वित्तीय अधिकार एवं मानदेय बढ़ाने जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्यों ने सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन


अनूपपुर 

जनपद में चुने हुए जनप्रतिनिधियों का पंचायतों में अहम भागीदारी होती हैं उसके बाद भी उनके अधिकार ग्राम पंचायत में न के बराबर है जिसके विरोध में जनपद के जनप्रतिनिधियों को इसका विरोध करने के लिए जिला मुख्यालय पहुँचना पड़ा। अनूपपुर जिले के जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के अध्यक्ष उपाध्यक्ष एवं जनपद सदस्यों ने 3 फरवरी को वित्तीय अधिकार एवं मानदेय सहित पांच सूत्री मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम अपर कलेक्टर सरोधन सिंह को ज्ञापन सौंपा गया। सौपे गए ज्ञापन पत्र में मांग की गई है कि हाल ही में आपके द्वारा प्रदेश में सदस्यों सरपंच गणों के सम्मेलन में ग्रामीण विकास को दृष्टिगत रखते हुए सरपंच गणों के मानदेय मे बढ़ोतरी एवं 25 लाख तक के निर्माण कार्य कराने के अधिकार दिए गए हैं जो सराहनीय है किंतु हम जनपद पंचायत सदस्य गण भी पंचायत राज व्यवस्था के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं ।एक जनपद सदस्य 5 से 6 पंचायतों से निर्वाचित होकर आते हैं इसके बाद अध्यक्ष उपाध्यक्ष जनप्रतिनिधियों को ग्राम के विकास एवं निर्माण कार्यों हेतु कोई अधिकार नहीं दिए गए हैं जो अधिकार दिए गए हैं वह ना के बराबर हैं अतः हम समस्त जनपद पंचायत पदाधिकारियों अध्यक्ष उपाध्यक्ष एवं जनपद सदस्य गणों को उनके क्षेत्र के विकास के लिए विकास निधि एवं शिक्षा अनुदान राशि के अधिकार दिए जाएं । जनपद पंचायत अध्यक्ष को विकास निधि से डेढ़ करोड़ एवं स्वेच्छानुदान 25 लाख जनपद पंचायत उपाध्यक्ष को विकास निधि 50 लाख एवं स्वेच्छानुदान 2.5 लाख जनपद सदस्य गणों को विकास निधि 25 लाख एवं स्वेच्छानुदान 1लाख के बजट प्रदान किए जाएं। जनपद पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले समस्त विभागों के विभागीय बजट के अनुमोदन का अधिकार जनपद पंचायत की सामान्य सभा व सामान्य प्रशासन समिति को दिया जाए। जनपद पंचायत के समस्त योजनाओं वित्तीय नस्ती एवं प्रशासनिक नस्ती के अनुमोदन का अधिकार जनपद पंचायत के अध्यक्षों को दिया जाए ।जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ क्षेत्र में आर्थिक सहायता से अनुदान वितरण का अधिकार दिया जाकर एक करोड़ के बजट की व्यवस्था की जाए। जनपद पंचायत अध्यक्ष का वेतन 45 हजार एवं स्टेशनरी भत्ता 15 हजार जनपद पंचायत उपाध्यक्ष का वेतन 25 हजार स्टेशनरी भत्ता 20 हजार जनपद सदस्य गणों का मानदेय 15 हजार एवं स्टेशनरी भत्ता 1 हजार दिया जाए।

भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष समिति का हुआ गठन 


शहडोल 

शहडोल के कुछ प्रमुख नागरिकों ने नए वर्ष में एक बैठक करके शहडोल संभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार से संघर्ष करने के लिए एक समिति बनाने का निर्णय लिया है, ताकि भ्रष्टाचार का संगठित विरोध किया जा सके। बैठक के सभी सदस्यों का मानना था कि अभी वर्तमान में कोई भी दल या संगठन भ्रष्टाचार से ठीक ढंग से नहीं लड़ लग पा रहा है। भ्रष्टाचार करने वाले काफी ताकतवर और साधन संपन्न लोग हैं ।जिनके विरोध के लिए संगठित होना आवश्यक है। इसलिए संगठन बनाया जा रहा है ताकि भ्रष्टाचार का सामूहिक विरोध किया जा सके।

भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष समिति का संयोजक पत्रकार रामअवतार गुप्ता को नियुक्त किया गया है। बैठक में सुशील सिंघल, सुशील जसवानी, रितुपर्ण दुबे, रविंदर गिल एवं कैलाश तिवारी उपस्थित रहे।

समिति आगामी बैठक में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान किस ढंग से संचालित किया जाना है इसकी रूपरेखा  तय किया जाकर अंतिम रूप दिया जाएगा। इस बैठक में उन सभी जागरूक नागरिकों को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा जो भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में अलग-अलग अपने स्तर मैं लगे हुए हैं।

जनप्रतिनिधियों का अमर्यादित आचरण नाकाबिले बर्दास्त- भूपेश शर्मा


अनूपपुर

असंसदीय, असंवैधानिक और अमर्यादित आचरण की छूट किसी को नही है । ऐसा व्यवहार सर्वथा निंदनीय और अस्वीकार्य है। जनप्रतिनिधि इसके पहरुआ होते हैं, उनकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वे समाज में संसदीय, संवैधानिक और मर्यादित आचरण की परंपरा विकसित करें और उसके खिलने-फैलने का वातावरण बनाएं । लेकिन जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी जबाबदेही से मुंह मोड़कर जब खुद ही अमर्यादित आचरण करने लगें तो समाज को उन्हें आईना दिखाने के लिए आगे आना ही चाहिए ।* 

यह विचार गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता भूपेश भूषण ने व्यक्त किये । उन्होंने कहा कि वे कोतमा विधायक के वायरल वीडियो से हतप्रभ हैं । आपने कहा कि शाहीन बाग आंदोलन के समय केंद्र में सत्तारूढ़ दल के एक नेता ने दिल्ली में रिवाल्वर लहराते हुए समुदाय विशेष के विरुद्ध घृणा और हिंसा का प्रदर्शन कर देश को झकझोर दिया था। तब भी हमने उसकी निंदा की थी और इस घटना की भी हम निंदा करते हैं। हम यद्यपि वायरल वीडियो की सच्चाई का दावा नही करते लेकिन हम यह जरूर चाहते हैं कि राज्य सरकार मामले का स्वतः संज्ञान लेकर उसकी विधिवत जांच कराए और यदि उसमें सच्चाई पाई जाए तो उस पर कानूनी कार्यवाही करे ।  

हर्ष और उल्लास व्यक्त करने का यह कोई तरीका नही हो सकता। हिंसा और हिंसक साधनों का प्रदर्शन किसी भी सभ्य समाज के लिए नाकाबिले बर्दास्त होना चाहिए। गांधी विचार के संगठन मध्यप्रदेश सर्वोदय मंडल से जुड़े भूपेश भूषण ने कहा कि कोतमा विधायक को इस घटना के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी चाहिए ।

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