तीन दिन से लापता गांव के तालाब में डूबने से 52 वर्षीय वृद्ध की मौत


अनूपपुर

कोतवाली थाना अनूपपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत सकरा के निदावन गांव में 1 फरवरी की रात से गुमे एक 52 वर्ष की व्यक्ति का शव गांव के तालाब के अंदर मृत स्थिति में तीन दिन बाद कड़ी मेहनत के पर मिल सका,जिस पर कोतवाली पुलिस द्वारा कार्यवाही की जा रही है।


इस संबंध में मिली जानकारी अनुसार ग्राम निदावन निवासी 52 वर्षीय रामलाल कोल पिता स्व,डोमारी कोल जो मजदूरी एवं घरेलू कार्य करता रहा 1 फरवरी की रात 7-8 बजे के बीच अपने साथी श्यामलाल पिता छोटेलाल अगरिया के साथ गांव के किनारे लल्ला कोल के यहां शराब पीने बाद वापस घर आ रहा था लेकिन वह घर नहीं पहुंचा दूसरे दिन सुबह गांव के नया तालाब के पगडंडी रास्ते में रामलाल का जूता एवं गमछा मिलने पर परिजनों तथा ग्रामीणों द्वारा खोजबीन की गई किंतु किसी भी तरह की जानकारी न मिलने के कारण ग्राम पंचायत सकरा सरपंच संतोष सिंह को जानकारी देते हुए कोतवाली थाना अनूपपुर में गुमने की सूचना दर्ज कराई संदेह के आधार पर पुनः ग्रामीणों द्वारा दूसरे दिन तालाब में खोजबीन की गई वहीं कोतवाली पुलिस द्वारा जिला होमगार्ड अनूपपुर के सहयोग से तालाब में खोजबीन कराए जाने के बाद शुक्रवार की देर शाम तक कुछ नहीं मिल सका जिस पर पुनः शनिवार की सुबह ग्राम पंचायत सकरा की मदद से जेसीबी के द्वारा तालाब की मेढ खोदकर पानी निकाला गया पानी के कम होते ही रामलाल मृत स्थिति में तालाब के बीच झाड़ियों में फंसा हुआ मिला जिसे बाहर निकालकर कोतवाली पुलिस अनूपपुर के उप निरीक्षक अजय सिंह टेकाम एवं सहा,उपनिरीक्षक संतोष वर्मा द्वारा परिजनों एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में मृतक के शव का पंचनामा कर शव के पीएम हेतु शव वाहन से जिला चिकित्सालय अनूपपुर भेजा गया मृतक के शरीर में किसी भी तरह की गंभीर चोट के निशान नहीं मिले जबकि मृतक के माथा एवं आंख के पास वह दोनों पैरों के घुटने के पास खरोचदार निशान मिले मिले हैं,प्रारंभिक जांच दौरान मृतक की मृत्यु पानी में डूबने से होना प्रतीत होता है।

 

ट्रेलर ने मारी ठोकर 1 की मौत, मंदाकिनी बस अनियंत्रित होकर घुसी दीवार में, घायल अस्पताल में भर्ती


अनूपपुर/जैतहरी

अनूपपुर जिले के जैतहरी थाना अंतर्गत अनूपपुर से वेंकटनगर जा रही मंदाकिनी कम्पनी की बस क्रमांक MP 65 P 0157 के चालक बबलू यादव निवासी ग्राम सिंघोरा के  लापरवाही पूर्वक चलाने के कारण अनियत्रित होकर आदर्श ग्राम सिवनी के समीप लगभग 11:30 बजे आदर्शग्राम निवासी अमरनाथ राठौर के दिवार को ठोकर मार दी घटना में वाहन चालक बबलु उर्फ त्रिवेणी यादव पिता फूलचंद यादव उम्र 32 वर्ष फूलचन्द्र पिता नत्थू नापित उम्र 43 वर्ध निवासी चोरभटी कृष्ना यादव पिता रूपी यादव उम्र 18 वर्ष निवासी सुलखारी, मीना यादव को गम्भीर चोट आई जिसे प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल के लिए रिफर कर दिया गया  वही कुछ अन्य यात्रियों को मामूली चोट आई जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है वही बस को सामने से ठोकर लगने से बस को काफी नुकसान हुआ पुलिस द्वारा घटना स्थल पर पहुँचवकर जांचपड़ताल घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैतहरी में उपचार के लिए भेज दिया गया।

दूसरे मामले में जैतहरी थाना अंतर्गत ग्राम लहरपुर के समीप अनूपपुर पेंड्रारोड़ मार्ग में बीते शुक्रवार की देर रात्रि टेलर वाहन क्रमांक ने दुपहिया वाहन सवार को लापरवाही से चलाते हुए जोरदार ठोकर मार दी जिससे दुपहिया वाहन सवार अर्जुन सिंह गोंड़ पिता लालसिंह गोंड़ उम्र 23 वर्ष निवासी छातापटपर की घटना स्थल पर ही मृत्यु हो गई जिसकी जानकारी स्थानीय लोगो द्वारा जैतहरी थाने को दी पुलिस द्वारा टेलर को जब्त कर लिया गया वही मृतक का पंचनामा बनाकर मर्ग कायम करते हुए पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौप दिया पुलिस द्वारा जांच पड़ताल की जा रही है ।

अनामिका को मिला सातवें वार्षिक कविकुंभ शब्दोत्सव समारोह में स्वयंसिद्धा सम्मान


देहरादून/मनेन्द्रगढ़

साहित्यिक मासिक 'कविकुंभ' का सातवां वार्षिक दो दिवसीय 'शब्दोत्सव' स्वयंसिद्धा सम्मान समारोह डीआईटी यूनिवर्सिटी देहरादून (उत्तराखण्ड) के वेदांता ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। 

मुख्य अतिथि डीआईटी चांसलर एन. रविशंकर, विख्यात कवि-साहित्यकार विभूति नारायण राय, साहित्य अकादमी पुरस्कृत एवं पद्मश्री लीलाधार जगूड़ी, प्रसिद्ध साहित्यकार दिविक रमेश, इंदु कुमार पांडेय, प्रदीप सौरभ उपस्थित रहे। स्वयंसिद्धा सम्मान समारोह की अध्यक्षता पूर्व कुलपति "डॉ सुधा पांडे "ने की। मुख्य अतिथि रहे डॉ एस फारुख और गेस्ट ऑफ उत्तराखंड के डीजीपी "अशोक कुमार "और विशिष्ट अतिथि रहे इंदु कुमार पांडेय" और डीआईटी की रजिस्ट्रार "वंदना सुहाग" । 

बीइंग वुमन की ओर से 'स्वयं सिद्धा सम्मान' से देश के विभिन्न राज्यों की उन महिलाओं को समादृत किया गया, जिन्होंने स्वयं के श्रम एवं विवेक से समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। जिसमें स्वयंसिद्धा सम्मान के लिए छत्तीसगढ़ प्रदेश से जिला MCB मनेंद्रगढ़ से कवयित्री अनामिका चक्रवर्ती को चुना गया था और उन्हें स्वयंसिद्धा सम्मान से सम्मानित किया गया।


अनामिका चक्रवर्ती की कविताएं एवं कहानी,लेख आदि देश की विभिन्न महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित हो रही हैं साथ ही वे जमीनीस्तर पर महिलाओं की मानसिक और भावनात्मक एवं सामाजिक जागरूकता के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं जिसके लिए वे समय समय पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी करती हैं। शब्दोत्सव स्वयंसिद्धा सम्मान समारोह के दूसरे दिन के काव्य पाठ सत्र में अनामिका चक्रवर्ती एवं देश के अलग अलग प्रदेशों से आए कवियों ने अपनी कविताओं का मंच से पाठ किया।


दो दिवसीय कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में से परिचर्चा सत्र में, 'किस दिशा में जा रहा साहित्य और आज क्या दिशा होनी चाहिए !' विषय पर लीलाधर जगूड़ी, विभूति नारायण राय, दिविक रमेश और प्रदीप सौरभ ने विचार व्यक्त किए। दिविक रमेश ने कहा, आज का समय बहुत कठिन है। लगता है कि हम बहुत व्यापक और  लिजलिज़े दलदल में फँसे हैं। हम दुस्साहस नहीं कर पा रहे हैं। साहित्य दुस्साहस का नाम है। हम अगर अपने समाज को, समय को, अपनी किताबों, अपनी कथाओं में हाशिए के लोगों को व्यक्त नहीं करते तो हम अपने समाज के साथ अन्याय करते है। आज सबसे बड़ी चुनौती अपने समय को व्यक्त करने, अंतरद्वन्द को चित्रित करने की है, और सबसे बड़ी है सत्य बोलने कि चुनौती। यह समय सवाल उठाने का, अपने समय को व्यक्त करने का है।


सुपरिचित उपन्यासकार, पत्रकार प्रदीप सौरभ ने कहा, साहित्य मनुष्यता को बचाता है और साहित्य ही बची हुई मनुष्यता को बेहतर बनाता है। साथ-साथ साहित्य आवाज़ देता है उन्हें, जिनकी आवाज़ होती ही नहीं या जिनके गले को दबा के रखा जाता है। रचना हो जाने के बाद स्वयं रचनाकार के लिए भी एक चुनौती हो जाती है।


शब्दोत्सव स्वयंसिद्धा सम्मान समारोह में कविकुंभ एवं बिइंग वुमन की राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजिता सिंह फलक एक उनकी टीम को गरिमामय आमंत्रण के लिए धन्यवाद देते हुए अनामिका चक्रवर्ती ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र और विभिन्न उच्च पदों पर महिलाओं की संख्या बढ़ने के बावजूद महिलाएं अभी भी घरेलू हिंसा और सामाजिक शोषण का शिकार हो रही हैं तो जरूरी है कि उनमें शिक्षा और आत्मनिर्भरता के साथ आत्म रक्षा और हिंसा और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने का भी साहस आए ज़रूरत है कि वे स्वयं को जागरूक करें और अपनी रक्षा करने के लिए मजबूत बने।

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