अवैध रेत का उत्तखनन, परिवहन करके कर रहे हैं अवैध भंडारण, खनिज, पुलिस व राजस्व विभाग मौन
*खुलेआम हो रहा है अवैध कारोबार, क्षेत्र बन गया अपराधियों का गढ़*
अनूपपुर
जिले के बिजुरी, कोतमा भालूमाडा थाना अंतर्गत केवई नदी टोल वे मुक्ति धाम के समीप स्थित कटकोना, बैहाटोला रेत घाटो से रात भर करीब 25,30 की संख्या मे गाड़ियों के काफिले के साथ अपराधिक पृष्ठभूमि के लोग घातक हथियारो से लैस व्यक्तियों के द्वारा बिना नंबर के भारी वाहनों से अवैध खनिज रेत की चोरी कर अवैध उत्खनन, परिवहन,भंडारण बड़े पैमाने पर बरसात के पूर्व किया जा रहा है, फिर बरसात में महंगे दामों में बेचा जाता है, खनिज और पुलिस चाहे तो कोतमा पुलिस अनुविभाग के शहरी, ग्रामीण क्षेत्रों में गली-गली रेत के अवैध भंडारण का भौतिक निरीक्षण कराया जा सकता है।
वही रेत खरीदने और बेचने वालों के पास कोई भी वैध दस्तावेज (टीपी) मौजूद नहीं रहती है, क्योंकि 90% रेत चोरी का रहता है, खबर है कि एक वाहन मलिक एक रात का 3000 से ₹5000 तक सेवा शुल्क जमा कर पूरी रात परिवहन करने की अनुमति दी जाती है, लेकिन इस कार्य मे शामिल अवैध सदस्यो को एंट्री कराना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह पूर्णतः "प्रीपेड, वन टाइम सेवा है" इसकी कोई गारंटी नही है, रेत माफियाओं का मानना है कि एंट्री होने के बाद चाहे कोई भी बड़े से बड़ा अधिकारी हो रेत से लोड वाहन को एक मिनट के लिये भी नहीं रोक सकता, क्योंकि माफियाओं के पास अवैध परमिशन रहता है। शासन को हर वर्ष ये रेत माफिया करोड़ों रुपए का चूना लगा रहे हैं, जबकि हर वर्ष शासन द्वारा ई टेंडर किया जाता है, उसके बावजूद भी रेत माफिया पुलिस और खनिज, राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों से साठगांठ कर रेत का अवैध ठेका चला रहे हैं। हर महीने शासन को कई लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जो राशि शासन के राजस्व अकाउंट में जाना चाहिए वह लोगों की जेब में जा रही है।
जिले के पुलिस कप्तान, कलेक्टर, खनिज के तेज तर्रार अधिकारी चाहे तो नदी के रेतघाट, टोलवे के समीप बैहाटोला मार्ग पर रात्रि 10 बजे से सुबह 8 बजे के बीच अपने अवैध रेत के खेल का नजारा कभी भी देख सकते है। जिले में ऐसा कोई भी सिपाही नहीं है, जो बिहार यूपी की तर्ज पर चल रहे उक्त अवैध कार्य पर लगाम लगा सके, शिकायत करने के बाद भी अधिकारी पूरी तरह ख़ामोश है, चाहे वह पुलिस, खनिज, राजस्व विभाग कोई भी हो, प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। लोग बिहार, उत्तर प्रदेश को पीछे छोड़ दिए, दोनों राज्यों को अनावश्यक बदनाम कर रहे हैं, यहां तो उनसे भी बड़े-बड़े माफिया हैं। प्रशासन के कुछ अधिकारी ही मिलकर उनका पालन पोषण कर रहे हैं। यही वजह है कि फोन करने पर कार्यवाही तो दूर फोन रिसीव नहीं किया जाता, इससे बड़ा प्रमाण और क्या चाहिए, यदि फोन रिसीव भी हो गया तो कहते हैं हमारे विभाग का काम नहीं है, विभाग एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहते हैं, अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं, ऐसी स्थिति में कार्यवाही कौन से राज्य के अधिकारी करेंगे यह प्रशासन ही निश्चित करें, पुलिस अधिनियम में चोरी अपराध नहीं तो और क्या है, ऐसे में तो हर कोई चोरी, अपराध करेगा और पुलिस कहेगी यह अपराध नहीं है, मसलन यह स्पष्ट है कि वैध और अवैध कार्यों की व्याख्या पुलिस ही कर सकती है, यहां का नियम है कि बिना अनुमति के वैध कार्य भी अवैध माना जाएगा, कोतमा जनपद व पुलिस अनुविभाग अंतर्गत संगठित गिरोह के द्वारा अवैध शराब, कबाड़, रेत खनिज का अवैध काला कारोबार धड़ल्ले से बेख़ौफ किया जा रहा है, उसके बाद भी जिम्मेदार विभागीय कुछ अधिकारियो का हाल "गांधी जी के तीन बंदरो से भी बदतर हो गया है।
