आधी रात नाचती है मामा की घोड़ी, चतुरा, लवली, संजय मामा, चंगा, राजेश व आलम है अवैध नाल के सौदागर
किसके संरक्षण में जंगल मे रोज हो रहा है लाखो का वारा न्यारा, संदेह के घेरे में पुलिस प्रशासन*
अनूपपुर
जिले भर में चल रहे अवैध कार्यों पर पूर्ण विराम लगाने का दम भरने वाली हमारी मध्य प्रदेश पुलिस के दावे चचाई थाना क्षेत्र की सीमा में आकर खोखले साबित हो रहे हैं, या फिर शायद कोयलांचल नगरी अमलाई मे खाकी की नजरे करम और जेब गरम है, हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि यदि पुलिस रिकॉर्ड पर अगर एक नजर डाली जाए तो थाना चचाई अंतर्गत आने वाले अमलाई नगर के गुनहगारों ने अपने अवैध कृत्यो के दम पर जिले भर में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है, या फिर यह कहना अतिशयोक्ति न होगा की निश्चित तौर पर जिले की आपराधिक रिकॉर्ड टॉप 10 सूची में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है। अवैध शराब बिक्री कोयला कबाड़ आईपीएल जुआ सट्टा जैसे अवैध कार्यों का बेखौफ संचालन धड़ल्ले से करवाया जा रहा है, वही संजय मामा द्वारा जुआ का दूसरा स्वरूप घोड़ी का संचालन रात के अंधेरे में जंगलों में करवा कर दोनों जिले शहडोल व अनूपपुर के अपराधियों का अपनी और ध्यान आकर्षित करवाते हुए, नगर को अपराधियों का चारागाह बना दिया है। कभी शिक्षा के क्षेत्र में अपना लोहा बनाने वाले होनहार विद्यार्थियों के नाम से विख्यात तो कभी अपनी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाने वाली नगरी अमलाई इन दिनों अपराधी तथा अवैध कार्यों का गढ़ बन कर रहे गई है, शाम ढलते ही डुमरिया टोला तथा गीता ग्राम के जंगलों में घोड़ी बेखौफ होकर नाचती है, लेकिन अचरज की बात है कि क्षेत्र मे रात भर में ग्रस्त कर रही हमारी कर्तव्य निष्ठ खाकी की नजरे सैकड़ो जुआरिंयो के जमवाड़ा को देख नहीं पाती हैं, पुलिस के गैर जिम्मेदार नुमाइंदों के संरक्षण में चल रहे इस पूरे खेल को बकायदे सिंडिकेट बनाकर इसमें शामिल सदस्यों चतुरा धनपुरी, लवली धनपुरी संजय मामा, चंगा, राजेश तथा आलम को माध्यम बनाकर जंगलों में घोड़ी दौड़ाइ जा रही है। इस मामा की घोड़ी दौड़ाने से सैकड़ो घर बर्बाद हो रहे हैं। हजारो नौजवान इस अवैध कार्य मे लिप्त होकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे। इस कारण से इस क्षेत्र में अपराध बढ़ता ही जा रहा है। अगर प्रशासन इस ओर ध्यान नही दिया तो आने वाले समय मे पूरा क्षेत्र मामा की घोड़ी से बर्बाद हो जाएगा। वही जिले के अपराधियों के साथ सख्ती के साथ निपटने वाले जनप्रिय पुलिस अधीक्षक के अब तक मामला संज्ञान में ना आना यह समझ से परे हैं
*रोज होता है लाखों का वारा न्यारा*
रात के अंधेरों में जंगल की राह पर भरपूर जोश खरोस के साथ बिंदास नाच रही यह घोड़ी, किसी बारात मे दूल्हे के लिए नहीं सजाई जाती बल्कि रोज दूल्हा बनने वाले संजय मामा के जुआ फड़ में बिसात के तौर पर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली यह घोड़ी लाखों रुपए की नाल वसूली कर अपने कार्य को अंजाम दे रही है। वहीं सूत्रों की माने तो इस पूरे खेल में हर महीने लाखों रुपए के वारे न्यारे होते हैं, जिसमें से एक टका लगभग 10 से 12 हजार प्रभारी की झोली में एवं कुछ से प्रशासनिक नुमाइंदों के चाय पान के खर्च इसी घोड़ी के दम पर पूरे होते हैं।
