नर्मदा पुष्कर बांध में मजदूर डूबा हुई मौत, घायल कबूतर का वन्य जीव संरक्षक ने कराया इलाज


 अनूपपुर

प्रमुख पर्यटन स्थल एवं धार्मिक-आध्यात्मिक तीर्थ नगरी अमरकंटक स्थित नर्मदा नदी के प्रथम पुष्कर बांध में गुरुवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे में वार्ड क्रमांक 2 बराती निवासी 45 वर्षीय सुरेश सिंह धुर्वे की डूबने से मृत्यु हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में शोक एवं सनसनी का माहौल बना हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक सुरेश सिंह धुर्वे पिता नर्बद लाल सिंह धुर्वे गुरुवार सुबह लगभग नौ दस बजे के बीच घर से इंडियन गैस एजेंसी में गैस सिलेंडर ट्रक खाली कराने के कार्य के लिए निकला था। घर से निकलते समय उसने अपनी भाभी से कहा था कि वह कुछ पैसे कमाकर शीघ्र वापस लौट आएगा। कार्य समाप्त करने के बाद वह मोटरसाइकिल से नर्मदा पुष्कर बांध पहुंचा और नहाने के उद्देश्य से बांध के किनारे अपने कपड़े एवं चप्पल उतारकर पानी में उतर गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुरेश सिंह धुर्वे ने बांध की पटरी से गहरे हिस्से की ओर कूदा। वहां मौजूद लोगों ने उसे  मना भी किया, लेकिन उसने उनकी बात अनसुनी कर पानी में छलांग लगा दी। कुछ देर बाद जब वह पानी से बाहर नहीं निकला तो आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाते हुए बचाव का प्रयास किया।

बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर वह डूबा, वहां पानी की गहराई लगभग 35 से 40 फीट है। अत्यधिक गहराई होने के कारण स्थानीय तैराकों एवं गोताखोरों ने अंदर जाने से मना कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन घटनास्थल पर पहुंच गया तथा अनूपपुर जिला पुलिस बल से एसडीआरएफ के गोताखोरों को बुलाया गया। घटना के बाद पुष्कर बांध तट पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।

*घायल कबूतर का वन्यजीव संरक्षक ने कराया उपचार*

अनूपपुर जिला मुख्यालय के नए तहसील परिषर के अभिभाषक कक्ष में पंखा से टकरा जाने पर एक कबूतर के घायल होने की सूचना पर, वन्यजीव संरक्षक अनूपपुर द्वारा कबूतर को अपनी आभिरक्षा में रखकर पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों से उपचार कराते हुए निगरानी में रखने हेतु अपने प्रतिष्ठान में सुरक्षित रखते हुए कबूतर के खाने,पीने की व्यवस्था की, घायल कबूतर के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार आ रहा है।

नगर पालिका परिषद अनूपपुर के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रामखेलावन राठौर ने जिला मुख्यालय अनूपपुर के वन्यजीव संरक्षक शशिधर अग्रवाल को सूचना दी की, नवीन तहसील परिसर के अधिवक्ता कक्ष में खिड़की से उड़कर दूसरी ओर जा रहा एक कबूतर पंखा के ब्लेड से टकराकर घायल स्थिति में जमीन में पड़ा है। सूचना पर वन्यजीव संरक्षक शशिधर अग्रवाल अपने सहयोगी सर्पपहरी छोटेलाल यादव एवं मोहन सिंह के साथ स्थल पर पहुंचकर गंभीर रूप से घायल कबूतर को अपनी अभिरक्षा में लेकर कृत्रिम गर्भाधान केंद्र पसला में पदस्य पशु चिकित्सा क्षेत्राधिकारी से इलाज करवाया, पंखा के ब्लेड से टकराने पर दोनों पंखो में एवं शरीर के अन्य स्थलो पर गंभीर चोट से पीड़ित कबूतर को श्री अग्रवाल ने अपने प्रतिष्ठान में कबूतर को रखकर पानी एवं खाना की सामग्री की व्यवस्था की। कुछ घंटे बाद गंभीर रूप से घायल कबूतर के सही समय पर उचित उपचार हो जाने पर स्वास्थ्य में कुछ सुधार आने से वह स्वयं पानी पीते हुए पका हुआ चावल एवं चावल की कनकी के दानों को खाकर उदर पोषण करते हुए प्रतिष्ठान के अंदर विचरण कर रहा है।


कोयला खदान में रोजगार न मिलने पर आदिवासियों ने खोला मोर्चा, एसईसीएल कार्यालय का किया घेराव


शहडोल

जिले के एसईसीएल सोहागपुर अंतर्गत रामपुर-बटुरा परियोजना क्षेत्र में स्थानीय आदिवासी ग्रामीणों, किसानों और जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा। निजी ठेका कंपनी जय अम्बे पर स्थानीय लोगों की अनदेखी कर बाहरी लोगों को नौकरी देने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने उप क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के समय प्रभावित परिवारों और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन वर्षों बाद भी उन्हें नौकरी नहीं दी गई। इसके उलट कंपनी द्वारा बाहरी लोगों को रोजगार दिया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार अमलाई थाना क्षेत्र के रामपुर गांव के आदिवासी ग्रामीण, किसान और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में एसईसीएल सोहागपुर अंतर्गत संचालित रामपुर बटुरा ओसीएम पहुंचे। यहां कोयला और ओबी उत्खनन का कार्य कर रही निजी ठेका कंपनी जय अम्बे के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया गया।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रोजगार मांगने पहुंचे लोगों के साथ कंपनी अधिकारियों ने अभद्र व्यवहार किया और गाली-गलौज की। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के अधिकारियों अंशुल त्रिपाठी और आलोक त्रिपाठी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

ग्रामीणों ने एसईसीएल प्रबंधन को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि एक सप्ताह के भीतर स्थानीय प्रभावित परिवारों को रोजगार दिया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी कंपनी और प्रबंधन की होगी। 

रेलवे भूमि पर अवैध कब्जे और नोटिस वसूली का खेल, 45 वर्षों से बसे परिवारों और दुकानदारों पर कार्रवाई की तैयारी

*रेलवे अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप, लोगों में आक्रोश*


अनूपपुर/कोतमा

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अनूपपुर-अंबिकापुर रेल मार्ग स्थित कोतमा रेलवे स्टेशन परिसर में रेलवे भूमि पर वर्षों से निवास और व्यवसाय कर रहे लोगों को रेलवे प्रशासन द्वारा पुनः नोटिस जारी किए जाने के बाद क्षेत्र में नाराजगी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि रेलवे अधिकारी बीते चार दशकों से केवल नोटिस देकर वसूली की प्रक्रिया अपनाते रहे, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार रेलवे स्टेशन परिसर और उससे लगे क्षेत्रों में लगभग 40 से 45 वर्षों से अनेक परिवार मकान बनाकर निवास कर रहे हैं तथा कई लोग दुकानें संचालित कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। हाल ही में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, मनेन्द्रगढ़ कार्यालय की ओर से कथित अतिक्रमण हटाने के संबंध में नोटिस जारी किया गया है, जिसमें सात दिवस के भीतर भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि निर्धारित समय सीमा में अतिक्रमण नहीं हटाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि रेलवे विभाग द्वारा समय-समय पर नोटिस जारी कर केवल औपचारिकता निभाई जाती रही है। लोगों का कहना है कि कई बार कब्जाधारियों से कथित रूप से अवैध वसूली भी की गई, लेकिन न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही भूमि का नियमितीकरण किया गया। नागरिकों ने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने रेलवे भूमि पर कब्जा कर उसे अन्य लोगों को बेच दिया तथा नए निर्माण भी कराए गए, जिसमें स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।

मामला नगर के वार्ड क्रमांक 9 इस्लामगंज और टैक्सी स्टैंड से जुड़ी रेलवे भूमि का बताया जा रहा है, जहां दर्जनों की संख्या में दुकानें और मकान निर्मित हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि रेलवे प्रशासन वास्तव में कार्रवाई करना चाहता है तो पहले वर्षों से निवासरत गरीब परिवारों और छोटे व्यापारियों के पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। लोगों ने मांग की है कि रेलवे विभाग लीज अथवा किराया प्रणाली लागू कर भूमि का वैध आवंटन करे, जिससे रेलवे को राजस्व प्राप्त हो और स्थानीय लोगों को भी राहत मिल सके। लोगो ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए रेलवे के उच्च अधिकारियों एवं जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की है।

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