प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने अन्नपूर्णा वर्मा को दिया हिंदी सेवी सम्मान


जबलपुर

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के संपादक कवि संगम त्रिपाठी के निर्देशन में संस्था की संरक्षक वरिष्ठ कवयित्री समाजसेविका राजकुमारी रैकवार राज ने अन्नपूर्णा वर्मा भोपाल को जबलपुर संस्कारधानी प्रवास पर हिंदी सेवी सम्मान प्रदान कर सम्मानित किया।

कवि संगम त्रिपाठी ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि राजकुमारी रैकवार राज हिंदी प्रचार प्रसार में सतत प्रेरणादायक कार्य कर रही है व विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी के प्रति कार्य कर रहे लोगों को प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा में शामिल करने का काम कर रही है। राजकुमारी रैकवार राज विभिन्न सामाजिक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रही है पर उनकी हिंदी के प्रचार-प्रसार व राष्ट्रभाषा बनाने हेतु  जारी अभियान प्रेरणादायक है।

स्वास्थ्य विभाग को दान मे नहीं मिली जिप्सी पर सीएमएचओ ने जारी किया बयान


उमरिया

बीते कुछ दिनो से स्वास्थ्य विभाग की जिप्सी गायब होने और वह जिप्सी बांधवगढ़ में देखी जा रही हैं कि खबरों पर अब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने अपना बयान जारी किया है। उन्होने साफ तौर पर बताया कि स्वास्थ्य विभाग को कोई भी जिप्सी दान मे नही प्राप्त हुई है। विभाग को एकमात्र शासकीय जिप्सी क्रमांक एमपी 02-1076 प्राप्त हुई थी, जो आज भी बंद हालत मे उपलब्ध है। जबकि जिप्सी क्रमांक एमपी 54 जेडए 3935 स्वास्थ्य विभाग मे कभी उपलब्ध नही थी। वहीं जिप्सी क्रमांक एमपी 54 जेडए 3935 के संबंध मे जिला परिवहन अधिकारी का कहना है कि उक्त वाहन आशीष सोलंकी पिता गणेशबाल सोलंकी के नाम पर गोधरा पंचमहल मे पंजीकृत था। जिसका पूर्व मे नंबर सीजे 01 जी 5085 था। संबंधित परिवहन अधिकारी की ओर से एनओसी क्रमांक सीजे 2022/एनओसी/1696बी 1512 बी दिनांक 15.12.2022 प्राप्त होने के उपरांत जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय मे आवेदन, टैक्स तथा फीस जमा की गई। जिस पर उपरोक्त वाहन उमेश यादव पिता जोला यादव ग्राम धमोखर जिला उमरिया के नाम अंतरण कर नवीन वाहन नंबर एमपी 54 जेडए 3935 जारी किया गया था।

स्वास्थ्य विभाग के खजाने पर डाका, धांधली को छिपाने निजी बिल्डिंग मे खोला दिया विभाग का स्टोर   

*चहेते सप्लायरों से की खरीदी,घोटालों के बावजूद दिया प्रभार*


उमरिया   

जिले के स्वास्थ्य विभाग मे धांधली के नये कीर्तिमान निरंतर स्थापित किये जा रहे हैं। बताया गया है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने मार्च मे खजाना खाली कर पैसे की बंदरबांट के लिये बड़े पैमाने पर सामान की खरीदी की गई है। इसकी जानकारी किसी को न हो, इसके लिये सीएमएचओ साहब ने हाईवे पर स्थित एक निजी बिल्डिंग मे बाकायदा विभाग का स्टोर खोल लिया है। जिसमे पूरा माल रखा जाता है। यहीं से सामग्री जिले के विभिन्न सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तक पहुंचाई जा रही है। जानकारी लेने पर पता चला कि यह भवन कहने के लिये तो विभागीय गतिविधियों के लिये किराये पर लिया गया है, पर इसका असली मकसद सप्लाई की सामग्री रखने और उसका वारा-न्यारा करने मे किया जाता है।

*चहेते सप्लायरों से की खरीदी*

सूत्रों के मुताबिक सीएमएचओ द्वारा अपने चहेते सप्लायरों से लाखों रूपये के रैक, अलमारी तथा अन्य प्रकार के फर्नीचर की खरीदी कराई गई है। पूरी खरीदी भण्डार नियमों का उल्लंघन और बिना निविदा प्रक्रिया का पालन किये हुई है। बताया गया है कि घटिया क्वालिटी का यह फर्नीचर बाजारू मूल्य से कई गुना अधिक दरों पर क्रय किया गया है। आवंटित राशि को मार्च मे ही ठिकाने लगाने की नियत से आनन-फानन मे माल ट्रकों द्वारा ग्रामीण अंचलों मे संचालित स्वास्थ्य केन्द्रों को रवाना किया जा रहा है।

*घोटाले को दिया जा रहा अंजाम*

एक ओर जहां जिले मे गरीबों और मरीजों को अस्पतालों मे दवा और इलाज नहीं मिल पा रहा है। डायलिसिस तथा एक्सरे मशीने उपकरणों के आभाव मे धूल खा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ विभाग मे करोड़ों रूपये का अनुपयोगी सामान खरीद कर व्यवस्था का मजाक उड़ाया जा रहा है। बताया गया है कि सीएमएचओ के अलावा जिला लेखा प्रबंधक नरेन्द्र मिश्रा, लेखापाल संतोष शुक्ला शामिल हैं। जिनके द्वारा घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है।

*घोटालों के बावजूद दिया प्रभार*

बताया गया है कि लेखापाल संतोष शुक्ला पर इससे पहले भी भ्रष्टचार के कई गंभीर आरोप लग चुके हैं। जिनकी जांच दबा दी गई है। वहीं जिला लेखा प्रबंधक नरेन्द्र मिश्रा पर तो पाली मे बीएमओ जैन के सांथ मिल कर की गई गड़बड़ी का मामला एफआईआर की कगार पर है। इन्ही धांधलियों की वजह से तत्कालीन कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने उन्हे वित्तीय पॉवर देने पर रोक लगा दी गई थी। यह भी पता चला है कि मिशन संचालक ने भी इस संबंध मे विशेष दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं, जिसके अनुसार इस पद का प्रभार जिला चिकित्सालय के लेखापाल को मिलना चाहिये, परंतु सीएमएचओ के सांथ तगड़ी पार्टनरशिप होने के चलते वरिष्ठ अधिकारियों का आदेश हवा मे उड़ाया जा रहा है।

*इनका कहना हैं*

भण्डार नियमो के पालन, वित्तीय गड़बड़ी तथा नियम विरूद्ध प्रभार दिये जाने सहित सभी आरोपों की जांच उपरांत किसी भी तरह की अनियमितता पाये जाने पर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।

*धरणेन्द्र कुमार जैन, कलेक्टर, उमरिया*

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