SSC व MP PNST में अनियमितताओं, भ्रष्टाचार के खिलाफ नेयू ने राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन


रीवा

देशभर की प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों के विरोध में नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (नेयू) के नेतृत्व में रीवा में छात्रों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) मंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में विशेष रूप से एसएससी परीक्षाओं में पेपर लीक, निजी कंपनियों द्वारा अव्यवस्थित परीक्षा संचालन, तकनीकी गड़बड़ियों और मध्य प्रदेश पीएनएसटी 2022 परीक्षा की काउंसलिंग में हो रही अत्यधिक देरी जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया गया।

नेयू के जिला अध्यक्ष निखिल शिवा मिश्रा ने बताया कि देश के लाखों प्रतियोगी छात्रों की मेहनत एक अपारदर्शी और असंवेदनशील प्रणाली की भेंट चढ़ रही है। एसएससी जैसी केंद्रीय परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने की घटनाएं और निजी कंपनियों की मनमानी ने युवाओं के भविष्य को अंधकारमय बना दिया है। वहीं, एमपी पीएनएसटी 2022 की छात्राएं दो वर्षों से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की प्रतीक्षा कर रही हैं, जो कि एक सीधा अन्याय और प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है।

ज्ञापन के माध्यम से छात्रों ने सरकार से मांग की कि परीक्षा संचालन का जिम्मा पारदर्शी एजेंसियों जैसे टीसीएस को सौंपा जाए तथा एडुक्विटी जैसी विवादित और अपारदर्शी कंपनियों पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, तकनीकी दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त एक स्वतंत्र परीक्षा नियामक आयोग के गठन की मांग भी की गई, जिससे भविष्य में इस प्रकार की अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को रोका जा सके। साथ ही यह भी मांग की गई कि एमपी पीएनएसटी 2022 की काउंसलिंग और एडमिशन प्रक्रिया अविलंब शुरू की जाए ताकि छात्राओं का शैक्षणिक भविष्य और अधिक बाधित न हो।

नेयू ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार द्वारा शीघ्र उचित कार्यवाही नहीं की गई, तो छात्रों के साथ मिलकर प्रदेशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस अवसर पर प्रमुख रूप से अर्पित तिवारी, प्रियांशु मिश्रा, आदर्श मिश्रा, अतुल तिवारी, उदय शुक्ला, विकेश रावत और प्रांशु उपस्थित रहे।

समाचार 01 फ़ोटो 01

बाजार से लौट रहे व्यापारी से बंदूक की दिखाकर लूट, फायर करके  भागे लूटेरे, जांच में जुटी पुलिस

*गोहपारू थाना क्षेत्र का मामला*

शहडोल

जिले में अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे है। खन्नौधी बाजार कर लौट रहे व्यापारी के साथ रास्ते में बंदूक की नोक पर लूट की वारदात को अज्ञात चार बदमाशों ने अंजाम देकर मौके से फरार हो गए है।घटना की जानकारी के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने बंदूक से चली गोली की पांच खोखे मौके से बरामद किए हैं।

पुलिस ने बताया कि गोहपारू थाना क्षेत्र के रतहर गांव के रहने वाले अनिल कुमार सोनी अपने पुत्र के साथ खनौधी बाजार कर अपनी बाइक से वापस घर लौट रहे थे, तभी मंगलवार रात तकरीबन 8 बजे वह जैसे ही मलदा गांव के पास स्थित क्रेशर के पास पहुंचे, तभी एक बिना नंबर की पल्सर बाइक में सवार चार बदमाश, जो पीड़ित की बाईक के पीछे से आ कर व्यापारी की बाइक के आगे अपनी बाइक लगा दी।और बंदूक की नोक पर लूट की घटना को अंजाम देते हुए भाग गए।

पीड़ित व्यापारी अनिल कुमार सोनी ने बताया कि वह गिलिट और कुछ चांदी के सामान की बिक्री के लिए बाजार करते हैं ।बाजार करने के बाद जब अनिल वापस लौट रहे थे तभी गांव के रास्ते में ही बदमाश पहुंचे। और लूट की वारदात को अंजाम दिया है, जब कुछ वाहनों का मार्ग से गुजरना हुआ,तो आरोपियों ने पांच हवाई फायर भी किया, जिसे सुन राहगीर मौके पर रुके नहीं, और वहां से आगे बढ़ गए। घटना को अंजाम देते वक्त व्यापारी एवं उसके पुत्र ने आरोपियों को पकड़ने का प्रयास भी किया, उसी दौरान अनिल कुमार के पुत्र अमन के हाथ में भी चोट आई है। अनिल का कहना है कि बाजार में बिक्री का पैसा लगभग 9 हजार नगद आरोपी लूट कर फरार हो गए। बदमाशों ने व्यापारी का बैग भी छीना तभी उनके पुत्र ने आरोपियों से बैग छुड़ा लिया। उसी बीच पुत्र को हाथ में चोट आई है।

व्यापारी ने बताया कि आरोपियों को ऐसा लगा कि वह सोने चांदी से भरा बैग रखे हुए हैं, जिसे वह छुड़ना चाह रहे थे, इसी दौरान मार्ग से कुछ वाहनों की आवाजाही हुई जिसे देख बदमाशों ने बंदूक से पांच हाइवे फायर कर भाग गए। घटना के बाद व्यापारी ने मामले की जानकारी पुलिस को दी, जानकारी के बाद पुलिस ने पड़ताल शुरू की, पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के विरुद्ध लूट का मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।

समाचार 02 फ़ोटो 02

जनजातीय विवि कुलपति पैनल में सरकार विरोधी और कम्युनिस्ट घुसपैठ- भाजपा ने उठाई सीबीआई जांच की मांग

*पाँचों उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि और गतिविधियाँ गहरे संदेह के घेरे में*

अनुपपुर

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में कुलपति चयन प्रक्रिया में अत्यंत गंभीर, चिंताजनक और अमरकंटक की अस्मिता पर सीधा प्रहार हैं। चयनित होने वाले कुलपति पैनल में पाँच नाम – प्रो. सथुपति प्रसन्ना श्री, प्रो. बी. बी. मोहंती, प्रो. तेज प्रताप सिंह, प्रो. कपिल देव मिश्रा, और प्रो. राजेन्द्र सोनकवड़े सम्मिलित हैं। इन सभी पर गंभीर नैतिक, वैचारिक, प्रशासनिक और आपराधिक आरोप हैं, और इनकी चयन प्रक्रिया अनेक अनियमितताओं से घिरी है। सबसे दुःखद है कि विश्वविद्यालय की स्थापना को 17 वर्ष पूरे हो गए, फिर भी आज तक मध्यप्रदेश अथवा स्थानीय महाकौशल अंचल या विश्वविद्यालय से एक भी कुलपति का चयन नहीं हुआ है। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी राजेश सिंह ने महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान, उच्च शिक्षा सचिव श्री विनीत जोशी तथा सीबीआई डायरेक्टर श्री प्रवीण सूद को ज्ञापन सौंप कार्यवाही की मांग की है।

*संदिग्ध नामों का पैनल वैचारिक षड्यंत्र* 

राजेश सिंह ने बताया की चयन समिति द्वारा अनुशंसित सभी पाँचों उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि और गतिविधियाँ गहरे संदेह के घेरे में हैं। प्रो. सथुपति प्रसन्ना श्री ने स्वयं कार्यकारी परिषद सदस्य रहते हुए अपने नाम की अनुशंसा करवाई, जो स्पष्ट रूप से हितों का टकराव है। उनका पूर्व कम्युनिस्ट पृष्ठभूमि, चर्चित मोदी-विरोधी लेखिकाओं पर किया गया शोध और विश्वविद्यालय में जातिवादी व वैचारिक गुटों के साथ मेलजोल संस्थागत निष्पक्षता पर हमला है। प्रो. बी. बी. मोहंती के खिलाफ पांडिचेरी विश्वविद्यालय में वित्तीय घोटाले और प्रशासनिक अनियमितताओं की सीबीआई जांच लंबित है। प्रो. तेज प्रताप सिंह द्वारा नक्सलवाद के पक्ष में लिखे गए लेख और वक्तव्य राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हैं। वहीं प्रो. कपिल देव मिश्रा पर उत्पीड़न, वित्तीय अनियमितता, और माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आदेशित जांच के मामलों में संलिप्तता जैसे आरोप गंभीर हैं। प्रो. राजेन्द्र जी सोनकवड़े पर डिजिटल धोखाधड़ी और पूर्व प्रशासनिक पद के दुरुपयोग तथा लखनऊ में महिला शिकायत के मामले हैं। यह सब दर्शाता है कि इस पैनल में गंभीर प्रशासनिक पतन, वैचारिक षड्यंत्र, गुटबाजी का स्पष्ट प्रमाण है।

*हो रहा है सुनियोजित षड्यंत्र*

राजेश सिंह ने आगे बताया की स्थापना के बाद से आज तक किसी भी स्थानीय या विश्वविद्यालय से जुड़े प्रतिभाशाली विद्वान को कुलपति के रूप में चयनित न करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। आखिर महाकौशल की धरती की योग्यता और निष्ठा को कब मान्यता दी जाएगी? वर्तमान पैनल में एक भी व्यक्ति न तो विचार से जुड़ा है, न ही महाकौशल अथवा मध्यप्रदेश से। यह स्थानीय प्रतिभाओं के सुनियोजित बहिष्कार का प्रमाण है, भाजपा यह दृढ़ता से मानती है कि किसी भी संस्थान का विकास तभी संभव है जब उसकी जड़ें उस क्षेत्र की पहचान और जरूरतों से जुड़ी हों। महाकौशल को बार-बार वंचित करना एक प्रकार की संवैधानिक और सांस्कृतिक उपेक्षा है तथा कम्युनिस्ट छद्मवेश धारण करके यहाँ कुलपति बनकर जनजातियों के बीच गहरी साजिश करने की योजना बनाए है।

*सीबीआई जांच की मांग*

राजेश सिंह ने आगे बताया की जनजातीय विवि के कुलपति चयन प्रक्रिया की जांच सीबीआई जैसी शीर्ष केंद्रीय एजेंसियों से करवाई जाए। कार्यकारी परिषद की 67वीं बैठक में दस्तावेजों का समय पर वितरण नहीं किया गया, उपस्थिति रजिस्टर में गड़बड़ी हुई, और उम्मीदवारों का चयन पूर्वनियोजित तरीके से बिना विचार-विमर्श के किया गया। जिन शिक्षकों और अधिकारियों पर वैचारिक जासूसी, जातिवादी गुटबंदी और पूर्व निर्धारित लॉबिंग के आरोप हैं, उनके कॉल डिटेल्स और संपर्कों की फॉरेंसिक जांच अनिवार्य है। जनजातीय विश्वविद्यालय का नेतृत्व केवल शैक्षणिक योग्यता से नहीं, बल्कि नैतिक प्रतिबद्धता, राष्ट्रीय भावना, और जनजातीय संवेदना से तय होना चाहिए। यह आवश्यक है कि विश्वविद्यालय का कुलपति ऐसा हो, जो न केवल प्रखर विद्वान हो, अपितु राष्ट्रवादी मूल्यों का वाहक, ईमानदार प्रशासक, और आदिवासी उत्थान का सच्चा प्रतिनिधि हो। भाजपा यह मानती है कि शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, चरित्र निर्माण की भूमि है। महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, और सीबीआई निदेशक से अपील किया हैं कि वे इस विषय में शीघ्र हस्तक्षेप करें, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें।

समाचार 03 फ़ोटो 03

चोरी का खुलासा, 3 आरोपी गिरफ्तार, एसईसीएल की 65 हज़ार की केबल वायर बरामद

अनूपपुर

जिले के थाना रामनगर क्षेत्र में एसईसीएल के सब स्टेशन से केबल वायर चोरी की वारदात के कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी गया माल बरामद करने में सफलता हासिल की है। 04 अगस्त 2025 को दुर्गाबाई पति शिवलाल महोबे, उम्र 52 वर्ष, सुरक्षा प्रभारी राजनगर एरिया, सीसीएल हसदेव क्षेत्र ने थाना राजनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई कि बाबू लाइन सब स्टेशन के बगल से स्थित बिजली पोल से सब स्टेशन की दीवार तक लगभग 20 मीटर लंबी आर्म्ड केबल कॉपर वायर, जिसकी कीमत लगभग 65 हजार है, कोई अज्ञात चोर द्वारा चोरी कर ले गया है। शिकायत पर थाना राजनगर में अपराध क्रमांक 214/25, धारा 303(2) BNS के तहत प्रकरण दर्ज कर तत्काल विवेचना शुरू की गई।

थाना रामनगर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चोरी के कुछ ही घंटों में आरोपियों को चिह्नित कर गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने पूछताछ में चोरी की घटना को स्वीकार कर लिया। सूरज हथेल पिता सुफल हाथेल, उम्र 22 वर्ष, किशन नरपरवा पिता मातादीन नरपरवा, उम्र 27 वर्ष, आयुष मालिक पिता स्व. राजू मालिक, उम्र 19 वर्ष,निवासी वार्ड क्रमांक 7, सिविल कॉलोनी, राजनगर, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 20 मीटर आर्म्ड केबल कॉपर वायर बरामद की है। तीनों आरोपियों के विरुद्ध विधिसंगत कार्रवाई की गई है।

समाचार 04 फ़ोटो 04

अवैध अतिक्रमण पर चला बुलडोजर, पुलिस प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई

अनूपपुर

नगर परिषद अमरकंटक एवं पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने अमरकंटक क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध प्रभावशाली कार्रवाई की। इस मुहिम में मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री चैन सिंह परस्ते एवं अतिक्रमण प्रभारी द्वारा पुलिस बल के सहयोग से वार्ड क्रमांक ८ में दस स्थलों को चिन्हित कर अतिक्रमण हटाया गया। प्रशासन का यह स्पष्ट संदेश है कि अमरकंटक को अतिक्रमण से मुक्त करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। नगर परिषद और पुलिस की संयुक्त टीमें भविष्य में भी समय-समय पर ऐसे अभियान चलाकर अवैध निर्माणों और अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई करती रहेंगी।

प्रशासन का यह अभियान अमरकंटक की प्राकृतिक, धार्मिक और पर्यटन महत्व की सुंदरता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल स्थानीय नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि पर्यटकों को भी व्यवस्थित और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध होगा। नगर परिषद अमरकंटक सभी नागरिकों से अपील करती है कि वे नगर को अतिक्रमण मुक्त बनाने में प्रशासन का सहयोग करें और अमरकंटक की सांस्कृतिक विरासत व सौंदर्य को सुरक्षित रखने में भागीदार बनें।

समाचार 05 फ़ोटो 05

अवैध निर्माण पर कार्रवाई की तैयारी, नगर परिषद ने विद्युत विभाग को दिया कनेक्शन काटने का निर्देश

*NOC को किया अवैध घोषित*

अनूपपुर

नगर परिषद जैतहरी द्वारा वार्ड क्रमांक 01 के अंतर्गत आने वाले एक अवैध निर्माण को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। नगर परिषद ने मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कनिष्ठ अभियंता को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संबंधित भवन के विद्युत कनेक्शन को तत्काल प्रभाव से विच्छेद किया जाए। यह कार्रवाई उस स्थिति में की जा रही है जब उक्त निर्माण के लिए दी गई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की वैधता संदिग्ध पाई गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर परिषद द्वारा दिनांक 14 नवम्बर 2013 को अनापत्ति प्रमाण पत्र क्रमांक 822 जारी किया गया था। लेकिन बाद में जांच में यह पाया गया कि उक्त प्रमाण पत्र के खसरा नंबर में ओवर राइटिंग की गई है। इस संदर्भ में तत्कालीन सहायक राजस्व निरीक्षक पराग दुबे से जब जवाब मांगा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा किसी प्रकार की ओवर हैंड राइटिंग नहीं की गई है। जबकि श्री नंदलाल सोनी द्वारा नगर परिषद में जो एनओसी प्रस्तुत की गई है, उसमें ओवर राइटिंग पाई गई।

नगर परिषद ने पूर्व में भी तीन बार क्रमशः दिनांक 26 मई, 12 जून और 26 जून 2025 को अवैध निर्माण के विरुद्ध नोटिस जारी किए थे। बावजूद इसके निर्माण कार्य पर कोई प्रभावी रोक नहीं लगाई गई। ऐसे में नगर परिषद ने अब सख्त रुख अपनाते हुए विद्युत विभाग से मांग की है कि जब तक भवन को वैध स्वीकृति प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक खसरा नंबर 547 में दिए गए बिजली कनेक्शन को तत्काल प्रभाव से काट दिया जाए। नगर परिषद का कहना है कि अवैध निर्माण को बढ़ावा देने से नगर के राजस्व को भारी नुकसान होता है और ऐसी गतिविधियों पर सख्त कार्यवाही जरूरी है। यह निर्णय नगर निकाय के राजस्व संरक्षण और शहरी नियोजन को अनुशासित बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

समाचार 06 फ़ोटो 06

पीड़िता से बलात्कार व अश्लील फोटो वायरल करने वाले आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार

अनूपपुर

जिले के थाना बिजुरी में नाबालिक पीड़िता ने आकर लिखित शिकायत दर्ज कराई कि आरोपी द्वारा करीब 2 वर्ष पूर्व उसे शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया गया था तथा बिना उसकी जानकारी के उसकी अश्लील फोटो खींचा था, जिसे दिखाकर उसके साथ कई बार ब्लैकमेल कर बलात्कार किया, जब पीड़िता के द्वारा आरोपी के साथ अवैध संबंध बनाने से मना किया गया तो आरोपी द्वारा पीड़िता की अश्लील फोटो इंस्टाग्राम सोशल मीडिया में वायरल कर दी गई, जिस पर थाना बिजुरी में अपराध क्रमांक 240/25 धारा 376 376 (2n), 376(3),450 आईपीसी 5i,6 पोक्सो एक्ट 67 आईटी एक्ट में मामला पंजीबद्ध किया जाकर विवेचना में लिया गया।

नाबालिक के साथ गंभीर घटना घटित होने की सूचना से तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया जो पुलिस महोदय अनूपपुर मोती उर्र रहमान के द्वारा तत्काल टीम बनाकर आरोपी की पता तलाश हेतु आदेशित किया गया जिसके अनुपालन में बिजुरी पुलिस द्वारा घटना की सूचना प्राप्त होने के 12 घंटे के अंदर आरोपी सागर कुशवाहा को गिरफ्तार किया गया है, घटना में प्रयुक्त मोबाइल फ़ोन आरोपी से बरामद किया गया है, गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा रहा है मामले की विवेचना जारी है।

समाचार

पवित्र नगरी में गुंडागर्दी, पर्यटकों के साथ लात, घूंसों से जमकर की मारपीट, कानून व्यवस्था पर सवाल

अनूपपुर

अमरकंटक, देश-विदेश से प्रतिदिन आने वाले तीर्थ-यात्रियों और पर्यटकों की अतिथि-परंपरा के लिए प्रसिद्ध रहा है, लेकिन सावन में एक घटित एक घटना ने इस छवि पर प्रश्न-चिन्ह लगा दिया। छत्तीसगढ़ से आए श्रद्धालुओं के साथ मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला-प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लिया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर परिषद अमरकंटक के 2 शासकीय कर्मचारी आनंद चौधरी, और शैलेन्द्र तिवारी व नगर परिषद अमरकंटक के पाले हुए गुंडे आंनद माझी, छोटा वर्मन व अन्य लोगो के साथ अमरकंटक दर्शन करने आए श्रद्धालु को लात, घूसों से कपिल धारा तिराहा मे जमकर मारपीट किए, पीड़ित की बहन दया की भीख मांगती रही, लेकिन मारपीट करने वाले एक भी नही सुने, इनके कारनामें से पूरा अमरकंटक शर्मसार हैँ। अमरकंटक में इस तरह की घटना हमेशा होती रहती है, पुलिस हाथ मे हाथ धरकर बैठी और गुंडे मवाली लोग अपना काम बखूबी निभा रहे हैं।

जिला पुलिस कप्तान ने अमरकंटक थाना प्रभारी को निर्देश दिया है कि दोषियों की पहचान कर शीघ्र गिरफ्तार किया जाए। घटना-स्थल के CCTV फुटेज तथा वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जाँच के आदेश दिए गए हैं। क्षेत्र में शांति-व्यवस्था बनाए रखने हेतु अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और गश्त बढ़ाई गई है।

अमरकंटक के समाजसेवी संगठनों और व्यापार-मंडलों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि अमरकंटक की पहचान अतिथि-देवो भवः की संस्कृति से है। यदि ऐसे असामाजिक तत्वों पर रोक नहीं लगी तो धार्मिक पर्यटन को गहरी चोट पहुँच सकती है। स्थानीय लोगों ने आरोपितों पर कड़ी धारा लगाने और भविष्य में ऐसी घटनाएँ न दोहराने के लिए स्थायी पुलिस-चौकी एवं हेल्प-लाइन जैसी व्यवस्थाएँ माँगी हैं।

बीते एक वर्ष में तीन से अधिक घटनाएँ रिपोर्ट हुई हैं, जिनमें बाहर से आए पर्यटकों के साथ बदसलूकी या वसूली की शिकायतें दर्ज हुई थीं। लगातार घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि कुछ संगठित गिरोह या स्थानीय बदमाश पर्यटकों को निशाना बना रहे हैं। शिकायतें दर्ज होने के बावजूद अभियोजन और सज़ा की दर कम रहने से अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।

त्वरित न्याय सुनिश्चित करते हुए फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मामला चलाया जाए। पर्यटन-स्थलों पर समर्पित पुलिस सहायता केंद्र और हेल्प-डेस्क स्थापित हों। होटल-धर्मशालाओं एवं टूर-ऑपरेटरों को अनिवार्य आई-कार्ड सत्यापन की व्यवस्था लागू करनी चाहिए। स्थानीय युवाओं को पर्यटक मित्र कार्यक्रम से जोड़कर रोज़गार व जागरूकता दोनों को बढ़ावा दिया जाए।

समाचार 08 फ़ोटो 08

नशे में वाहन चलाने पर 31 प्रकरण दर्ज, 3.25 लाख का जुर्माना

अनूपपुर

पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान के निर्देशन में हाईवे चौकी अनूपपुर द्वारा 07 जुलाई 2025 से 06 अगस्त 2025 तक विशेष अभियान चलाया गया, जिसके तहत शराब पीकर वाहन चलाने वाले 31 चालकों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्यवाही की गई। सभी प्रकरणों में चालकों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां 3, लाख 25 हजार रुपये का जुर्माना आरोपित किया गया है। साथ ही सभी दोषी चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस को निलंबित करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। यह कार्यवाही सड़क सुरक्षा के प्रति पुलिस विभाग की गंभीरता को दर्शाती है। हाईवे चौकी टीम द्वारा लगातार निगरानी और चेकिंग की जा रही है, जिससे यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। अनूपपुर पुलिस की नागरिकों से अपील की है कि वे नशा कर वाहन न चलाएं, स्वयं और दूसरों की जान की कीमत समझें, और यातायात नियमों का ईमानदारी से पालन करें।


आईजीएनटीयू में पीएचडी प्रवेश घोटाले पर हाईकोर्ट गंभीर, अगली सुनवाई में मंगाई गई संदिग्ध प्रवेशार्थियों की सूची

*पीड़ित छात्रों ने सीबीआई जांच की मांग की*


अनूपपुर

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक (म.प्र.) में पीएच.डी. शोध प्रवेश परीक्षा (आरईटी) 2024-25 को लेकर गंभीर गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के आरोपों पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में रिट पिटीशन लगाई गई है, याचिकाकर्ता रवि त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका पर 1 अगस्त को सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता ने अदालत से समय की मांग करते हुए बताया कि उन चयनित संदिग्ध अभ्यर्थियों के नाम और पते मांगे हैं जिन्हें प्रतिवादी बनाया जाना जरूरी है, यह भी बताया गया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन छात्रों के मौलिक अधिकारों का हनन करने पर आमादा है। उच्च न्यायालय ने मामले की आगामी सुनवाई अगस्त के अंतिम सप्ताह में रखी है, जिससे यह संकेत मिलता है कि न्यायालय भी इस मामले को गंभीरता से ले रहा है।

सीबीआई जांच की मांग, छात्रों ने लगाए दर्जनों ठोस आरोप

याचिकाकर्ता रवि त्रिपाठी, जो कि विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र एवं आरईटी 2024-25 के परीक्षार्थी हैं, ने केंद्र सरकार को भेजे प्रार्थना पत्र में प्रवेश प्रक्रिया में सुनियोजित गड़बड़ियों और संगठित शैक्षणिक भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है और इसके समर्थन में आरटीआई के जवाब, विश्वविद्यालय की वेबसाइट के स्क्रीनशॉट्स, अधिसूचनाएं एवं अन्य कई दस्तावेज संलग्न किए हैं।

*दागियों को ही जरुरी प्रभारों का प्रसाद क्यों*

पूर्व में पीएचडी प्रवेश परीक्षा के मामले में वर्तमान आरईटी समन्वयक प्रो. भूमि नाथ त्रिपाठी पर गंभीर आरोप लग चुके थें, प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत भी की गई थी, इसके बाद इस वर्ष भी इन्हें ही आरईटी की जिम्मेदारी कैसे दे दी गई? यह भी जांच का विषय है, हालांकि जांच के विषय तो इन्हें आईजीएनटीयू मे दिए गए नियुक्ति (पुलिस वेरिफिकेशन आदि) एवं पदोन्नति, या प्रभार वितरण संबंधी दस्तावेज भी हैं।

*प्रो. गौरी शंकर और तरुण ठाकुर भी जांच के राडार मे*

उक्त आरईटी परीक्षा से संबंधित  200 से अधिक शिकायतें ईमेल आदि से आई हैं, जिसमे से दो दर्जन से अधिक शिकायतें प्रधानमंत्री कार्यालय में भी दी गई हैं, इसके बाद प्रो. गौरी शंकर महापात्रा और प्रो. तरुण ठाकुर जैसे संदिग्धों को पीएमओ में की गई शिकायत का नोडल अधिकारी नियुक्त कर के मनगढ़ंत रिपोर्ट लिखी जा रही है। इन दोनों के संबंध में चर्चा है कि इन दोनों प्रोफेसर ने अपने कई खासमखासों को पीएचडी में बैक डोर से इंट्री दिलाए हैं! ऐसे में कैसे होगी निष्पक्ष जांच?

*यह लगे आरोप*

आरईटी समन्वयक ने प्रश्नपत्र निजी ईमेल से मंगवाए, जिससे प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका बढ़ती है। मुख्य परिसर में जारी परिणामों में नाम नहीं दिए गए जबकि मणिपुर परिसर के लिए जारी परिणाम में छात्रों के नाम स्पष्ट हैं। विश्वविद्यालय मुख्य परिसर के परिणाम में नाम इसलिए नहीं दिए गए कि उसमे दर्जनों नॉन टीचिंग स्टाफ, कई प्रोफेसर्स की पत्नियां, परिजन, रिस्तेदार आदि हैं। कुछ उम्मीदवारों को कम अंक होने के बावजूद इंटरव्यू में बुलाकर बैकडोर से इंट्री दी गई। कंप्यूटर साइंस जैसे विभागों में परिणाम वेबसाइट पर प्रकाशित न कर गुप्त रूप से निजी ईमेल से प्रवेश की सूचना दी गई। जिसमें एक गेट क्वालिफाई डीआरडीओ के डिप्टी डायरेक्टर रैंक के अधिकारी जो कि इंटरव्यू में भी टाॅप किया था उसका नाम फाइनल लिस्ट से हटा कर उसकी जगह विश्वविद्यालय परिसर में किराना दुकान संचालक का नाम लिखा गया।

50 से अधिक नॉन-टीचिंग स्टाफ एवं फैकल्टी परिजनों को संदिग्ध डिग्रियों के आधार पर प्रवेश दिया गया। कई तो ऐसे हैं जो ओपन बोर्ड से जैसे-तैसे पीजी किएं या डिग्री काॅलेमे भी लटकते हुए पोस्ट ग्रेजुएशन किएं और आईजीएनटीयू की आरईटी में बाकायदा टाॅप हो गएं आखिर कैसे? ओएमआर शीट घरों में भरने जैसी शिकायतें भी सामने आईं।

छात्रों से शुल्क तो लिया गया लेकिन न रिचेकिंग की गई, न ही रिपोर्ट दी गई। आरटीआई आवेदन के बाद गोपनीयता का हवाला देकर उत्तर देने से मना कर दिया गया। कई यूजीसी-नेट और गेट क्वालिफाई योग्य छात्रों को बाहर कर अपात्रों को चयनित किया गया। स्कोर वैधता का बहाना बनाकर अयोग्य घोषित किया गया। डीआरडीओ जैसे संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी को बाहर कर अयोग्य व्यक्तियों को प्रवेश दिया गया।बिना हस्ताक्षर की अधिसूचनाएं और नियमों में मनमाना बदलाव वेबसाइट पर अपलोड किए गए। प्रो. तरुण ठाकुर, प्रो.भूमिनाथ त्रिपाठी द्वारा लॉबी द्वारा प्रवेश प्रक्रिया पर एकाधिकार चलाया गया; छात्रसंघ की अनुपस्थिति में यह और भी बढ़ गया।

अम्बेडकर चेयर और पर्चेज कमेटी द्वारा करोड़ों के फंड में गड़बड़ी, फर्जी उपस्थिति और ऑडिट में अनियमितताएं दर्ज की गईं। कथित आरईटी फर्जीवाड़े की केन्द्रीय समिति से निष्पक्ष जांच की मांग करने‌ वाले, छात्रों के खिलाफ फर्जी आंतरिक जांच और पुलिसिया  एफआईआर द्वारा प्रताड़ित किए जाने की कूट रचना करते हुए, कुत्सित प्रयास किया गया। हालांकि छात्रों से उक्त फर्जी शिकायतों की आशंका जताते हुए पहले ही पुलिस महानिदेशक मप्र. को एक विस्तृत पत्र भेज दिया था, जिससे आरईटी फर्जीवाड़ा के बचाव में विश्वविद्यालय से फर्जी शिकायत करवाने वालों पर उनका यह दाव भी उल्टा पड़ गया। आरोप है कि न तो जी.एफ.आर. 2017 के अंतर्गत किसी प्रकार का टेंडर जारी किया गया और न ही ई.ओ.आई. आमंत्रित की गई, जिससे परीक्षा आयोजन में पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रश्नपत्र निजी ईमेल से एकत्र किए गए और बिना सील या यूनिक कोड वाले प्रश्नपत्र वितरित किए गए, जिससे गोपनीयता भंग हुई। ओएमआर शीट में हेराफेरी की आशंका भी जताई गई है। परिणामों में अपारदर्शिता स्पष्ट है—मुख्य परिसर में नाम छिपाए गए जबकि मणिपुर परिसर में नाम सार्वजनिक हैं। कुछ विषयों के परिणाम निजी तौर पर भेजे गए और चयन की प्रक्रिया संदिग्ध रही। एक ही परीक्षा के परिणाम तीन अलग-अलग तरीकों से कैसे जारी की जा सकती है।

पीड़ित छात्रों ने अपने पत्रों में यह भी उल्लेख किया है कि यह मामला केवल आईजीएनटीयू तक सीमित नहीं है, बल्कि यह केंद्रीय विश्वविद्यालयों की पारदर्शिता और शैक्षणिक ईमानदारी पर गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष सीबीआई जांच शीघ्र शुरू नहीं होती है, तो अन्य पीड़ित छात्र आंदोलन को मजबूर होंगे।

MKRdezign

,

संपर्क फ़ॉर्म

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget