हजारों के सोने के जेवरात, मोबाइल, रखा बैग महिला यात्री को सुपुर्द कर आरपीएफ ने निभाया फर्ज


अनूपपुर

ट्रेनो के अकसर यात्रियों का सामान छूट जाता हैं जिसे रेलवे सुरक्षा बल पता करके यात्रियों को सुपुर्द करती है रेल सुरक्षा बल की सक्रियता से सारनाथ एक्सप्रेस के समय में हजारों का सामान सहित एक हैंडबैग को प्लेटफार्म से बरामद कर सामान के महिला यात्री को सौप कर अपना फर्ज रेल सुरक्षा बल ने निभाया। 11 जनवरी 2023 को गाड़ी संख्या 15159 सारनाथ एक्सप्रेस अनुपपूर प्लेटफार्म नंबर 1 पर सुबह समय 4 बजकर 4 मिनट आयी रेल सुरक्षा बल स्टेशन में चेक कर रहे थे उसी दौरान प्लेटफार्म नं. 1 पर एक ब्राउन कलर की हैंड बैग पड़ा था जिसे लाकर रेसुब पोस्ट अनुपपूर में सुरक्षित रखा गया था समय लगभग 5.00 बजे एक महिला आर. पी. एफ. पोस्ट अनुपपूर आकर बैग सबंधित पूछ ताछ करने पर बैग को दिखाया गया वह बैग को अपना होना बताई नाम व पता पूछने पर सरिता राठौर पति आर. एस. राठौर उम्र 24 वर्ष निवासी वार्ड नंबर 01 ग्राम सेंदुरी थाना जिला व अनूपपुर (म.प्र.) होना बताई मोबाइल नंबर 8415 917 989 है वे गाड़ी संख्या 15159 के कोच संख्या B/1 के बर्थ नंबर 10,15 जिसका पीएनआर नंबर 2614 48 5147 प्रयागराज से अनूपपुर तक यात्रा करना बताई एवं बताई कि ज्यादा समान होने के कारण हैंडबैग को प्लेटफार्म में भूलना जाना बताई हैंड बैग में एक सोने का एक तोले का मंगलसूत्र जिसकी कीमत 60,000 रुपए एवं एक ओप्पो कंपनी की मोबाइल जिसकी कीमत 15,000 रुपए एवं 04 जोड़ी चांदी का बिछिया एवं एक चार्जर तथा अन्य मेकअप का सामान था जिसकी कुल कीमत लगभग 80,000 रुपए होना बताई जिसे उपस्थित गवाहों के समक्ष कागजी कार्यवाही कर उचित दस्तावेज प्रस्तुत करने पर सही सलामत सुपुर्द किया गया।

कैसे हमारे सुबह के अखबार हो गए- एक-एक करके तेरे तरफदार हो गए, प्रलेस कवि सम्मेलन में हुआ रचना पाठ


देवास

प्रगतिशील लेखक संघ राज्य कार्यकारिणी की बैठक के अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में अनेक कवियों- कवियत्रियों ने समसामयिक संदर्भों में रचना पाठ किया। कवि सम्मेलन की सदारत श्रीमती प्रतिभा चन्द्र कुमारी ने की। मंच की शोभा सर्व श्री विनोद मंडलोई, अजीज रोशन, ओकारेश्वर गोयल, कैलाश सिंह राजपूत श्रीमती कुसुम वागड़े ने बढाई। संचालक थे डॉक्टर जुगल किशोर राठौर।

                इस अवसर पर वरिष्ठ शायर इस्माइल नज़र शेख ने अपनी ग़ज़ल में मीडिया पर शासकों और कार्पोरेट के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करते हुए पढ़ा कि *कैसे हमारे सुबह के अखबार हो गए- एक-एक करके तेरे तरफदार हो गए। हालात ने शरीफों को मजबूर कर दिया, डाकू- लुटेरे साहिबे दस्तार हो गए* बेटियों पर उन्होंने ग़ज़ल में कहा कि *जन्नत हमारे घर को बनाती है बेटियां...* राधेश्याम पांचाल ने अपने मुक्तक में कहा कि *मेरी ग़ज़ल में प्यार के सपने टटोलना, एकाकी रात में कभी दिल को खोलना...* अजीम भाई ने पढ़ा *शोहरत मिली तो सुहाने लगे मुझे, इस मोड़ पर आने में जमाने लगे मुझे। मेरे अजीज भी कमजर्फ लोग हैं, एहसान करके जताने लगे मुझे।* वतन के प्रति अपनी मोहब्बत को का इजहार करते हुए अजीज वारसी ने ग़ज़ल में कहा *इश्क और अम्न की पहचान कहा मैंने, दिल कहा कभी जान कहा मैंने। जब भी पूछा क्या है अजीज ?, चूम कर मिट्टी हिंदुस्तान कहा मैंने।     अंधविश्वासों की बेचैनी को श्रीमती कुसुम वागड़े ने इस तरह व्यक्त किया  *धार्मिक जालों में फंसी मैं छटपटा रही मकड़ी की तरह...* को सराहा गया। वर्तमान संदर्भों पर राजेश चौधरी ने कहा कि *न चांद न चकोर पर, गीत लिख रहा हूं आज के हालात पर। मजदूरों के घाव पर छाले पड़े पांव पर, गीत लिख रहा हूं उजड़े हुए गांव पर।* डॉ उमा श्रीवास्तव ने बेटी का मां के साथ संवाद कविता के माध्यम से परिवारों में बेटियों के पक्ष को उजागर किया। श्रीमती प्रतिभा चंद्र कुमार ने उद्घोष करते हुए कहा कि *पीछे नहीं हटेंगे, आत्मबल से बढ़कर आगे हम बढ़ेंगे* सम्मेलन में दीप्ति निगम, आशीष कुशवाह, प्रीति चौधरी, केसी नागर, रेखा उपाध्याय, डॉ शिव नंदन वर्मा, पवन कुमार मालवीय, बबीता चौहान, श्रीमती पदमा, गुलरेज अली, अकबर, चांद अंजुम ने भी अपनी रचनाएं सुनाई। प्रारंभ में जनगीत मुस्कान ने प्रस्तुत किया। आभार माना रमेश चंद्र जोशी ने।

नव सीखिए करेंगे मेला का आयोजन ओपीएम प्रबंधन आस्था पर कर रहा कुठाराघात


अनूपपुर

आस्था की डुबकी लगाने का स्थान हुआ नदारद जिम्मेदार कौन मकर संक्रांति के पावन पर्व पर लगने जा रहा बरगवां अमलाई नगर परिषद का ऐतिहासिक मेला नवसीखियो के सहारे हो रही व्यवस्थाएं महज आधा अधूरा साफ सफाई सुविधा का अभाव  कोरोना गाइडलाइन से परे अव्यवस्थाओं के बीच मेला मैदान में सिर्फ और सिर्फ कुछ फर्जी भर्ती कर्मचारियों की निगरानी में इतनी बड़ी जिम्मेदारी का दायित्व सौंप कर नगर परिषद की मुख्य नगर पंचायत अधिकारी दो जगहों का प्रभार लेकर स्थाई तौर पर व्यवस्थाओं के प्रति सजग नहीं। मेला मैदान में भरी पड़ी समस्याओं से अवगत कराने के बावजूद भी अनजान अनभिज्ञ जनप्रतिनिधि होने वाले अपार भीड़ को नियंत्रण करने की व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं की गई है। अभी भी हनुमान मंदिर के आसपास मेला मैदान एवं मुख्य मार्ग पर बड़े-बड़े ठूठ निकले हुए हैं जो  परेशानी का सबब बना है।

ज्ञात हो कि मुख्य नगर पंचायत अधिकारी का अलग-अलग जगहों में प्रभार होने की वजह से बरगवां अमलाई नगर परिषद अंतर्गत शासन के द्वारा संचालित हितग्राही मूलक योजनाओं के लाभ से यहां के गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले बीपीएल परिवार उज्जवला योजना आयुष्मान कार्ड एवं अन्य जन कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं नगर परिषद कार्यालय मैं अपनी मर्जी के मुताबिक कर्मचारियों का चयन कर भर्ती किया गया है जिन्हें शासन की योजनाओं के विषय में एवं उनके क्रियान्वयन की जानकारी नहीं है ऐसे लोगों के द्वारा हितग्राहियों को गुमराह किया जा रहा है।

*ओपीएम प्रबंधन अटका रहा रोड़ा।*

सनातन धर्म प्रेमियों एवं पुरातन रीति-रिवाजों एवं परंपराओं के बीच मकर संक्रांति के पावन पर्व पर जब श्रद्धालुओं भक्तों के द्वारा नदियों में आस्था की डुबकी लगाने के लिए स्थान ढूंढ रहे हैं ज्ञात हो कि ओरिएंट पेपर मिल कागज कारखाना के द्वारा सोन नदी में बैराज बांध निर्माण कर एवं स्टॉप डेम बनाकर सोन नदी तक जाने वाले मुख्य मार्ग को बाधित कर दिया गया जहां पर आने वाले लोगों के द्वारा स्नान पूजा व्रत जैसी धार्मिक अनुष्ठानों का पालन किया जाता रहा है वही आस्था की डुबकी लगाकर   ख्याति प्राप्त सिद्ध दक्षिण मुखी हनुमान जी महाराज की पूजा अर्चना की जाती रही है अब उससे वंचित हो गए क्योंकि ओरियंट पेपर मिल के द्वारा उस स्थान को और मार्ग को पूर्ण रूप से लुप्त और बाधित करने का प्रयास किया गया है।

*पूर्व पंचायत चपरासी और फर्जी भर्ती ऑपरेटर कर रहे संचालन*

बरगवां अमलाई नवीन नगर परिषद के गठन उपरांत नगर परिषद कार्यालय में नगर परिषद के अंदर पूर्व पंचायत चपरासी एवं स्वयं का सेवा केंद्र चलाने वाला कंप्यूटर ऑपरेटर अपने आप को परिषद का कर्मचारी बताता है इनके रुतबे ऐसे हैं कि आने वाले हितग्राहियों बीपीएल कार्ड धारियों गरीबों और इस क्षेत्र की भोली-भाली जनता के साथ धोखाधड़ी की जा रही है इन्हीं के मार्गदर्शन में मेला का आयोजन कार्यक्रम निर्धारण साफ सफाई वसूली नीलामी का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। क्या नगर परिषद के जनप्रतिनिधि संपूर्ण दायित्व इन्हें सौप दिए हैं अपनी अनुभव से परे इन अकुशल लोगों के सहारे इतने बड़े दायित्व से मुंह मोड़ कर चुपचाप बैठे हुए हैं।

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