शरारती तत्वों ने मंदिर में घुसकर खुलेआम की थी मारपीट, निर्दोष पंडित पर हुई एफआईआर

मंत्री जी के क्षेत्र में निर्दोष पर कार्यवाही, क्या राजनैतिक दबाब में काम कर रही हैं पुलिस? कौन है परदे के पीछे?


अनुपपुर

जिले के बिजुरी पुलिस थाना क्षेत्र कस्बे में होली के दिन दोपहर को लगभग 3.15 बजे कानून व्यवस्था को धता बताते हुए तीन शरारती तत्वों ने वार्ड नंबर 9 रेलवे फाटक रोड़ स्थित चाय दुकान संचालक दीपक शुक्ला के साथ खुलेआम मारपीट करते हुए गुंडागर्दी की घटना को अंजाम दिया। पूरी वारदात सीसीटीवी मे रिकार्ड हो गयी उसके बावजूद भी सत्ता के रसूखदारों के दबाव में आकर बिजुरी पुलिस चमचे की तरह चलायमान करते हुए एक निर्दोष पंडित दीपक शुक्ला के विरुद्ध मनगढ़ंत तरीके से मामला पंजीबद्ध कर लिया, शायद जिले के पुलिस को यह मालूम नहीं की जिले में अगर जनता है, तब पुलिस है इसी तरह सत्ता का वह राजनीतिक नेता जो आज अपने कल को भूल रहे है, उसे यह मालूम नहीं की जो गलत की ओर हम सहारा बनकर खड़े हो रहे हैं, वह गलत और वे लोग ना कल हमारे काम आए हैं और ना आएंगे ।  

आखिर ऐसे क्या बीती की पुलिस सही का मार्ग बदलकर गलत रूप से दवाब में आकर फर्जी मुकदमा बनाने के लिए मजबूर हुई, जिसका जवाब आने वाले दिन में पुलिस अधीक्षक मोतिउर रहमान साहब को सार्वजनिक रूप से देना होगा।

बता दें कि फरियादी पीड़ित दीपक शुक्ला द्वारा थाना बिजुरी में दी गयी शिकायत में बताया है कि प्लान बनाकर तीन लड़कों ने मेरे साथ गाली गलौज और मारपीट की। जिससे शरीर के कई हिस्से में गंभीर चोटे आई है। पीड़ित ने बताया कि मुझे पुलिस और कुछ पत्रकार शांत रहने को कह रहे हैं, आशंका है कि प्रभावशाली राजनैतिक दबाव के कारण पुलिस कार्यवाही में विलंब कर रही है। जबकि पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है। फरियादी ने बताया कि वह अपनी चाय दुकान के पास स्थित शंकर मंदिर से पूजा करके बाहर निकल रहा था। इतने में ही अचानक से मंदिर के मुख्य द्वार में ही रुक्मणि प्रजापति,प्रकाश प्रजापति,असफाक अंसारी भद्दी,अश्लील, गालियां देते हुए उक्त तीनो ने जमकर मारपीट की।  मारपीट उक्त तीनों लड़कों ने ही किया है लेकिन पुलिस की जांच घटना के 5 घंटे बीत जाने के बाद भी शुरू नहीं की गई है। बिजुरी थाने में पदस्थ एक  पुलिस कर्मचारी फरियादी दीपक शुक्ला को दूरभाष में भय दिखाते हुए कहा कि तुम इस मामले में शांत हो जाओ नहीं तो हरिजन एक्ट लग जाएगा और तुम फस जाओगे। इधर नगर निरीक्षक विकास सिंह ने पत्रकारों  से बातचीत में घटना के संबंध में कहा कि अभी हम किसी को जांच करने के लिए नहीं दिए हैं। दोनों पक्षों की रिपोर्ट ले ली गई है और मेडिकल परीक्षण भी कर दिया गया है। आरोप है कि पुलिस आरोपियों के विरुद्ध कार्यवाही करने की बजाय इसमें लिप्त लोगों का बचाव कर रही हैं और मामले को दबाया जा रहा है। पुलिस कप्तान मोतिउर रहमान लगातार अपराधों को उजागर करने का कार्य कर रहे हैं और बिजुरी पुलिस पीड़ित पर ही दवा बनाकर मामले में पर्दा डालने का प्रयास कर रही है।‌

होली त्यौहार के पूर्व जिला प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाने तमाम एडवाइजरी जारी की थी। अराजक तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करने के लिए तमाम प्लान तैयार किए गए थे। पीड़ित ने का कहा कि मुझे व्यापारिक प्रतिस्पर्धा की वजह से  रुक्मणी प्रजापति के द्वारा पिछले 1 वर्ष से अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। ऐसे में मैं किसी दिन प्रताड़ित होकर आत्महत्या भी कर सकता हूं। इसके जिम्मेदार भी यही लोग होंगे।

उपनिरीक्षक के भरोसे चल रहा थाना, उधारी की कुर्सी पर अधिकारियों का दवाब कायम, हाईवे में अवैध वसूली


अनूपपुर

जिले में जितना भी योग्य तेज तर्रार पुलिस अधिकारी की पदस्थापना हो जाय उस अधिकारी की योग्यता में सवाल उठते ही रहेंगे, कारण यह हैं कि अधिकारी अनूपपुर जिले में खेल खेलने एवं अपना भविष्य तय करने के लिये नियुक्त होते हैं। किसी कदर अपनी नौकरी चलाकर दबे दबाए काम सीखने की खुशी में मस्त रहकर पहले से चल रही परंपरा को हरी झंडी दिखाकर समय पास कर रहे और उन अधिकारियों के प्रशिक्षण का लाभ अन्य कर्मचारियों को मिलता दिखाई देता है। इस समय हाइवे में भी जमकर अवैध वसूली चल रही है, यह वसूली किसके कहने पर हो रही है, पुलिस अधीक्षक को जानकारी है या नही यह किसी को पता नही है। दिन के उजाले में जमकर अवैध वसूली चल रही है।

जैसे जिले के जैतहरी थाना में कुछ लोगों की कृपा दृष्टि से लगभग 2 माह बीतने के बाद भी पुलिस अधीक्षक द्वारा टीआई की पदस्थापना न किये जाने के कारण सब इंस्पेक्टर से काम लिया जा रहा। जनचर्चा यह है कि जैतहरी जैसे संवेदनशील जगह में नगर निरीक्षक का होना अनिवार्य है। जंहा आज 2 माह से सब इंस्पेक्टर के भरोसे थाना चल रहा और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधीक्षक मोती उर्रहमान साहब निरीक्षक पदस्थ नही कर पा रहे। हालांकि उनका भी दोष नही कर तो करें कैसे उधारी की कुर्सी के बहाने बहुत लोगों का पेट पल रहा जिनके कृपादृष्टि के सामने साहब भी मजबूर हैं। जैतहरी में इस समय अवैध धंधों का जमकर बोलबाला है यह सब पुलिस की कृपा दृष्टि से चल रहा है। जैसे-जैसे अवैध धंधों वालो की तरक़्क़ी हो रही है वैसे बाकी लोगो की भी तरक्की देखी जा रही हैं। कहने को तो जैतहरी में जुआं, सट्टा, कबाड़, अवैध शराब का कारोबार पहले से ही चल रहा था, मगर अभी कुछ माह से यह धंधा बड़े स्तर में बढ़ गया हैं। अवैध कारोबारियों द्वारा खुलेआम अवैध कारोबार किया जा रहा है। और प्रशासन मौन हैं।

ग्राम पंचायत दुलादर में खुलेआम अवैध शराब का हो रहा है विक्रय, प्रशासन मौन


शहडोल

गोहपारू थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली दुलादर ग्राम पंचायत में अवैध शराब विक्रय का मामला सामने आया है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से बैगा जनजाति के आदिवासी परिवारों का निवास स्थल है, टोला मोहल्ले में और अलग अलग ठिकानों पर खुलेआम शराब बेची जा रही है। इससे न केवल सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि आदिवासी समुदाय के स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।  

गांव के कई हिस्सों में छोटे-छोटे ठिकाने बनाए गए हैं, जहां शराब की अवैध बिक्री की जा रही है नशेड़ियों के आतंग नशे में धुत रहने से महिलाएं और बच्चे घर से बाहर निकलने से डरते है आदिवासी समुदाय के लोग, जो पहले से ही आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, इस शराब के सेवन के कारण और अधिक गरीब नव युवक छोटे बच्चे नशा करके बीमारियों के चपेट में आ रहे हैं।

कच्ची महुआ शराब की अवैध विक्री एक गंभीर मुद्दा बन गया है दुलादर गांव में विभिन्न इलाकों में खुलेआम शराब बेची जा रही है इस शराब का सेवन करने वाले नशेड़ी गांव में गाली गलौच मारपीट और लड़ाई झगड़े जैसे घटनाएं करते है गांव का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।

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