​भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा वाटरशेड मिशन, रात के अंधेरे में अवैध ब्लास्टिंग से थर्राया गांव, घरों में आई दरारें

​भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा वाटरशेड मिशन, रात के अंधेरे में अवैध ब्लास्टिंग से थर्राया गांव, घरों में आई दरारें

*देवरा का स्टॉप डैम बना ग्रामीणों के लिए 'काल'*


​अनूपपुर

पुष्पराजगढ़ जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम देवरा मझगंवा में इन दिनों 'विकास' के नाम पर मौत का खेल खेला जा रहा है। बमणार नदी पर वाटरशेड मिशन के तहत निर्माणाधीन स्टॉप डैम ग्रामीणों के लिए सुविधा के बजाय दहशत का सबब बन चुका है। भ्रष्टाचार और घोर लापरवाही का आलम यह है कि नियमों को ताक पर रखकर घनी आबादी के बीच रात के सन्नाटे में भारी ब्लास्टिंग की जा रही है, जिससे कभी भी बड़ी जनहानि हो सकती है। निर्माण कार्य में लागत कम करने और समय सीमा की आड़ में सुरक्षा मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि रात के अंधेरे में भारी मात्रा में बारूद का इस्तेमाल किया जा रहा है। धमाकों के कारण पत्थर के बड़े टुकड़े उड़कर सीधे लोगों के घरों की छतों पर गिर रहे हैं।

कई ग्रामीणों के पक्के मकानों की दीवारों में गहरी दरारें आ गई हैं, जिससे घर कभी भी जमींदोज हो सकते हैं। धमाकों की गूंज और जान जाने के डर से ग्रामीण रात भर जागकर अपने मासूम बच्चों की सुरक्षा कर रहे हैं। ब्रेकर' का बहाना, 'बम' का निशाना।

​विभागीय इंजीनियर सुशील मिश्रा की कार्यप्रणाली इस पूरे मामले में संदिग्ध नजर आ रही है। ग्रामीणों की शिकायतों पर मरहम लगाने के बजाय इंजीनियर साहब बेतुके तर्क दे रहे हैं। यदि निर्माण कार्य में नियमानुसार 'ब्रेकर' मशीन का उपयोग हो रहा है, तो पत्थर उड़कर छतों तक कैसे पहुँच रहे हैं? मौके पर बिखरा मलबा और क्षतिग्रस्त दीवारें चीख-चीख कर ब्लास्टिंग की गवाही दे रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।

​आबादी क्षेत्र में ब्लास्टिंग के लिए विस्फोटक अधिनियम के तहत जिला प्रशासन से अनुमति ली गई। कार्यस्थल पर अनिवार्य 'वर्क बोर्ड' (सूचना पटल) क्यों नहीं लगाया गया? लागत और ठेकेदार की जानकारी क्यों छिपाई जा रही है। जिम्मेदार अधिकारी आखिर ग्रामीणों की गुहार सुनने और फोन उठाने से क्यों कतरा रहे हैं। जनहित का दावा करने वाले सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधियों ने पीड़ितों के नुकसान पर आँखें क्यों मूंद ली हैं।

​यदि कार्य पारदर्शी है, तो ब्रेकर की लॉग-बुक और बिलों का भौतिक सत्यापन कराने से प्रशासन क्यों डर रहा है। आक्रोशित ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैं की निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की जाए। पीड़ित परिवारों को उनके मकानों में हुए नुकसान का तत्काल मुआवजा मिले। दोषी इंजीनियर और ठेकेदार के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज हो।

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