टिहकी कोल यार्ड में 45 लाख का 1 हजार टन कोयला पुलिस ने किया जब्त, जांच जारी


शहडोल 

जिले में अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ ब्यौहारी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1 हजार टन कोयला जब्त किया है। जब्त किए गए कोयले की कीमत लगभग 45 लाख रुपये बताई जा रही है। टिहकी स्थित एक कोल यार्ड में पुलिस ने दबिश देकर कोयले से संबंधित दस्तावेजों की जांच की लेकिन मौके पर वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद पुलिस ने कोयला जब्त कर जांच शुरू कर दी। इस कार्रवाई से क्षेत्र के कोयला कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

ब्यौहारी थाना क्षेत्र के टिहकी गांव में संचालित एक कोल यार्ड में पुलिस ने दबिश दी। कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी ज्याउल हक के नेतृत्व में पुलिस टीम ने यार्ड में खुले मैदान में रखे भारी मात्रा में कोयले की जांच-पड़ताल की। जांच के दौरान पुलिस ने कोयले के भंडारण और परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेजों की मांग की लेकिन मौके पर मौजूद संचालक आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है। कोयले के स्रोत सहित उससे जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि संबंधित कोल यार्ड का लाइसेंस ऋषभ पाण्डेय के नाम पर है। हालांकि लाइसेंस होने के बावजूद जब्त कोयले से संबंधित वैध दस्तावेज अभी तक प्रस्तुत नहीं किए जा सके हैं। इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई है। जांच पूरी होने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

गुलाब सलाट एक्शन अभिनेता को मिला राष्ट्रीय कार्य दर्पण गौरव पुरस्कार अवॉर्ड 


मुम्बई

गुजरात के आनंद जिले के एक साधारण परिवार में जन्मे गुलाब सलाट आज भारतीय सिनेमा के उभरते हुए एक्शन एक्टर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। गरीबी, संघर्ष और असफलताओं के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके जीवन की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखता है, लेकिन हालात से हार मान लेता है।

गुलाब को अब तक कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं —पुरस्कार अभिनंदन पत्र राष्ट्रीय एकता सन्मान महासोळा राज्यस्तरीय लोक सेवा गौरव अवार्ड  दिल्ली बॉलीवुड सिने रिपोर्टर अवार्ड, नागपुर गौरव महाराष्ट्र अवार्ड, मुंबई जन गौरव कार्य दर्पण अवार्ड, वडोदरा सिने मीडिया अवार्ड, और वाइब्रेंट गुजराती फिल्म अवार्ड। ये सम्मान उनके कठिन परिश्रम और प्रतिभा की पहचान हैं।

*संघर्ष की शुरुआत: तंबू से मुंबई तक का सफर*

गुलाब के पिता तम्मा भाई सलाट बेहद गरीब थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन एक खाट-तंबू में बिताया। लेकिन उन्होंने अपने बेटे के सपनों को कभी मरने नहीं दिया। बचपन से ही गुलाब फिल्मों की दुनिया से आकर्षित थे। मात्र 8 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता से कहा कि एक दिन वे फिल्मों में काम करेंगे।

पिता ने बेटे के सपनों के लिए दिन-रात मेहनत की और उन्हें ऑल इंडिया वाडो काई कराटे दो अकादमी में दाखिला दिलाया। यहीं से गुलाब ने अपने जीवन की दिशा तय की — एक्शन और मार्शल आर्ट के जरिए फिल्मी दुनिया में नाम कमाना।

*हैदराबाद से मुंबई तक — मेहनत और धोखे की कहानी*

डांस और जिमनास्टिक में माहिर होने के लिए गुलाब हैदराबाद गए, जहां उन्होंने एक साल की डिग्री हासिल की। इसके बाद उनके पिता उन्हें लेकर मुंबई पहुंचे ताकि उन्हें फिल्म में काम मिल सके।

लेकिन किस्मत ने फिर परीक्षा ली — एक डायरेक्टर ने गुलाब के पिता से ₹15,000 ठग लिए और काम देने का वादा पूरा नहीं किया।    निराश होकर पिता-पुत्र वापस आनंद लौट आए। कुछ समय बाद तम्मा भाई का निधन हो गया। यह गुलाब के जीवन का सबसे कठिन दौर था।

*संघर्ष से सफलता तक*

पिता की मृत्यु के बाद गुलाब ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कराटे सिखाना शुरू किया, छोटे-छोटे शो किए और डांस प्रस्तुतियों से जो भी कमा सकते थे, उससे घर चलाया। उनके परिवार में दो भाई और दो बहनें थीं, और मां की तबीयत भी बिगड़ती जा रही थी।

इन्हीं संघर्षों के बीच गुलाब ने निश्चय किया कि वे अपने पिता का नाम रोशन करेंगे। लगातार प्रयासों के बाद उन्हें टीवी सीरियल ‘जय जय जग जननी दुर्गा मां जय बजरंगबली’ में काम करने का अवसर मिला। इसके बाद फिल्मों में भी उनका सफर शुरू हुआ।

*अब एक्शन ही पहचान है*

गुलाब सलाट आज एक प्रशिक्षित एक्शन एक्टर हैं, जिन्होंने मार्शल आर्ट, कराटे, जिमनास्टिक, योगा, बॉडी स्टंट, ब्रेक डांस, लाठी, ननचाकू, तलवार, राइफल शूटिंग और फिल्मी अभिनय में महारत हासिल की है।    उनका कहना है —“मैं अपने पिता का नाम रोशन करने का सपना जल्द ही पूरा करूंगा।”

गुलाब सलाट की यह यात्रा न सिर्फ एक अभिनेता की कहानी है, बल्कि उस संघर्षशील भारतीय युवा की दास्तान है जो हालात से नहीं, बल्कि अपने हौसलों से लड़ता है।

*“गुलाब सलाट — मेहनत, लगन और आत्मविश्वास की जीवंत मिसाल”*

गंगांजलि साझा संग्रह राजेंद्र कुमार तिवारी को किया भेंट-  कवि संगम त्रिपाठी 


जबलपुर

गंगांजलि साझा काव्य संग्रह राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर को उनके जबलपुर आगमन पर सौजन्य मुलाकात कर कवि संगम त्रिपाठी ने भेंट किया। राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर वरिष्ठ कवि साहित्यकार समाजसेवी व हिंदी प्रेमी हैं।

गंगांजलि साझा काव्य संग्रह के संपादक डॉ अजय शुक्ल है व इस संग्रह में कवि संगम त्रिपाठी हास्य व्यंगकार जबलपुर मध्यप्रदेश, कवि पंकज बुरहानपुरी कवि लेखक बुरहानपुर,‌ कवि श्याम फतनपुरी कवि गीतकार गोमती नगर लखनऊ, डॉ सोमनाथ शुक्ल कवि लेखक प्रयागराज की रचनाएं संग्रहित हैं। गंगांजलि साझा काव्य संग्रह भावनाओं का काव्य संगम है।

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