चेक बाउंस मामले में आरोपी को न्यायालय ने 4.12 लाख देने का सुनाया फैसला, न देने पर 3 माह की कैद
चेक बाउंस मामले में आरोपी को न्यायालय ने 4.12 लाख देने का सुनाया फैसला, न देने पर 3 माह की कैद
अनूपपुर
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, राजेन्द्रग्राम, सुनील कुमार खरे द्वारा परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 (चेक अनादरण) के एक महत्वपूर्ण प्रकरण में निर्णय पारित करते हुए अभियुक्त को दोषसिद्ध किया गया है।
यह प्रकरण सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, शाखा लालपुर द्वारा शाखा प्रबंधक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया था, जिसमें बैंक की ओर से अधिवक्ता श्री विजेन्द्र सोनी ने प्रभावी पैरवी की।
प्रकरण में न्यायालय ने पाया कि अभियुक्त द्वारा जारी किया गया चेक अनादृत (बाउंस) हुआ था तथा परक्राम्य लिखत अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन सिद्ध हुआ। इसके फलस्वरूप न्यायालय ने अभियुक्त को दोषसिद्ध करते हुए बैंक को चेक राशि, उस पर देय ब्याज सहित कुल ₹4,12,221/- प्रतिकर अदा करने का आदेश पारित किया है। साथ ही वाद व्यय के रूप में ₹16,968/- की अतिरिक्त राशि अदा करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि अभियुक्त निर्धारित प्रतिकर राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उसे 03 माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। इसके अतिरिक्त वाद व्यय का भुगतान न करने की स्थिति में 01 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना होगा।
बैंक की ओर से प्रकरण का संचालन कर रहे अधिवक्ता विजेन्द्र सोनी ने कहा कि यह निर्णय वित्तीय अनुशासन एवं बैंकिंग लेन-देन में चेक की विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है। यह फैसला उन व्यक्तियों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है जो चेक जारी करने के बाद अपने वैधानिक दायित्वों का पालन नहीं करते।


