रेलवे स्टेशन पर पार्किंग शुल्क को लेकर आक्रोश, ऑटो चालकों ने स्टेशन प्रबंधक को सौंपा ज्ञापन

*बड़ी कंपनियों की फ्री बस सेवा और सीमित ट्रेनों के बीच आजीविका का संकट*


अनूपपुर

बिलासपुर मंडल अंतर्गत अमलाई रेलवे स्टेशन पर नया पार्किंग ठेका शुरू होते ही स्थानीय ऑटो और टैक्सी चालकों के सामने रोजी रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ठेकेदार द्वारा मनमाने ढंग से ₹800 से ₹900 प्रति माह के पास की मांग किए जाने से नाराज समस्त ऑटो एवं टैक्सी चालक संघ ने रेलवे स्टेशन प्रबंधक को मंडल रेल प्रबंधक के नाम एक ज्ञापन सौंपा। चालकों का साफ कहना है कि स्टेशन की जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर तय किया गया यह शुल्क पूरी तरह से न्यायसंगत नहीं है।

ज्ञापन में चालकों ने अमलाई क्षेत्र की भौगोलिक और औद्योगिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए बताया कि अमलाई स्टेशन पर ट्रेनों का स्टॉपेज पहले से ही बेहद सीमित है। इसके अलावा, स्टेशन से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित तीन बड़े औद्योगिक प्लांट ओरियंट पेपर मिल अमरकंटक ताप विद्युत केंद्र (चचाई) और कास्टिक सोडा फैक्ट्री द्वारा स्थानीय यात्रियों व अपने कर्मचारियों के लिए चौबीसों घंटे निःशुल्क बस, बोलेरो कार और एम्बुलेंस सेवाएं संचालित की जाती हैं।

इन फैक्ट्रियों के आसपास और बीच के क्षेत्रों के अधिकांश लोग कंपनी प्लांटों की मुफ्त वाहनों से आना जाना करते हैं। इस वजह से अमलाई रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों की संख्या न के बराबर होती है और स्थानीय ऑटो चालकों को पूरे दिन में गिने चुने यात्री ही मिल पाते हैं, जब दिनभर में दो वक्त की रोटी कमाना मुश्किल है, तो हम महीने का ₹900 सिर्फ पार्किंग के लिए कहाँ से लाएं, हम ₹300 महीना देने को तैयार हैं, लेकिन ठेकेदार तानाशाही पर उतारू है। पीड़ित ऑटो टैक्सी चालक संघ अमलाई

चालकों का कहना है कि वे रेलवे के नियमों का सम्मान करते हैं और पूरी ईमानदारी से ₹300 प्रति माह का पास बनवाने के लिए तैयार हैं, ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके। परंतु, पार्किंग ठेकेदार द्वारा चालकों की इस व्यावहारिक और न्यायसंगत मांग को सिरे से खारिज किया जा रहा है। इतनी कम कमाई में भारी भरकम शुल्क थोपे जाने से चालकों और उनके परिवारों के भरण पोषण पर तलवार लटक गई है, जिससे पूरे टैक्सी संघ में भारी आक्रोश और असंतोष व्याप्त है। ऑटो टैक्सी चालकों ने रेलवे प्रशासन से सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।

इनका कहना हैं।

पार्किंग के मामले में ऑटो संघ के द्वारा जो ज्ञापन दिया गया हैं, उच्च अधिकारी के पास भेजकर इस विषय पर चर्चा करता हूँ।

*रेलवे स्टेशन, प्रबंधक, अमलाई*

अवैध भंडारण में खनिज विभाग की कार्यवाही 25 से 30 ट्रैक्टर रेत जप्त, रेत माफिया हुआ फरार 


उमरिया

जिले के बिरसिंहपुर पाली थाना अंर्तगत घुनघुटी रेलवे स्टेशन के समीप लगभग 25 -30 टेक्टर टाली रेत जिसका अवैध भंडारण किया गया था, को पकड़ने में खनिज विभाग को महती सफलता अर्जित की है। बताया जाता है कि घुनघुटी रेलवे स्टेशन से सटी रेलवे की भूमि पर रेत के अवैध भंडारण की जानकारी मिलने पर खनिज विभाग का अमले ने त्वरित कार्यवाही करते हुए रेत को अपने कब्जे में ले लिया है। इस कार्यवाही को अंजाम देने के लिए खनिज विभाग ने स्थानीय पुलिस और वन महकमा को भी अपने साथ ले रखा था। खनिज विभाग ने अवैध रेत को अपने कब्जे में लेते हुए इसे वहाँ से उठाकर वन विभाग के सुर्पुद कर दिया है। इस समय घुनघुटी में रेत माफिया के हौसले बुलंद है और रात दिन एक कर रेत के अवैध कारोबार को अंजाम देते देखें जाते हैं। रेत के इस कारोबार बढाने में स्थानीय पुलिस प्रशासन का हाथ बताया जाता है। घुनघुटी पुलिस चौकी में पदस्थ कई कर्मचारी रेत चोरी कराने का ठेका ले रखें है। बिना स्थानीय प्रशासन के मिलीभगत के इस पैमाने पर रेत का भंडारण किया जाना संभव नहीं है। बताया जाता है कि घुनघुटी में कई छत्रप रेत के अवैध कारोबार में संलिप्त है जो घुनघुटी के आसपास के नालो से रेत निकालने के काम में जुटे हुए हैं, और गहिरा नाला, झरिया नाले को पाताल में पहुचाने में सफल हो गयें है। रेत माफिया की  गेंग चलती है और पुलिस प्रशासन को अपने पक्ष में करके शासन को हर दिन लाखों रूपये की क्षति पहुचाते हुये इस काम को अंजाम देते आ  रहें हैं। रेलवे परिसर में अवैध रेत का भंडारण जो की वन चौकी से भी लगी हुई है, यह भंडारण अपने साथ कई सवाल खड़े करते हुए स्थानीय पुलिस, वन और रेलवे को कटघरे में खड़ा करता है। आखिर कार रेलवे स्टेशन के सटी भूमि पर उसके परिसर में अवैध भंडारण का घिनौना कृत्य बिना उनकी मिलीभगत के कैसे संभव हो गया। कहा तो यह भी जाता है इस अवैध भंडारण में क्षेत्र का कुख्यात अपराधी जो आये दिन जेल की सैर करते रहते हैं के हाथ होने से लोग सामने आने से बच रहे हैं।

खनिज विभाग का छोटा सा विभाग है जो पूरे जिले भर में व्यस्त रहता है उसकी इस व्यस्तता का लाभ उठाते हुए घुनघुटी जैसे क्षेत्र में अवैध रेत भंडारण का  करते हुए दिन दुगुना रात चौगुनी चांदी काट रहे हैं।

कब जागेंगे कुम्भकर्णी नींद से मंत्री, सांसद व विधायक, सोते हुए नही होगा विकास, कराह रही है जनता- मनीष श्रीवास्तव

*दूसरो की उपलब्धि को अपना बताकर वाहवाही लूटकर, जनता को बना रहे हैं बेबकूफ*


शहडोल

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग मध्यप्रदेश के उपाध्यक्ष- मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि, शहडोल क्षेत्र के सांसद विधायक और मंत्री अगर अपनी कुंभकरणीय नींद से जाग जाएं, जिस जनता के वोटों से चुनाव जीते हैं उनके प्रति कुछ कार्य करने की अगर रुचि बना सके क्षेत्र की जनता के जनहित में कार्य कर सकें तो केवल रेलवे क्षेत्र के विकास से ही शहडोल का बहुत बड़ा विकास होगा। वैसे जनप्रतिनिधि दूसरे की उपलब्धि को अपना बताकर जनता के सामने वाहवाही लूटकर फूले नही समा रहे हैं। अंध भक्त भी खूब प्रचार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि, शहडोल के जनप्रतिनिधि अगर चाहे तो शहडोल को रेलवे का जंक्शन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकता है, शहडोल से रीवा, शहडोल से मंडला, शहडोल से जबलपुर सीधी रेलवे लाइन की सुविधा दी जा सकती है। शहडोल से गोहपारू-जैसिहनगर- ब्योहारी होकर रीवा। शहडोल से डिंडोरी- अमरपुर- मोहगांव होकर मंडला। शहडोल से शाहपुरा- कुंडम होकर जबलपुर।

मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि,सीधी रेलवे लाइन सुविधा से शहडोल संभाग के साथ-साथ उक्त सभी क्षेत्रों का विकास होगा और शहडोल के साथ ही मंडला- ब्योहारी और रीवा भी जंक्शन बन जाएगा।

 उन्होंने कहा कि शहडोल के जनप्रतिनिधियों को छोड़कर आसपास में रीवा सतना जबलपुर के सांसद और विधायक चाहे वह किसी भी पार्टी के हो क्षेत्र के विकास के लिए एक होकर रेल मंत्री से अपनी मांगों को लगातार पूरा कराते चले आ रहे हैं लेकिन सैकड़ो सलाह देने के बाद भी शहडोल संभाग के जनप्रतिनिधि अपनी कुंभकरणीय नींद से जाग नहीं रहे ऐसा लगता है इनकी सोच, विचार सब खत्म हो गए हैं और यह प्रतीत होता है कि यह सभी शहडोल संभाग के क्षेत्र के विकास के लिए बिल्कुल अनुपयोगी और नकारा साबित हो रहे हैं।

मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि,जंक्शन बनने से यात्रियों और शहडोल क्षेत्र दोनों को कई लाभ मिलेंगे। नई रेल कनेक्टिविटी विभिन्न शहरों और राज्यों के लिए सीधे या बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध होते हैं। यात्रियों को ट्रेन बदलने की सुविधा, एक ही स्टेशन पर दूसरी दिशा की ट्रेन पकड़ना आसान हो जाता है। रेलवे सुविधाओं का विस्तार, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, यार्ड, अच्छे प्रतीक्षालय, पार्किंग, फुटओवर ब्रिज, एस्केलेटर आदि विकसित किए जाते हैं। माल ढुलाई (Freight) में वृद्धि उद्योगों, व्यापारियों और किसानों को सामान भेजने और मंगाने की बेहतर सुविधा मिलती है। स्थानीय व्यापार और रोजगार में बढ़ोतरी होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन और अन्य व्यवसायों को लाभ होता है। क्षेत्र का आर्थिक विकास निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। रेलवे का प्रशासनिक महत्व बढ़ता है,कई बार अतिरिक्त रेलवे कार्यालय, रखरखाव सुविधाएं और कर्मचारियों की नियुक्ति होती है।

उन्होंने बताया कि उपरोक्त संबंध में रेल मंत्री और रेल महाप्रबंधक को पत्रों के द्वारा इस संबंध में बताया गया है और मांग रखी गई है अब देखना यह है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि इस संबंध में क्या पहल करते हैं और इस मांग को पूरा कर पाते हैं या नहीं।।

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