जोड़ा तालाब में लाखों का खेल, बरसात से 15 दिन पहले गहरीकरण, परिषद के संसाधनों का इस्तेमाल पर उठ रहे सवाल
*शासकीय राशि का हो रहा दुरुपयोग*
अनूपपुर
नगर परिषद बनगवां-राजनगर एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में है। इस बार मामला जोड़ा तालाब में चल रहे गहरीकरण और कथित सौंदर्यीकरण कार्य का है। चौक-चौराहों से लेकर चाय की दुकानों तक एक ही सवाल गूंज रहा है कि आखिर बरसात शुरू होने से महज 10-15 दिन पहले तालाब में इतनी बड़ी मशीनें और परिषद के संसाधन लगाकर कार्य कराने की ऐसी क्या मजबूरी थी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद के 15 वार्डों में से अधिकांश वार्ड सड़क, नाली, सफाई, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों का पूरा ध्यान लाखों रुपये खर्च कर तालाब में मिट्टी और मलबा निकालने पर केंद्रित है।
लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में तालाब का गहरीकरण या सौंदर्यीकरण कराना था तो यह कार्य गर्मी की शुरुआत में पूरा किया जाना चाहिए था। और यदि समय नहीं मिला तो बरसात के बाद वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से यह कार्य कराया जा सकता था। लेकिन मानसून आने के ठीक पहले जेसीबी और ट्रैक्टर लगाकर मिट्टी निकालना लोगों की समझ से परे है।
जिस जोड़ा तालाब में गहरीकरण का कार्य कराया जा रहा है, उसके नीचे वर्षों से कोयले की अंडरग्राउंड खदान संचालित रही है। खदानों के कारण तालाब का पानी लगातार रिसता रहता है और जलस्तर स्थायी नहीं रह पाता। नगर परिषद के ट्रैक्टर, कर्मचारी और अन्य संसाधन इस कार्य में लगाए गए हैं। जिन ट्रैक्टरों को गर्मी के मौसम में पेयजल आपूर्ति के लिए लगाया जाना चाहिए था, वे तालाब से मलबा ढोने में लगे दिखाई दे रहे हैं। जबकि कई वार्डों में लोग पानी की समस्या से परेशान हैं।
नागरिकों का आरोप है कि जनता के टैक्स के पैसे और शासन के बजट का उपयोग प्राथमिक सुविधाओं पर करने के बजाय ऐसे कार्यों में किया जा रहा है जिनकी उपयोगिता पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
