गोबरी के जंगल मे ठहरा हाथी, एक मकान के साथ किसानों की फसलों को बनाया आहार


अनूपपुर

हाथी विगत 8 दिनों से अनूपपुर जिले में प्रवेश कर अनूपपुर तथा जैतहरी तहसील,थाना एवं वन परिक्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण अंचलों से लगे जंगलो में दिन में विश्राम करने बाद देर रात होते ही ग्रामीणो के घरों,खेत,बांड़ी में आहार की तलाश करते हुए तोड़फोड़ कर नुकसान कर रहा है विगत रात पगना,ठेगरहा में विचरण करने के बाद गुरुवार की सुबह गोबरी के जंगल में यह हाथी पहुंचकर विश्राम कर रहा है।

सुबह एक दांत वाला यह नर हाथी वन परिक्षेत्र जैतहरी के गोबरी बीट के जंगल के साथ वन परिक्षेत्र अनूपपुर के दुधमनिया बीट के पगना गांव से लगे जंगल शक्तिकुंडी के पास पूरे दिन जगह बदल-बदल कर विचरण कर रहा था देर शाम वन विभाग के श्रमिकों द्वारा काम करने के दौरान इस हाथी को विचरण करते देखा इसके बाद से निरंतर देर रात तक खोजबीन के बाद भी हाथी के विचरण की जानकारी नहीं मिली तभी अचानक ग्राम पंचायत पगना के ग्राम पगना के बरटोला में संजय सिंह के घर के पास खेत में लगी गेहूं की फसल को घंटो तक खाते हुए यह पगना,ठेगरह,गोबरी मुख्य मार्ग पर चलता हुआ गुरुवार की सुबह ग्राम पंचायत गोबरी के ठेंगहहा गांव में कुन्ना कोल के घर के पास से होकर पंचम सिंह के घर में अचानक हमला बोलते हुए तोड़फोड़ कर घर के अंदर रखी सामग्री को खाते हुए बर्तन इत्यादि को भी नुकसान पहुंचा कर गोबरी के जंगल में विश्राम करने पहुंच गया,देर रात तक अनूपपुर एवं जैतहरी वन परीक्षेत्र के गश्ती दल में लगे अधिकारी/कर्मचारी हाथी के विचरण पर नजर रखते हुए ग्रामीणों को सचेत एवं सतर्क करते रहे हैं।

जिला अस्पताल में मरीजों की दयनीय स्थिति, पानी और शौचालय की भारी किल्लत, प्रशासन बेखबर


अनूपपुर

जिला अस्पताल के प्रबंधन की लापरवाही के चलते मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए त्राहि-त्राहि करनी पड़ रही है। बुधवार और गुरुवार को भर्ती मरीजों को न तो शौच के लिए पानी मिला और न ही पीने का पानी उपलब्ध कराया गया। हालत यह है कि मरीजों के परिजनों को बाहर से पानी खरीदकर लाना पड़ा, तब जाकर उनकी जरूरतें पूरी हो सकीं।  

*सिविल सर्जन भी नहीं उठातीं फोन*

मरीजों ने बताया कि सिविल सर्जन डॉ. सत्या भारती तक उनकी शिकायतें पहुँचाने का कोई रास्ता नहीं है, क्योंकि वह उनके फोन भी नहीं उठाती हैं। इस वजह से अस्पताल में भर्ती लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।  

एक ही शौचालय पर भीड़, महिलाओं को झेलनी पड़ रही है, जिला अस्पताल में शौचालयों की हालत भी बेहद खराब है। पुरुष वार्ड के अधिकांश शौचालय बंद पड़े हैं, जिसकी वजह से मरीजों और उनके परिजनों को केवल एक ही शौचालय का इस्तेमाल करना पड़ता है। इसके चलते सुबह 4 बजे से लेकर 10 बजे तक महिलाओं और पुरुषों को लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ता है। मरीजों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।  

*प्रशासन की सुस्ती बनी हुई है चुनौती*

स्थानीय नागरिकों और मरीजों ने प्रशासन से मांग की है कि जिला अस्पताल में पानी की आपूर्ति और शौचालयों की मरम्मत की व्यवस्था तुरंत की जाए। साथ ही, सिविल सर्जन को मरीजों की समस्याओं को सुनने और उनका निवारण करने के लिए गंभीरता दिखानी चाहिए।  इस मामले में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मरीजों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

मिट्टी से पट रही पीडब्लूडी की सड़क की पटरी, अधिकारी मना करने के बाद भी नहीं माना ठेकेदार


उमरिया

शहर की सड़कें चुस्त और दुरुस्त हों इसके लिए लोक निर्माण विभाग ने टेंडर कर सड़क बनाने की स्वीकृति दी, यह सड़क उमरार नदी से लेकर जमुनिया पहुंच मार्ग पर बननी थी। करीब 2 माह के समय में पूरी सड़क बना डाली गई और अब सड़क की पटरी भरने का काम शुरु हुआ, जब ठेकेदार ने मिट्टी डालना शुरु किया तो निरीक्षण में आये लोक निर्माण विभाग के एसडीओ ने मिट्टी डालने से मना कर दिया और साफ साफ शब्दों में कहा कि जो नियम में है वह कार्य होना चाहिए, मिट्टी की जगह मुरुम डाला जाये। लेकिन रात के अंधेरे में बीती रात ठेकेदार ने मुरुम की जगह पर मिट्टी डालना शुरू कर दिया है, दर्जनों ट्रेक्टर ट्राली के माध्यम से मिट्टी डलवाई गई। बताया जाता है कि बड़ेरी और महिमार के समीप जेसीबी मशीन लगाकर अवैध मिट्टी का खनन किया जाकर उससे ठेकेदार सड़क की पटरी भरने में लगे हुए हैं। अगर यही हाल रहा तो भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने की लिए लोक निर्माण विभाग के अधिकारी कृत संकल्पित यह प्रण टूट जायेगा और अच्छी सड़क बनाने में अग्रणी विभाग की छवि धूमिल हो जायेगी।

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