दो पक्षों में भूमि विवाद, इंची टेप से नप गई विवादित जमीन, मीडिया के सवालों पर भड़के तहसीलदार, कोर्ट आने की बात कही
*पाटन में राजस्व कार्यवाही पर उठे गंभीर सवाल*
अनूपपुर
जिले के जैतहरी तहसील के ग्राम पाटन में दो पक्षों के बीच भूमि विवाद कई महीनों से चला आ रहा है। दोनों पक्ष राजस्व कार्यालयों से लेकर न्यायालयों तक न्याय की गुहार लगा रहे हैं। एक पक्ष ने जिला एवं सत्र न्यायालय अनूपपुर तथा अपर कलेक्टर न्यायालय अनूपपुर का दरवाजा खटखटाया है, जबकि दूसरे पक्ष ने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद मौके पर पहुंचे प्रभारी तहसीलदार ने विवादित भूमि की नपती कर मौका जांच कार्यवाही शुरू की और पंचनामा तैयार कर जबजस्ती गवाही को हस्ताक्षर करके को कहा। यहीं से विवाद खड़ा हो गया, ग्रामीणों और प्रभावित पक्षों का आरोप है कि सीमांकन जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में आवश्यक तकनीकी उपकरणों और राजस्व अभिलेखों का समुचित उपयोग नहीं किया गया है। दूसरी ओर मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों पर अधिकारी का नाराज होना और स्पष्ट जवाब देने से बचना भी संदेहों को और गहरा कर रहा है। अब यह मामला केवल जमीन विवाद नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और राजस्व प्रक्रिया की विश्वसनीयता का विषय बन गया है।
राजस्व नियमों के अनुसार किसी भी विवादित भूमि के सीमांकन में खसरा, नक्शा, फील्ड बुक, स्थायी चिन्ह और विभागीय मापन उपकरणों का उपयोग महत्वपूर्ण माना जाता है। आधुनिक समय में कई स्थानों पर जीपीएस, टोटल स्टेशन मशीन और तकनीकी सर्वे पद्धतियों का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में यदि किसी संवेदनशील विवाद में पारंपरिक और सीमित साधनों से नपती की जाती है तो उसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। लेकिन पाटन में हुई मौका जांच कार्यवाही को लेकर आरोप है कि केवल इंची टेप और स्केल के सहारे जमीन की नपती कर दी गई है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है। यही मुद्दा अब विवाद का मुख्य कारण बन गया है।
भूमि विवाद से जुड़ा मामला पहले से ही न्यायालय और उच्च राजस्व अधिकारियों के समक्ष विचाराधीन बताया जा रहा है। ऐसे में मौके पर जाकर सीमांकन जमीन नपित और पंचनामा तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोकतंत्र में मीडिया जनता और प्रशासन के बीच जवाबदेही का माध्यम माना जाता है। पाटन मामले में मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों पर पद प्रभारी तहसीलदार के नाराज होने और कथित तौर पर कोर्ट में आने की बात कही गई। यदि कार्यवाही नियमों के अनुसार हुई थी तो तथ्यों के साथ जवाब देना चाहिए। इस कार्यवाही निष्पक्ष और नियम सम्मत थी तो प्रशासन को पूरे प्रकरण की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए थी। वहीं यदि प्रक्रिया में कोई कमी रही है तो उसकी समीक्षा भी आवश्यक है।
