फिर सुलग रही असंतोष की आग, पॉवर प्रोजेक्ट्स, कोल ब्लॉक्स जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया से किसानों में भारी नाराजगी

फिर सुलग रही असंतोष की आग, पॉवर प्रोजेक्ट्स, कोल ब्लॉक्स जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया से किसानों में भारी नाराजगी

*1330 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण, बनने जा रहा पॉवर हब या विनाश का हब*


( मनोज द्विवेदी, संपादक ,दैनिक कीर्तिक्रांति, अनूपपु्र ,मप्र )

अनूपपुर

मध्यप्रदेश -छत्तीसगढ़ का सीमावर्ती जनजातीय जिला एक बार फिर असंतोष की आग मे सुलग रहा है। जिले को पॉवर हब बनाने की कोशिशों के बीच किसानों की जमीन अधिग्रहण की अराजक प्रक्रिया जारी है।  जिसमे लोगों का  खुला आरोप है कि किसानों , जमीन मालिकों , क्षेत्र के पर्यावरणीय हितों की अनदेखी जमकर की जा रही है।इससे एक बार फिर लोगों के जेहन मे मोजर बेयर पॉवर प्लांट जमीन अधिग्रहण के दौरान हुई हिंसा की याद ताजा हो गयी।

अनूपपु्र जिले मे चचाई पॉवर प्लांट, हिन्दुस्तान पॉवर ( मोजर बेयर  ) जैतहरी,  टोरंट पॉवर ( न्यू जोन ) रक्सा  , अडानी पॉवर ( वेल्सपन कम्पनी ) छतई , उमरदा ,मझगंवा ( बिजुरी ) के बाद लामाटोला कोल ब्लॉक अन्तर्गत बसखली, लामटोला, रेउला और गढ़ी में प्रस्तावित कोयला परियोजना हेतु लगभग  1030 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के कारण किसानों मे भारी आक्रोश है।

जमीन मालिक ,किसानों ,स्थानीय लोगों मे विस्थापन, मुआवजा, रोजगार, सामुदायिक कल्याण के कार्यों  के साथ व्यापक पर्यावरणीय चिंताएं हैं। किसानों, मजदूरों, बेरोजगारों ,स्थानीय निवासियों, व्यवसायियों, समाजसेवियों, नेताओं, व्यापारियों, पत्रकारों की अपनी - अपनी चिंताएं हैं। 

जनप्रतिनिधियों ,अधिकारियों को यह समझना होगा कि  ऐसे भीषण  डेवलपमेंट से स्थानीय लोगों की चिंता यदि आक्रोश मे बदलती है तो यह केवल चुनावी मुद्दा नहीं है। इसका जिले और प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी व्यापक असर पडता है।

मोजर बेयर पॉवर प्लांट हेतु जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया मे व्यापक हिंसा हुई थी।  पत्रकारिता और समाज की नई पीढी को शायद पता भी ना हो कि तब जमीन अधिग्रहण के दौरान बंद कंटेनर मे हिंसक महिलाओं की भीड तेल डाल कर आग लगा रही थी, जिसमे कंपनी के लोग और अधिकारी जान बचाने के लिये छुपे हुए थे।

एक गाँव मे एसडीओपी सहित पुलिस और राजस्व के अधिकारियों को दस घंटे भीड ने बंधक बना रखा था । तब कलेक्टर कवींद्र कियावत ने वरिष्ठ पत्रकारों और एडीएम को मौके पर भेजा था ,तब जाकर लोग रिहा हुए।

इसके बाद किसान नेता राकेश टिकेत की उपस्थिति मे मोजर बेयर के गेट पर भारी हिंसा हुई। एसपी एन पी वरकडे सहित बहुत से पुलिस और राजस्व अधिकारी गंभीर रुप से घायल हुए थे। एसपी को तो लगभग मार ही डाला गया था। पत्रकारों ने अपनी जान पर खेल कर कलेक्टर जे के जैन और एसपी की जान बचाई थी।पुलिस फायरिंग हुई,बल प्रयोग हुआ ,तब जाकर घंटों बाद स्थिति नियंत्रण मे आई।

तब और अब मे बडा अन्तर ये है कि उस वक्त की पत्रकारिता जन सरोकार से जुडी हुई,जनता और जिले के हित मे ईमानदार पत्रकारिता थी। गाँव के लोगो ने पत्रकारिता और पत्रकारों के प्रति विश्वास कायम था। हम लोग जनता के गुस्से और भीड की हिंसा के बीच भी उनके साथ, उनके लिये संघर्ष करते थे। किसी पत्रकार पर तब ना कम्पनी की दलाली का आरोप लगा और ना किसी ने पत्रकारों से बदतमीजी की।।इसके बाद हुए 2018 के विधानसभा चुनाव मे भाजपा अनूपपु्र जिले की तीनों सीटें हार गयी। मध्यप्रदेश से भाजपा की सरकार चली गयी।‌

दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से आज परिस्थितियों मे बहुत अन्तर है।  अविश्वास और मर्यादा का बडा संकट है । इसलिये जिले के प्रत्येक सेक्टर मे अराजकता ,अविश्वास और येन केन लाभवंती बनने का माहौल होने से आम लोगों मे बेचैनी ,गुस्से की हद तक जा पहुंचा है। शासन , प्रशासन  और समाज के जिम्मेदार वर्ग को जवाबदेही लेनी होगी। 

यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास के सभी कार्यों के कारण एक भी किसान ,जमीन मालिक के हितों की अनदेखी ना हो। उसे जमीन के बाजार मूल्य से बढकर ,उसकी सहमति का मुआवजा दिया जाए। परिवार के लिये रोजगार सुनिश्चित हो‌ । सामुदायिक कार्यों और पर्यावरणीय हितों का समुचित ध्यान रखा जाए। 

ऐसे सभी बडे कार्यों से सदियों पुरानी बसाहट, गांव ,नदी - नालों की भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व्यवस्था मे आमूल - चूल परिवर्तन होता है‌ । यह लोगों की अपने घर, खेत, जमीन ,बसाहट से भावनात्मक लगाव पर आघात करता है। इन सब तथ्यों को ध्यान नहीं रखा जाएगा तो लोगों के असंतोष ,उनके गुस्से को हवा देने वाले बहुत से लोग हैं ।

 हमारा अनूपपु्र जिला एक बार फिर असंतोष, नाराजगी के कारण अराजक हिंसा का शिकार ना बने ,यह देखना शासन - प्रशासन , जनप्रतिनिधियों, जवाबदेह सच्चे पत्रकारों , समाजसेवियों की जिम्मेदारी है। मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार , पर्यावरणीय प्रभाव , सामुदायिक कल्याण के कार्यों पर ईमानदारी से कार्य होना चाहिये।

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