तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई, घटना स्थल पर युवक की हुई मौत, पुलिस जांच में जुटी


शहडोल

जिले के सीधी थाना क्षेत्र के ओदारी नदी नर्सरी के पास एक युवक की जान उस समय चली गई, जब उसकी बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे पेड़ से जा भिड़ी। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। मृतक की पहचान भजन सिंह (35 वर्ष) निवासी तेंदुडोल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि भजन सिंह अपनी बाइक से कूदरी से सीधी की ओर जा रहा था। इसी दौरान ओदारी नदी नर्सरी के पास उसकी बाइक अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे खड़े पेड़ से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

पुलिस शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई शुरू की। आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ कर दुर्घटना के कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है। प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार बताई जा रही है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।

इस हादसे के बाद मृतक के परिवार में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। क्षेत्र के लोगों ने भी घटना पर दुख व्यक्त किया है। लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को लेकर लोगों ने वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन करने और सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की अपील की है। पुलिस ने भी लोगों से तेज रफ्तार से वाहन न चलाने और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी है।

श्मशान घाट में युवक को बुलाकर डॉक्टर ने किया अशोभनीय हरकत, सिविल सर्जन के खिलाफ कलेक्टर से हुई शिकायत

*संवेदनशील अंगों को छूने व दबाव बनाने का लगाया आरोप*


उमरिया

जिला अस्पताल उमरिया के सिविल सर्जन डॉ. के.सी. सोनी पर एक युवक ने गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में अशोभनीय हरकत, अनुचित शारीरिक संपर्क का प्रयास तथा बाद में झूठे आरोप लगाकर दबाव बनाने की बात कही गई है। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे सहित पूरे जिले में चर्चा का माहौल है।

जेल बिल्डिंग के पीछे निवासी 20 वर्षीय अरमान सोनी ने अपने आवेदन में बताया है कि 7 जून  की रात करीब 10:30 से 11 बजे के बीच सिविल सर्जन डॉ. के.सी. सोनी ने उसे सिगरेट पीने के बहाने कब्रिस्तान क्षेत्र में बुलाया। युवक का आरोप है कि वहां पहुंचने पर संबंधित अधिकारी ने उसके साथ अशोभनीय व्यवहार किया और शरीर के संवेदनशील अंगों को अनुचित तरीके से छूने का प्रयास किया। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बाद में बीयर पीने और “एन्जॉय” करने जैसी बातें कही गईं, जिससे उसे उनकी मंशा पर संदेह हुआ।

शिकायतकर्ता के अनुसार जब दोबारा अनुचित शारीरिक संपर्क का प्रयास किया गया तो उसने तत्काल अपने भाई एवं अन्य परिजनों को फोन कर मौके पर बुलाया। युवक का दावा है कि परिजनों के पहुंचने के बाद संबंधित अधिकारी ने अपनी गलती स्वीकार की। इसके बाद सभी लोग शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचे।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि अपने बचाव में संबंधित अधिकारी ने उस पर और उसके साथियों पर मारपीट तथा पैसे लूटने जैसे आरोप लगाना शुरू कर दिया। युवक का कहना है कि ऐसा वास्तविक घटना से ध्यान हटाने और उन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से किया गया। अरमान सोनी ने सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने यह भी आशंका जताई है कि प्रभावशाली पद पर बैठे व्यक्ति के कारण निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।

फिलहाल आवेदन कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच चुका है। शिकायत में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, लेकिन इनकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। 

रोका गया था निर्माण, फिर शुरू हुआ कार्य, नगर परिषद कार्यालय निर्माण में नियमों की उड़ा रहे हैं धज्जियां

*800 नागरिकों सहित कई पार्षदों ने निर्माण को लेकर की थी शिकायत*


अनूपपुर

नगर परिषद बनगवा-राजनगर में निर्माणाधीन नगर परिषद कार्यालय भवन एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। आरोप है कि शासन के स्पष्ट नियमों और जनता की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए बिना स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन के निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया है। इस पूरे मामले ने नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, इस भवन निर्माण को लेकर पूर्व में स्थानीय पार्षदों एवं नगरवासियों द्वारा विधिवत शिकायतें की गई थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि भवन निर्माण कार्य बिना आवश्यक तकनीकी स्वीकृतियों और ड्राइंग-डिजाइन के शुरू किया जा रहा है। मामला भोपाल तक पहुंचने के बाद विभागीय स्तर पर संज्ञान लिया गया था तथा संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब भी किया गया था। इसके बाद कुछ समय के लिए निर्माण कार्य रोक दिया गया था।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि जैसे ही प्रशासनिक परिस्थितियां बदलीं, नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों और उपयंत्री द्वारा बिना किसी सार्वजनिक जानकारी एवं बिना ड्राइंग-डिजाइन की अंतिम स्वीकृति प्राप्त किए निर्माण कार्य पुनः शुरू करा दिया गया। जबकि नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन के बिना किसी भी शासकीय भवन का निर्माण प्रारंभ नहीं किया जा सकता।



स्थानीय लोगों का कहना है कि इस भवन के निर्माण स्थल को लेकर भी व्यापक विरोध दर्ज कराया गया था। नगर के लगभग 800 नागरिकों एवं कई पार्षदों ने लिखित रूप से मांग की थी कि भवन का निर्माण किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर कराया जाए, लेकिन जनता की इस मांग को पूरी तरह नजर अंदाज कर दिया गया। आरोप है कि जनता की आवाज को दबाकर और शिकायतों को ठंडे बस्ते में डालकर निर्माण कार्य को जल्दबाजी में आगे बढ़ाया जा रहा है।

नगरवासियों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में लोगों द्वारा की गई शिकायतों, पार्षदों के विरोध और विभागीय नोटिसों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ संदेश होगा कि जनता की आवाज का कोई महत्व नहीं रह गया है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर वे भी मूकदर्शक बनकर नियमों की खुलेआम हो रही अनदेखी को देखते रहेंगे।

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