध गोदाम, वाहन या भवन से कोई गैरकानूनी धंधा संचालित होता है, तो सबसे पहले उसके मालिक को शिकंजे में लिया जाता है। तो फिर GNS कंपनी के मामले में यह ढिलाई क्यों?

​स्थानीय गलियारों और पीड़ित जनता के बीच यह बात पूरी ताकत से गूंज रही है कि जिस आलीशान भवन से इस ठगी के साम्राज्य को चलाया जा रहा था, वह धनपुरी नगरपालिका परिषद के उपाध्यक्ष और रसूखदार कांग्रेस नेता हनुमान खंडेलवाल का है। ​क्या एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को यह भनक तक नहीं थी कि उनके भवन में करोड़ों के वारे-न्यारे हो रहे हैं। ​क्या यह सिर्फ एक साधारण 'मकान-किराएदार' का रिश्ता था, या इसके पीछे संरक्षण और हिस्सेदारी का कोई गहरा खेल है?

​जनता मांग कर रही है कि जांच की सुई जब तक इस रसूखदार चौखट तक नहीं पहुंचेगी, तब तक इंसाफ की उम्मीद बेमानी है। (हालांकि, जब तक कोई सक्षम एजेंसी या अदालत इस पर मुहर नहीं लगाती, तब तक निष्पक्षता के नाते उनका पक्ष भी सामने आना जरूरी है—लेकिन जांच से परहेज क्यों?

*​सोया रह गया पुलिस प्रशासन*

​निवेशकों का सीधा आरोप है कि कंपनी के खिलाफ शिकायतें नई नहीं थीं। शुरुआती स्तर पर ही अगर प्रशासन ने अपनी चमचमाती गाड़ियों से उतरकर इन दफ्तरों की थोड़ी भी स्क्रूटनी की होती, तो आज हजारों घर बर्बाद होने से बच जाते।

​किसकी कमाई डूबी? इसमें किसी बड़े पूंजीपति का पैसा नहीं है। इसमें खेतों में पसीना बहाने वाले किसान, दिहाड़ी मजदूर, छोटे व्यापारी, अपनी पेंशन का एक-एक पैसा जोड़ने वाले बुजुर्ग और घर चलाने वाली महिलाएं शामिल हैं। कई लोगों ने अपनी पैतृक जमीनें बेचकर और रिटायरमेंट फंड इस उम्मीद में लगा दिया था कि बच्चों का भविष्य सुधरेगा। आज वे थानों और दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर अपनी चप्पलें घिस रहे हैं।

​*एजेंटों' की कार्रवाई से काम नहीं चलेगा*

​पीड़ितों और सामाजिक संगठनों ने अब आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। उनकी मांगें बिल्कुल साफ और आक्रामक हैं। डायरेक्टरों के साथ संरक्षकों की भी हो गिरफ्तारी। जांच का दायरा केवल यादव बंधुओं तक सीमित न रहे। उन्हें वर्षों तक 'अभयदान' देने वाले हर सफेदपोश की भूमिका खंगाली जाए। इस 500 करोड़ की राशि को किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया, किन बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया, इसकी फोरेंसिक ऑडिट हो।

​आरोपियों और उनके करीबियों की चल-अचल संपत्तियों को अविलंब कुर्क कर निवेशकों की पाई-पाई की रिकवरी की जाए।  जिन अधिकारियों की नाक के नीचे यह समानांतर बैंकिंग सिस्टम चल रहा था, उन पर भी लापरवाही की गाज गिरे।

​*परीक्षा की घड़ी में जांच एजेंसियां*

​बुढार-धनपुरी का यह कथित घोटाला अब महज एक आर्थिक अपराध नहीं रह गया है। यह शहडोल के पुलिस-प्रशासन की साख, रसूखदारों के दबाव के आगे कानून की ताकत और आम जनता के बचे-खुचे भरोसे की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है।

​क्या शहडोल पुलिस केवल 'भगोड़े' मोहरों की तलाश का नाटक करती रहेगी, या फिर उन असली 'शतरंज के खिलाड़ियों' के गिरेबान तक हाथ डालेगी जो शहर में ही बैठकर सत्ता और रसूख का लुत्फ उठा रहे हैं? जनता की नजरें टिकी हैं, और आक्रोश का लावा कभी भी फूट सकता है।

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