खदान की बारूदी धमाकों की गूंज शहर तक, दरक रही आवासीय घरों की दीवारें

खदान की बारूदी धमाकों की गूंज शहर तक, दरक रही आवासीय घरों की दीवारें 


अनूपपुर/कोतमा

कोतमा। अनुपपुर जिले की कोयलांचल नगरी जमुना कोतमा क्षेत्र अंतर्गत संचालित 9 व 10 नम्बर की अंडरवाल खदानों के धमाकों व घरों की दरारों से कोतमा नगर पालिका के वार्ड नम्बर 10, 11, 12, 13 व कुदरी टोला के रहवासी इन दिनों कालरी खदान की ब्लास्टिंग से अच्छे खासे परेशान हैं। कालरी प्रबंधन द्वारा बेहतर प्रोडक्शन दिखाने 9 व 10 नम्बर खदान में की जाने वाले बारूदी धमाकों के कारण कोतमा नगर पालिका क्षेत्र के आवासीय घरों में दरारें पड़ रही है। कोतमा वार्ड नम्बर 10 विधायक़ निवास के सामने रहने वाले अखिलेश नामदेव ने जानकारी देते हुए बताए कि मंगलवार की दोपहर लगभग 2. 30 बजे मैँ अपने घर मे आराम कर रहा था। तभी तेज गड़गड़ाहट के साथ जमीन के अंदर कम्पन महसूस हुआ। जिससे मेरे घर मे नवनिर्मित प्रधानमंत्री आवास की दीवार दरक गयी। अखिलेश नामदेव ने बताया कि जमुना कोतमा क्षेत्र अंतर्गत 9 व 10 नम्बर की खदानों में कोयला उत्पादन के लिए विस्फोटक पदार्थो का प्रयोग किया जाता है। नियमों के विपरीत किए जाने वाले धमाको से नगरीय क्षेत्र के वार्डवासी दहशत में रहते है। अखिलेश नामदेव ने बताया कि वार्ड नम्बर 10 के कुदरी टोला दो दर्जन लोगो के घर ऐसे है जिनमें बड़ी-बड़ी दरारे पड़ गई है। यही हाल खपरैल घरो का भी है नगरीय क्षेत्र के वार्ड नम्बर 10 के रहवासियों ने दर्जनो बार अनुविभागीय अधिकारी व कालरी प्रबंधन को शिकायते की किन्तु कॉलरी प्रबंधन हर बार मुआवजे की बात कहकर शिकायत को अनदेखी कर देता है। यह है नियम के अनुसार खुली खदान तथा भूमिगत खदानो के लिए पॉवर सेक्टर तथा डेटोनेटर सेक्टर की जरिए विस्फोट किया जाता है। विस्फोट के पश्चात होने वाले कंपन को सिस्को मीटर और बायब्रेशन मीटर में पीपीव्ही के जरिए नापा जाता है। भौगोलिक स्थिति के कारण पीपीव्ही की इकाई अलग-अलग होती है किन्तु जमुना कोतमा क्षेत्र के आसपास कॉलरी प्रबंधन जिस तरह से बारूदी धमाके करा रहा है इसमें वह अपने ही नियमों की अनदेखी करने में जुटा हुआ है। विदित हो कि कालरी प्रबंधन अपने प्रोडक्शन को बढाने आवासीय क्षेत्रो में भी ब्लास्टिंग करने में गुरेज नही करते। देर सवेर किसी बड़ी घटना से इनकार नही किया जा सकता। वही वार्ड़ के लोगों कहना है क्या अगर ब्लास्टिंग नहीं रुकती है तो जन आंदोलन किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी कालरी प्रबंधक की होगी।

*जल श्रोत पर संकट*

बारूदी धामको के कारण न सिर्फ घरो में दरारे पड़ी है बल्कि प्राकृतिक जल स्त्रोतो पर भी विपरीत असर पड़ा है। वर्षा ऋतु के बावजूद कुओं और तालाबों में पानी का संग्रहण नहीं हो पाता है। जैसे-जैसे तापमान में वृद्धि हो रही है भू-जल स्तर गिरता जा रहा है।

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