धनगवां से गोबरी जंगल पहुंचा एक हाथी,रात में तोड़े पांच मकान, दूसरे ने घुसरिया में दो दिन से जमाया डेरा


अनूपपुर

एक दांत वाला नर हाथी विगत कई दिनों से क्षेत्र के इलाके में विचरण कर रहा है जो रविवार एवं सोमवार की रात पांच मकानो को तोड़कर अनाज खाते हुए, सोमवार की सुबह गोबरी के जंगल में पहुंचकर विश्राम कर रहा है वही उसका दूसरा साथी मरवाही के घुसरिया के जंगल में आज दूसरे दिन ठहरा हुआ है।

विदित है कि एक अकेला दांत वाला नर हाथी 20 मार्च की रात छत्तीसगढ़ राज्य के मरवाही क्षेत्र की सीमा को पार करते हुए, अनूपपुर जिले के जैतहरी इलाके में पहुंचकर पांचवें दिन रविवार एवं सोमवार की मध्य रात्रि धनगवां के जंगल से निकल कर कुसुमहाई के झंडीटोला निवासी रामरति सिंह,बाल सिंह के मकान में तोड़फोड़ करते हुए, टकहुली गांव पहुंचकर पतिलाल भैना व मंगल चौधरी,हीरालाल चौधरी के घरों में तोड़फोड़ कर घरों के अंदर रखें विभिन्न तरह की सामग्रियों को अपना आहार बनाया, इस बीच कई ग्रामों के ग्रामीणों द्वारा इलाके में आए हाथी को खदेड़ते हुए पचौहा के जंगल की ओर ले गए जहां से यह हाथी देर रात लहरपुर से जैतहरी नगर के पुराने बस स्टैंड के पास से रेलवे लाइन को पार कर बंजारीटोला होते हुए नगर परिषद जैतहरी के वार्ड क्रमांक 15 गोबरी रोड में स्थित एक मोहल्ले में विचरण करता हुआ की तिपान नदी को पार कर ग्राम पंचायत एवं बीट गोबरी के जंगल में सोमवार की सुबह पहुंचकर विश्राम कर रहा है, यह देर रात किस ओर जाएगा रात होने पर ही पता चल सकेगा वहीं इसका दूसरा हाथी साथी मरवाही वन परिक्षेत्र के घुसरिया के जंगल 2051 में सोमवार को दूसरे दिन ठहरा हुआ है।

नेताओ, जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के मुँह में तमाचा मारती फ्लाईओवर ब्रिज, एक महाकाव्य निर्माण

*ठेकेदार के ठेकेदारी का बेजोड़ नमूना,  विश्व रिकॉर्ड में शामिल होना चाहिए*


अनूपपुर

जिला मुख्यालय में 8 वर्षो से बन रहा रेलवे फ्लाईओवर ब्रिज नेताओ, जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के मुँह में तमाचा मारती हुई दिखाई दे रही है। पार्टी, नेता, जनप्रतिनिधि, अधिकारी सभी अपनी अपनी रोटी सेंकने में लगे हैं, जनता की पीड़ा का कोई अहसास नही है। ठेकेदार को फ्लाई ओवर ब्रिज बनाने के लिए राष्ट्रीय अवॉर्ड से सम्मानित किया जाना चाहिए। ऐसा पुल दुबारा कही भी देखने को नही मिलेगा।

अनूपपुर जिले का रेलवे फ्लाईओवर ब्रिज अब कोई आम पुल नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐतिहासिक धरोहर बनता जा रहा है। यह पुल नहीं, बल्कि अधूरे सपनों का स्मारक है, जो नौ वर्षों से जनता को आश्वासनों के पुल से गुजार रहा है। इसे बनाने का काम 2016 में घोषित हुआ था, लेकिन तब से लेकर अब तक इसकी हालत देखकर ऐसा लगता है कि इसे बनाने का ठेका कछुओं की फैक्ट्री को दिया गया है, जो अपनी धीमी चाल से इसे ऐतिहासिक बना रहे हैं।पांच बार भूमि पूजन हो चुका है। पाँच बार! यानी अगर फ्लाईओवर न बनता, तो भी वहाँ भूमि पूजन का रिकॉर्ड कायम हो जाता। हर बार नए नेता आते हैं, नारियल फोड़ते हैं, फीता काटते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और फिर आश्वासन की चादर ओढ़ाकर चलते बनते हैं। यह ब्रिज नहीं, बल्कि "राजनीतिक पर्यटन स्थल" बन चुका है, जहाँ नेता आते हैं, झूठे वादों की माला चढ़ाते हैं, और जनता को आश्वासन रूपी ‘प्रसाद’ देकर चले जाते हैं।इस ब्रिज के दोनों ओर महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान हैं, लेकिन जनता को 6 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। प्रशासन इसे समस्या नहीं, बल्कि एक सरकारी ‘फिटनेस प्रोग्राम’ मान चुका है। पुल नहीं बना? कोई बात नहीं! जनता को मुफ्त में रोज़ 6 किलोमीटर दौड़ने का अवसर मिल रहा है। इससे स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा और सरकार की फिटनेस योजना भी सफल कहलाएगी!इस ब्रिज के निर्माण की गति देखकर ऐसा लगता है जैसे इसे भारतीय रेलवे की सबसे धीमी ट्रेन से भी धीमे बनाया जा रहा हो। मजदूरों को शायद ठेकेदार ने कह रखा है, जल्दी मत करना, वरना सरकार को नया बहाना ढूंढना पड़ेगा!आखिर यह ठेका देने की परंपरा जो बनी रहनी चाहिए।अब तो इस ब्रिज के जल्दी बनने की उम्मीद छोड़ दीजिए। यह एक धार्मिक स्थल बनता जा रहा है। जनता रोज़ प्रार्थना करती है कि "हे भगवान, इस अधूरे ब्रिज को पूरा करा दो!" अगर ऐसे ही चलता रहा, तो जल्द ही वहाँ "फ्लाईओवर माता मंदिर" की स्थापना हो जाएगी और नेता हर चुनाव में वहाँ मत्था टेकने आया करेंगे।

जनता को एक सुझाव दिया जा सकता है कि इस ब्रिज को अधूरा ही रहने दिया जाए और इसे विश्व का सबसे धीमी गति से बनने वाला पुल घोषित कर दिया जाए। इससे पर्यटन बढ़ेगा, लोग दूर-दूर से इसे देखने आएंगे और सरकार को इससे भी कुछ कमाई हो जाएगी। अगली बार चुनावी घोषणा पत्र में यह वादा किया जाना चाहिए, कि अगर हमारी सरकार आई, तो इस पुल को कभी पूरा नहीं होने देंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इसे देखकर प्रशासनिक लापरवाही की सीख ले सकें।

 ट्रेन से युवक गिरकर हुआ घायल


उमरिया

शहड़ोल जिले के बुढ़ार के नवगई गाँव निवासी घनश्याम सिंह (30 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। वे पूरी-वलसाड़ ट्रेन से रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य जा रहे थे, लेकिन रास्ते में घुनघुटी और मुदरिया स्टेशन के बीच अचानक ट्रेन से गिर गए। हादसे के बाद, रेलवे ट्रैक पर काम कर रहे एक गैंगमैन ने घायल अवस्था में पड़े युवक को देखा और तत्काल अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद 108 एंबुलेंस सेवा की मदद से घनश्याम को पाली अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर चिकित्सा के लिए उमरिया जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

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