दो पक्षों में भूमि विवाद, इंची टेप से नप गई विवादित जमीन, मीडिया के सवालों पर भड़के तहसीलदार, कोर्ट आने की बात कही

*पाटन में राजस्व कार्यवाही पर उठे गंभीर सवाल*


अनूपपुर

जिले के जैतहरी तहसील के ग्राम पाटन में दो पक्षों के बीच भूमि विवाद कई महीनों से चला आ रहा है। दोनों पक्ष राजस्व कार्यालयों से लेकर न्यायालयों तक न्याय की गुहार लगा रहे हैं। एक पक्ष ने जिला एवं सत्र न्यायालय अनूपपुर तथा अपर कलेक्टर न्यायालय अनूपपुर का दरवाजा खटखटाया है, जबकि दूसरे पक्ष ने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद मौके पर पहुंचे प्रभारी तहसीलदार ने विवादित भूमि की नपती कर मौका जांच कार्यवाही शुरू की और पंचनामा तैयार कर जबजस्ती गवाही को हस्ताक्षर करके को कहा। यहीं से विवाद खड़ा हो गया, ग्रामीणों और प्रभावित पक्षों का आरोप है कि सीमांकन जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में आवश्यक तकनीकी उपकरणों और राजस्व अभिलेखों का समुचित उपयोग नहीं किया गया है। दूसरी ओर मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों पर अधिकारी का नाराज होना और स्पष्ट जवाब देने से बचना भी संदेहों को और गहरा कर रहा है। अब यह मामला केवल जमीन विवाद नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और राजस्व प्रक्रिया की विश्वसनीयता का विषय बन गया है।

राजस्व नियमों के अनुसार किसी भी विवादित भूमि के सीमांकन में खसरा, नक्शा, फील्ड बुक, स्थायी चिन्ह और विभागीय मापन उपकरणों का उपयोग महत्वपूर्ण माना जाता है। आधुनिक समय में कई स्थानों पर जीपीएस, टोटल स्टेशन मशीन और तकनीकी सर्वे पद्धतियों का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में यदि किसी संवेदनशील विवाद में पारंपरिक और सीमित साधनों से नपती की जाती है तो उसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। लेकिन पाटन में हुई मौका जांच कार्यवाही को लेकर आरोप है कि केवल इंची टेप और स्केल के सहारे जमीन की नपती कर दी गई है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है। यही मुद्दा अब विवाद का मुख्य कारण बन गया है।

भूमि विवाद से जुड़ा मामला पहले से ही न्यायालय और उच्च राजस्व अधिकारियों के समक्ष विचाराधीन बताया जा रहा है। ऐसे में मौके पर जाकर सीमांकन जमीन नपित और पंचनामा तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोकतंत्र में मीडिया जनता और प्रशासन के बीच जवाबदेही का माध्यम माना जाता है। पाटन मामले में मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों पर पद प्रभारी तहसीलदार के नाराज होने और कथित तौर पर कोर्ट में आने की बात कही गई। यदि कार्यवाही नियमों के अनुसार हुई थी तो तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए। इस कार्यवाही निष्पक्ष और नियम सम्मत थी तो प्रशासन को पूरे प्रकरण की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए थी। वहीं यदि प्रक्रिया में कोई कमी रही है तो उसकी समीक्षा भी आवश्यक है।

समाचार 01 फ़ोटो 01

इंची टेप से नप गई विवादित जमीन, मीडिया के सवालों पर भड़के तहसीलदार

*पाटन में राजस्व कार्यवाही पर उठे गंभीर सवाल*

अनूपपुर

जिले के जैतहरी तहसील के ग्राम पाटन में दो पक्षों के बीच भूमि विवाद कई महीनों से चला आ रहा है। दोनों पक्ष राजस्व कार्यालयों से लेकर न्यायालयों तक न्याय की गुहार लगा रहे हैं। एक पक्ष ने जिला एवं सत्र न्यायालय अनूपपुर तथा अपर कलेक्टर न्यायालय अनूपपुर का दरवाजा खटखटाया है, जबकि दूसरे पक्ष ने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद मौके पर पहुंचे प्रभारी तहसीलदार ने विवादित भूमि की नपती कर मौका जांच कार्यवाही शुरू की और पंचनामा तैयार कर जबजस्ती गवाही को हस्ताक्षर करके को कहा। यहीं से विवाद खड़ा हो गया, ग्रामीणों और प्रभावित पक्षों का आरोप है कि सीमांकन जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में आवश्यक तकनीकी उपकरणों और राजस्व अभिलेखों का समुचित उपयोग नहीं किया गया है। दूसरी ओर मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों पर अधिकारी का नाराज होना और स्पष्ट जवाब देने से बचना भी संदेहों को और गहरा कर रहा है। अब यह मामला केवल जमीन विवाद नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और राजस्व प्रक्रिया की विश्वसनीयता का विषय बन गया है।

राजस्व नियमों के अनुसार किसी भी विवादित भूमि के सीमांकन में खसरा, नक्शा, फील्ड बुक, स्थायी चिन्ह और विभागीय मापन उपकरणों का उपयोग महत्वपूर्ण माना जाता है। आधुनिक समय में कई स्थानों पर जीपीएस, टोटल स्टेशन मशीन और तकनीकी सर्वे पद्धतियों का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में यदि किसी संवेदनशील विवाद में पारंपरिक और सीमित साधनों से नपती की जाती है तो उसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। लेकिन पाटन में हुई मौका जांच कार्यवाही को लेकर आरोप है कि केवल इंची टेप और स्केल के सहारे जमीन की नपती कर दी गई है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है। यही मुद्दा अब विवाद का मुख्य कारण बन गया है।

भूमि विवाद से जुड़ा मामला पहले से ही न्यायालय और उच्च राजस्व अधिकारियों के समक्ष विचाराधीन बताया जा रहा है। ऐसे में मौके पर जाकर सीमांकन जमीन नपित और पंचनामा तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोकतंत्र में मीडिया जनता और प्रशासन के बीच जवाबदेही का माध्यम माना जाता है। पाटन मामले में मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों पर पद प्रभारी तहसीलदार के नाराज होने और कथित तौर पर कोर्ट में आने की बातकही गई। यदि कार्यवाही नियमों के अनुसार हुई थी तो तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए। इस कार्यवाही निष्पक्ष और नियम सम्मत थी तो प्रशासन को पूरे प्रकरण की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए थी। वहीं यदि प्रक्रिया में कोई कमी रही है तो उसकी समीक्षा भी आवश्यक है।

समाचार 02 फ़ोटो 02

रेत रफ्तार बस गाय को कुचलते हुए मेटाडोर से भिड़ी, कई लोग हुए घायल, घटना सीसीटीवी में कैद

शहडोल

जिले के बुढार थाना क्षेत्र अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग NH-43 स्थित पकरिया चौराहे पर देर रात एक तेज रफ्तार बनारस से रायपुर जा रही द्विवेदी ट्रेवल्स की यात्री बस क्रमांक MP-13-P-2513 ने पहले सड़क पर मौजूद एक गाय को कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद अनियंत्रित बस ने सामने चल रही रेत से भरी डग्गी को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में डग्गी पलट गई और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि डग्गी चालक को चोटें आईं, वहीं बस में सवार कई यात्रियों को भी हल्की चोटें पहुंची हैं। 

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू करते हुए घायलों की मदद की और पुलिस को सूचना दी। बताया जा रहा है कि जिस डग्गी को बस ने टक्कर मारी, वह कथित तौर पर अवैध रेत परिवहन में लगी हुई थी। हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। हादसे का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें तेज रफ्तार बस सीधे गाय को टक्कर मारते हुए डग्गी से भिड़ती दिखाई दे रही है। फुटेज सामने आने के बाद बस चालक की लापरवाही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस की रफ्तार काफी अधिक थी, जिसके कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों ने एक बार फिर हाईवे सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई की जरूरत को उजागर कर दिया है। फिलहाल बुढार पुलिस मामले की जांच कर रही है। सड़क किनारे लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसने तेज रफ्तार और लापरवाही की खौफनाक तस्वीर सामने ला दी। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटी हुई है।

समाचार 03 फ़ोटो 03

लंदन का डॉक्टर बनकर विधवा शिक्षिका से 34 लाख की कर दी साइबर ठगी, महिला को जीवनसाथी की थी तलाश

शहडोल

शहडोल में एक शासकीय महिला शिक्षिका ऑनलाइन वैवाहिक साइट के जरिए ठगी का शिकार हो गई। ठग ने खुद को लंदन का डॉक्टर बताकर विश्वास जीता और विभिन्न बहानों से लगभग 34 लाख रुपये ऐंठ लिए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

एक शासकीय महिला शिक्षिका जो ऑनलाइन वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से ठगों के जाल में फंस गई। आरोपी ने खुद को लंदन (यूनाइटेड किंगडम) का डॉक्टर बताकर महिला से दोस्ती की और विश्वास जीतने के बाद करीब 34 लाख रुपये की ठगी कर ली।

पति का कुछ समय पहले निधन हो गया था। अकेलेपन के बीच उसने जीवनसाथी की तलाश में एक वैवाहिक वेबसाइट पर अपना प्रोफाइल बनाया था। इसी दौरान उसकी पहचान एक व्यक्ति से हुई, जिसने अपना नाम डॉ. संजय प्रसाद सिंह बताया और खुद को लंदन निवासी डॉक्टर बताया। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती रही, लेकिन धीरे-धीरे आरोपी ने महिला का विश्वास जीत लिया। बताया जा रहा है कि आरोपी ने विभिन्न बहानों से महिला से पैसों की मांग शुरू की। कभी उपहार भेजने, कभी कानूनी प्रक्रिया तो कभी अन्य जरूरी कारणों का हवाला देकर उसने महिला को कई बार अलग-अलग खातों में रकम जमा कराने के लिए राजी कर लिया। विश्वास में आकर महिला लगातार पैसे भेजती रही।

जब महिला ने अपने बैंक खाते की जांच की तो उसके होश उड़ गए। खाते से करीब 34 लाख रुपये निकल चुके थे। खुद के साथ हुई ठगी का एहसास होने पर महिला ने तत्काल पुलिस और साइबर सेल से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और ऑनलाइन लेन-देन से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।।

समाचार 04 फ़ोटो 04

सीएमओ ने फ़ोन से की गाली गलौच, शिवसेना ने एसडीएम को सौपा ज्ञापन, कार्यवाही की मांग

अनूपपुर

पत्रकार के साथ फोन पर अभद्र गाली-गलौज करने के मामले में शिवसेना संभाग अध्यक्ष पवन पटेल के आदेश एवं जिला अध्यक्ष राजेश महाराणा के निर्देश पर शिवसेना कोतमा नगर अध्यक्ष बरकत कुरैशी ने आज एसडीएम कोतमा को ज्ञापन सौंपकर कठोर कार्रवाई की मांग की।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि नगर पालिका परिषद बिजुरी के अध्यक्ष पति एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी बनगवां लखन लाल पनिका ने दूरभाष पर पत्रकार निखिल कुमार को माँ-बहन की अभद्र गालियाँ दीं। इस घटना की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है। ज्ञापन में कहा गया कि यह कृत्य लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया का अपमान है। पत्रकार समाज और प्रशासन के बीच सेतु का कार्य करते हैं। किसी अधिकारी द्वारा इस प्रकार का व्यवहार अत्यंत निंदनीय है।

मामले की निष्पक्ष जांच हेतु समिति गठित की जाए। ऑडियो रिकॉर्डिंग का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाए। दोषी पाए जाने पर CMO लखन लाल पनिका के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई हो। जिले के पत्रकारों की सुरक्षा व सम्मान हेतु निर्देश जारी हों।

संभाग अध्यक्ष ने कहा कि "लोकतंत्र में पत्रकारों का अपमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन 7 दिवस में कार्रवाई करे।" वहीं जिला अध्यक्ष राजेश महारान ने चेतावनी दी कि दोषी सीएमओ पर तत्काल एफआईआर दर्ज हो। *नगर अध्यक्ष बरकत कुरैशी ने कहा कि "कार्रवाई नहीं हुई तो शिवसेना सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी। 

समाचार 05 फ़ोटो 05

सरपंच, सचिव के भृष्टाचार के खिलाफ ग्रामीणों ने कलेक्टर से की शिकायत

अनूपपुर

जिले के ग्राम पंचायत पोंडी के दर्जनों ग्रामीणों ने सरपंच, सचिव के मनमानी व भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जुट होकर कलेक्टर कार्यालय पहुँच कर शिकायत पत्र सौपा है, शिकायत में कहा गया है कि लगातार शिकायत के बाद भी आज तक कोई जांच व कार्यवाही नही की गई है।

शिकायत पत्र में लेख किया गया हैं कि पूर्व में की गई शिकायतो की जांच आज तक नहीं कराई गई है। ग्राम पंचायत पोड़ी के सरपंच / सचिव द्वारा बिना कार्य किये राशि आहरण कर खुलेआम भृष्टाचार किया गया, जबकि 5 बार जनसुनवाई मे आवेदन कलेक्टर को दिया गया, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नही किया गया है, विभिन्न निर्माण कार्यों के नाम से लगभग 22 लाख का फर्जी भुगतान बिना कार्य किये राशि आहरण कर लिया गया है। जिससे ग्रामीणो मे सरपंच/सचिव के उपर काफी आक्रोशित है। मात्र सचिव को निलबिंत कर मामले को दबाये जाने की प्रयास किया जा रहा है। एवं दोषी सरपंच के भृष्टाचार की जांच कराये जाये।

अगर 07 दिवस के अंदर बिन्दुवार जांच कर सरपंच, सचिव दोषियो पर कार्यवाही नही की जाती है, तो चक्काजाम, आंदोलन धरना, प्रर्दशन ग्राम पंचायत के सामने मुख्यमार्ग रीवा अमरकंटक मार्ग पर चक्काजाम, आंदोलन, धरना प्रदर्शन किया जायेगा। जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी।

समाचार 06 फोटो 06

आर. के. रिसोर्स का डबल गेम, जनप्रतिनिधि पर आरोप, अपराधी को संरक्षण, दलालो से जुड़े कंपनी के तार

शहडोल

जिले के सोहागपुर एरिया अंतर्गत शारदा खुली खदान में ओवर बर्डन हटाकर कोयला निकालने के कार्य के लिए कार्यरत निजी ठेका कंपनी आर के आर के रिसोर्स में बीते एक वर्षों से भर्ती के नाम पर दलाली का बड़ा खेल फल फूल रहा है। कानूनी तौर पर अधिक से अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के नियम कायदे को ताक मे रखकर मोटी रकम उगाही की फिराक में कंपनी के साइड इंचार्ज रामेश्वर यादव ना सिर्फ स्थानीय बेरोजगार युवकों का शोषण कर रहा है, बल्कि अपने काले कारनामों को अंजाम देने के लिए बकायदे रणनीति बनाकर डबल गेम का प्लान किया हैं। 

एक तरफ यूनियन नेता कामाख्या के साथ मिलकर लगभग 40 मजदूरों की भर्ती के एवज में एक मोटी रकम यूनियन नेता  के माध्यम से बेरोजगारों से ऐठी गई क्षेत्र के भोले भाले ग्रामीणों का शोषण कर रहे हैं। दलाल रामेश्वर यादव इस बात से बेखबर थे, की क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधियो के विरोध के बाद दलाली के इस धंधे में पूर्ण विराम की कुंडी लग सकती है। ईमानदार जनप्रतिनिधियों के विरोध का खामियाजा उन्हें उठाना पड़ सकता है और यही हुआ लगातार बेरोजगार  युवाओं के पक्ष में उनके रोजगार तथा एचपीसी रेट को लेकर लड़ाई लड़ रहे, जनप्रतिनिधि वैभव विक्रम सिंह कंपनी की आंख किरकिरी बन गए यही वजह रही की रामेश्वर यादव द्वारा निराधार, तथ्य विहीन, आरोप लगाकर उपाध्यक्ष की  छवि धूमिल करने का प्रयास तथा इन्हें रास्ते से हटाने का भरसक प्रयास किया गया, जिसके बाद जनप्रतिनिधि वैभव विक्रम सिंह तो अपने ऊपर लगाए गए आरोपों एवं मजदूरों के हित की लड़ाई में पूरी मजबूती के साथ रण में डटे हुए हैं और कंपनी के साइड इंचार्ज का रामेश्वर यादव आरोप लगाकर क्षेत्र से गायब हो गए हैं।

आपको बता दें कि कंपनी के तार दोनों दलालों के साथ काफी मजबूती से जुड़े हुए हैं, पहला यूनियन लीडर कामाख्या जिसने नौकरी भर्ती के नाम पर रामेश्वर की आर्थिक रूप से व्यवस्था बनवाई, वही दूसरा बाहुबली त्रिभुवन विश्वकर्मा जो लाठी के दम पर कंपनी के लिए लोकल मैनेजमेंट संभालता है, इस पूरे घटनाक्रम में मजे की बात तो यह है की त्रिभुवन विश्वकर्मा जो इस समय कंपनी का कर्मचारी है, जिसे कुछ माह पहले कंपनी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मारपीट तथा रंगदारी मांगने का आरोपी बनाया था और इसके साथ 8 से 10 लोगो के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराधिक मामला भी पंजीबद्ध है, उसके बाद भी आर के अर्थ ररिसोर्स  विश्वकर्मा जैसे अपराधियों को अपने स्वच्छ छवि वाली कंपनी में काम दिया।

समाचार 07 फ़ोटो 07

13 मवेशियों को लेकर बूचड़खाने जा रही पीकप को पुलिस ने पकड़कर किया जप्त, मामला दर्ज

शहडोल 

जिले में मवेशी तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत ब्यौहारी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 मवेशियों से भरी एक पिकअप को पकड़ लिया। उत्तर प्रदेश के बूचड़खाने ले जाए जा रहे छह भैंस और सात पड़ों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। पुलिस ने चालक को गिरफ्तार कर वाहन जब्त कर लिया है, जबकि वाहन मालिक समेत तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार मुखबिर से सूचना मिली थी कि जयसिंहनगर की ओर से एक पिकअप वाहन में बड़ी संख्या में मवेशियों को भरकर बूचड़खाने ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही ब्यौहारी पुलिस सक्रिय हुई और टंकी तिराहे पर घेराबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोक लिया।

जांच के दौरान पिकअप क्रमांक यूपी 70 पीटी 6672 में छह भैंस और सात पड़ों सहित कुल 13 मवेशी ठूंस-ठूंसकर भरे पाए गए। वाहन में पशुओं के लिए चारा-पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। पुलिस ने चालक से मवेशियों के परिवहन संबंधी वैध दस्तावेज मांगे, लेकिन वह कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।

पूछताछ में चालक ने अपना नाम मोहम्मद अब्दुल पुत्र मोहम्मद अतीत उर्फ राजू (21 वर्ष), निवासी उमरगंज, थाना नैनी, जिला प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) बताया। चालक ने पुलिस को बताया कि वाहन मालिक मोहम्मद अली, निवासी भड़रा थाना चाकघाट के कहने पर मवेशियों को लादा गया था। लगभग 2.20 लाख रुपये मूल्य के 13 मवेशी तथा करीब 7 लाख रुपये कीमत का पिकअप वाहन जब्त किया गया। 

समाचार 08 फ़ोटो 08

बाघ हमले में मृत महिला के परिजनों को 25 लाख रुपये की सहायता राशि  की गई प्रदान

उमरिया

बाँधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खेरवा में 24 मई को हुई दुखद बाघ हमले की घटना में मृत महिला फूल बाई पति पहलू पाल के परिजनों को कुल 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संवेदनशीलता एवं तत्परता के चलते मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से 17 लाख रुपये तथा बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व द्वारा 8 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कर परिजनों को उपलब्ध कराई गई है।

24 मई को ग्राम खेरवा में बाघ ने घर में घुसकर फूल बाई पर हमला कर दिया था, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई थी। इस घटना में परिवार के अन्य सदस्य भी घायल हुए थे। घटना से पूरे क्षेत्र में शोक एवं चिंता का माहौल व्याप्त हो गया था।

घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन एवं वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किए। कलेक्टर उमरिया ने स्वयं मामले की सतत निगरानी करते हुए पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन द्वारा घायलों के उपचार, सुरक्षा व्यवस्था तथा आवश्यक राहत उपायों को प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किया गया।

समाचार 09

विशेष कैच-अप टीकाकरण अभियान जारी

उमरिया

मीजल्स (खसरा) और रुबेला जैसी गंभीर बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश शासन द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में उमरिया जिले में 19 जून 2026 तक विशेष कैच-अप टीकाकरण अभियान संचालित किया जा रहा है। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बच्चों को मीजल्स-रुबेला (एमआर) वैक्सीन की दो खुराकें क्रमशः 9 माह तथा 16 से 24 माह की आयु में दी जाती हैं। यह टीका बच्चों को इन दोनों जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है।

आर. के. रिसोर्स का डबल गेम, जनप्रतिनिधि पर आरोप, अपराधी को संरक्षण, दलालो से जुड़े कंपनी के तार

*स्थानीय बेरोजगार युवकों का हो रहा है शोषण, काले कारनामो को दे रहे हैं अंजाम*


शहडोल

जिले के सोहागपुर एरिया अंतर्गत शारदा खुली खदान में ओवर बर्डन हटाकर कोयला निकालने के कार्य के लिए कार्यरत निजी ठेका कंपनी आर के आर के रिसोर्स में बीते एक वर्षों से भर्ती के नाम पर दलाली का बड़ा खेल फल फूल रहा है। कानूनी तौर पर अधिक से अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के नियम कायदे को ताक मे रखकर मोटी रकम उगाही की फिराक में कंपनी के साइड इंचार्ज रामेश्वर यादव ना सिर्फ स्थानीय बेरोजगार युवकों का शोषण कर रहा है, बल्कि अपने काले कारनामों को अंजाम देने के लिए बकायदे रणनीति बनाकर डबल गेम का प्लान किया हैं। 

*उपाध्यक्ष की छवि धूमिल करने का प्रयास*

एक तरफ यूनियन नेता कामाख्या के साथ मिलकर लगभग 40 मजदूरों की भर्ती के एवज में एक मोटी रकम यूनियन नेता  के माध्यम से बेरोजगारों से ऐठी गई वहीं दूसरी और स्थानीय रंगदारों को अपने पाले में रखकर दलाली का धंधा सुरक्षित करने की मंशा से पूरे भ्रष्ट सिस्टम को सजाया गया था। क्षेत्र के भोले भाले ग्रामीणों का शोषण कर, गांधी मलाई खाने की राह में लगातार आगे बढ़ रहे दलाल रामेश्वर यादव इस बात से बेखबर थे, की क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधियो के विरोध के बाद दलाली के इस धंधे में पूर्ण विराम की कुंडी लग सकती है। ईमानदार जनप्रतिनिधियों के विरोध का खामियाजा उन्हें उठाना पड़ सकता है और यही हुआ लगातार बेरोजगार  युवाओं के पक्ष में उनके रोजगार तथा एचपीसी रेट को लेकर लड़ाई लड़ रहे, जनप्रतिनिधि वैभव विक्रम सिंह कंपनी की आंख किरकिरी बन गए यही वजह रही की रामेश्वर यादव द्वारा निराधार, तथ्य विहीन, आरोप लगाकर उपाध्यक्ष की  छवि धूमिल करने का प्रयास तथा इन्हें रास्ते से हटाने का भरसक प्रयास किया गया, जिसके बाद जनप्रतिनिधि वैभव विक्रम सिंह तो अपने ऊपर लगाए गए आरोपों एवं मजदूरों के हित की लड़ाई में पूरी मजबूती के साथ रण में डटे हुए हैं और कंपनी के साइड इंचार्ज का रामेश्वर यादव आरोप लगाकर क्षेत्र से गायब हो गए हैं।

*दलालों से जुड़े कंपनी के तार*

आपको बता दें कि कंपनी के तार दोनों दलालों के साथ काफी मजबूती से जुड़े हुए हैं, पहला यूनियन लीडर कामाख्या जिसने नौकरी भर्ती के नाम पर रामेश्वर की आर्थिक रूप से व्यवस्था बनवाई, वही दूसरा बाहुबली त्रिभुवन विश्वकर्मा जो लाठी के दम पर कंपनी के लिए लोकल मैनेजमेंट संभालता है, इस पूरे घटनाक्रम में मजे की बात तो यह है की त्रिभुवन विश्वकर्मा जो इस समय कंपनी का कर्मचारी है, जिसे कुछ माह पहले कंपनी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मारपीट तथा रंगदारी मांगने का आरोपी बनाया था और इसके खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराधिक मामला भी पंजीबद्ध है, लेकिन अचरज की बात तो यह है कि आखिरकार आर के अर्थ रिसोर्स की क्या मजबूरी रही है की  विश्वकर्मा जैसे अपराधियों को अपने स्वच्छ छवि वाली कंपनी आर के अर्थ रिसोर्स न सिर्फ काम दिया, बल्कि दामाद के जैसे आओ भगत कर भरपूर व्यवस्था दी।

*तोड़फोड़ व रंगदारी का हुआ था मामला दर्ज*

निश्चित तौर पर यह सारा घटनाक्रम इशारा करता है कि साइड इंचार्ज रामेश्वर यादव ने अपने मंसूबों को पूरा करने की नीयत से पूरा चक्रव्यूह रचा, यही बात समझने लायक है की कॉरपोरेट जगत मे ऐसे तमाम कंपनी के दलाल मौजूद है, जो की अपने फायदे के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, कोई भी नाजायज काम करने में इन्हें जरा भी संकोच नहीं है, इनका जमीर इन्हें कोसता नहीं है, इनका जनहित के मुद्दों से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं है, अन्य दूसरे राज्यों से काम करने आई कंपनी के ऊपर बाहुबल एवं खादी के रौब दिखाकर दलाली करने का पैतरा काफी पुराना है, लेकिन कारगर है इस तर्ज पर पार्षद पति संजय त्रिभुवन विश्वकर्मा तथा अपने अन्य 8 से 10 साथियों के साथ न सिर्फ कंपनी परिसर में घुसकर तोड़फोड़ की बल्कि बकायतें रंगदारी शुल्क की मांग की, जिसका वीडियो फुटेज भी पुलिस जांच में सामने भी आया। गौरतलब है कि मारपीट तथा तोड़फोड़ के गंभीर मामलों में तीनों आरोपियों के खिलाफ थाना अमलाई में अपराध पंजीबद्ध होने के बावजूद आर के अर्थ रिसोर्स कंपनी के ऐसे अपराधियों तथा नेताओं से संबंध आखिर क्या दर्शाते हैं, साइड इंचार्ज रामेश्वर यादव तथा कंपनी के सुंदर चाल चरित्र का यह दोहरा चेहरा क्षेत्र की जनता जनार्दन को समझना होगा।

MKRdezign

,

संपर्क फ़ॉर्म

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget