नगर परिषद के उपाध्यक्ष को सौपे 60 लाख, कपड़ा दुकान में नोट गिनने का मामला आया सामने

नगर परिषद के उपाध्यक्ष को सौपे 60 लाख, कपड़ा दुकान में नोट गिनने का मामला आया सामने


*वायरल हुआ वीडियो*

शहडोल

जिले के ब्यौहारी क्षेत्र में इन दिनों एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक कपड़ा व्यापारी अपनी दुकान के भीतर पाँच–पाँच सौ के नोटों की गड्डियाँ सजाकर मशीन से गिनता दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि व्यापारी ने करीब 60 लाख रुपए की नगद राशि नगर परिषद उपाध्यक्ष के पति रमेश को गिनकर सौंपे। इस पूरे घटनाक्रम को किसी ने मोबाइल पर कैद कर लिया और वीडियो को वायरल कर दिया, जिसके बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

सूत्रों के अनुसार, यह वीडियो बनसुकली चौक स्थित किसी वस्त्रालय का है, वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि दुकान के भीतर जमीन पर दो कतारों में नोटों की गड्डियाँ सजाकर रखी गई हैं और व्यापारी नोट गिनने की मशीन के जरिए रकम की गिनती कर रहा है। सामने बैठे व्यक्ति को स्थानीय लोग नगर परिषद के उपाध्यक्ष पति का बता रहे हैं। बताया जा रहा है कि नोटों की गिनती पूरी होने के बाद रकम उन्हें सौंप दी गई।

यह सवाल उठ रहा है कि आखिरकार इतने बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन किस वजह से हुआ? क्या यह रकम किसी राजनीतिक सौदे, टैक्स चोरी या अवैध कारोबार का हिस्सा है? या फिर इसके पीछे कोई और वजह छुपी है? अभी तक न तो व्यापारी और न ही उपाध्यक्ष पति की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। इस बात में कितनी सच्चाई है की हम पुष्टि नहीं कर रहे है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वीडियो में दिख रहा लेन-देन केवल एक व्यापारी और जनप्रतिनिधि परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कालाधन और काला बाज़ारी का बड़ा खेल हो सकता है। करोड़ों की संपत्ति रखने वाले व्यापारी इस तरह कैश में सौदे करते हैं और शासन-प्रशासन की आँखों में धूल झोंककर टैक्स चोरी को बढ़ावा देते हैं।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि एक व्यापारी के पास इतनी बड़ी नगद राशि मौजूद है तो वह इसे बैंकिंग प्रणाली से दूर रखकर क्यों छिपा रहा था? क्या इसके पीछे स्टाम्प ड्यूटी और जीएसटी चोरी का कोई खेल है? इस मामले में आम जनता ने शासन-प्रशासन से तत्काल उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि मामले की सही जाँच की जाए तो कई बड़े नाम और व्यापारियों की पोल खुल सकती है। वहीं, नगर परिषद से जुड़े होने के कारण इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है।

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