पानी का टैंकर गुम गया, सीएम हेल्पलाइन व कलेक्टर से ढूढने की लगाई गुहार

पानी का टैंकर गुम गया, सीएम हेल्पलाइन व कलेक्टर से ढूढने की लगाई गुहार


अनूपपुर

सरकार हो या जनप्रतिनिधि सभी चाहते हैं कि उनके क्षेत्र में विकास की गति तेज हो लेकिन कुछ जनप्रतिनिधि और अधिकारियों की लापरवाही के कारण शासन की योजनाओं से ग्रामीण वंचित रहते हैं और दी गई सामग्री का उपयोग ग्रामीणों को समय पर नहीं मिल पाते जनपद पंचायत द्वारा विधायक निधि से गर्मियों के समय में ग्रामीणों को प्यास बुझाने के लिए पानी का टैंकर प्रदान किए जाते हैं उस टैंकर का भी उपयोग करने को नहीं मिल पाता। कई माह हो गए पंचायत से पानी का टैंकर गायब है जिससे आमजन परेशान हो रहे हैं।

अनूपपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलिया बड़ी का ही एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें पंचायत में विधायक निधि से दिया गया टैंकर का शिकायत बेलिया बड़ी निवासी दिलीप कुमार मिश्रा ने कलेक्टर अनूपपुर को शिकायत पत्र  देते हुए बताया कि ग्राम पंचायत बेलिया बड़ी में पिछले कई महीनों से विधायक मद द्वारा प्रदान किया गया पानी का टैंकर ग्राम पंचायत बेलिया बड़ी के अंतर्गत कहीं भी नहीं है उनके द्वारा 10 मई को सरपंच व सचिव से पंचायत की टैंकर की मांग की जिससे पानी की जल पूर्ति की जा सके जिससे पानी की समस्या दूर हो सके लेकिन तत्कालीन सरपंच के द्वारा बताए गए कि पानी का टैंकर बदरा में बनाने के लिए दिया गया है टैंकर  की स्थिति ठीक नहीं है यह कह कर टैंकर देने के लिए साफ मना कर दिए उसके बाद दिलीप मिश्रा द्वारा तत्कालीन सचिव से बात किए तो उन्होंने कहा कि मैं छुट्टी में हूं आप सरपंच से टैंकर के संबंध में बात कर लीजिए टैंकर संबंधी सही जानकारी न मिलने से दिलीप मिश्रा द्वारा 12 मई को मजबूर होकर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की उसके बाद उन्होंने जनपद सीईओ को भी ग्राम पंचायत के टैंकर के संबंध में अवगत कराया है इसके बावजूद भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई शिकायतकर्ता दिलीप कुमार मिश्रा द्वारा कलेक्टर अनूपपुर को भी इस संबंध में अवगत कराया है कि ग्राम पंचायत बेलिया बड़ी में शासकीय टैंकर का तलाश करवा कर टैंकर के संबंध में कार्यवाही की जाए जिससे ग्रामीणों  की पानी की समस्या दूर हो सके। इस मामले की शिकायत करने के बाद पंचायत के जनप्रतिनिधि उपसरपंच, सचिव बौखलाकर शिकायत कर्ता से शिकायत वापस लेने का दबाब बना रहे हैं शिकायत वापस न लेने पर उसे झूठे मामले में फसाने की धमकी दी जा रही है और पारिवारिक दबाब बनाया जा रहा है यह कृत्य यह साबित करता है कि पंचायत मामले को दबाने के लिए किस कदर कहा तक जा सकता है।

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