पयारी में 'कागजी तालाब' पर 50 हजार का भुगतान, शिकायत के बाद भी मौन अधिकारी CEO की नीयत पर गंभीर सवाल
*कागजो में लबालब तालाब, जमीन पर गायब, मजदूरों का हो रहा आर्थिक शोषण*
अनूपपुर
जनपद पंचायत अनूपपुर के तहत आने वाली ग्राम पंचायत पयारी नम्बर 01 में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक तानाशाही का ऐसा घिनौना खेल उजागर हुआ है, जिसने पूरी व्यवस्था को बेनकाब कर दिया है। बिना एक तगाड़ी मिट्टी उठाए 'कागजी तालाब' के नाम पर ₹50,000 का अग्रिम भुगतान डकार लिया गया, तो दूसरी तरफ चिलचिलाती धूप में पसीना बहाने वाले असली मजदूरों के पेट पर लात मारकर उन्हें सिर्फ 100 से 124 रुपये की भीख नुमा दिहाड़ी थमा दी गई। इस खुली लूट की कई बार खबर के माध्यम से जानकारी दे चुकी हैं, लेकिन जिला और जनपद CEO की 'शून्य कार्रवाई' ने अब सीधे उनकी प्रशासनिक नीयत और ईमानदारी पर ही सबसे बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
पयारी नम्बर 01 पंचायत में चल रहे दो अलग-अलग कार्यों की यह कहानी अधिकारियों के कथित 'मूक संरक्षण' को उजागर करने के लिए काफी है।
खेल नंबर 01-'मिस्टर इंडिया' तालाब, जो कागजों में लबालब, जमीन पर गायब, हितग्राही का नाम: संतोष कुमार, वर्क कोड: 1746002039/IF/22012035163882, स्वीकृत राशि ₹3,22,000 रुपए।
इस कार्य के लिए तीन-तीन फर्जी मस्टर रोल जारी करके लगभग ₹50,000 का भुगतान भी मजे से निकाल लिया गया। जमीनी हकीकत: मौके पर जाकर देखें तो दूर-दूर तक न तो कोई खुदाई का निशान है और न ही कोई तालाब! बिना एक भी मजदूर के काम किए, यहाँ कागजी तौर पर हाजिरी भरकर मजदूरों का मूल्यांकन 175 से 180 रुपये तक कर दिया गया और सरकारी खजाने में सरेआम डकैती डाल दी गई।
खेल नंबर 02- पसीना बहाया इंसानों ने, मलाई खाई मशीनों ने, हितग्राही का नाम: वेदवती महरा पति दादी महरा, वर्क कोड: 1746002039/IF/22012035271662
यहाँ गरीब मजदूरों की NMMS एप से रोज सुबह हाजिरी लगी, फेस स्कैन हुआ, लेकिन जब पैसे देने की बारी आई तो उनके खातों में महज 100 से 124 रुपये डालकर उनके अधिकारों की धज्जियां उड़ा दी गईं।
हद तो तब हो गई जब शुरुआती काम के बाद गरीब मजदूरों को काम से भगाकर रात के अंधेरे में जेसीबी (JCB) मशीन से तालाब खुदवाया गया, जो मनरेगा के कायदों के बिल्कुल खिलाफ है। रही-सही कसर तब पूरी हो गई जब तालाब की निकाली गई मिट्टी को सार्वजनिक रास्ते पर फेंक दिया गया, जिससे आने वाले बरसात में पूरा रास्ता में कीचड़ हो जाये।
ग्राम पंचायत पयारी नम्बर 01 में हो रहे इस आर्थिक कदाचार की शिकायतें जब कई कार्यालय तक पहुँच चुकी हैं, तो फिर अब तक कार्रवाई का आंकड़ा 'शून्य' क्यों है? इस चुप्पी को भ्रष्टाचार में 'मूक सहमति' क्यों न माना जाएगा।
जब गायब तालाब के नाम पर ₹50,000 का फर्जी भुगतान हो रहा था, तब जनपद CEO साहब की 'जांच टीम' और तकनीकी मूल्यांकन करने वाले सब-इंजीनियर (उपयंत्री) किस गहरी नींद में सो रहे थे? बिना मौके पर गए 'गायब तालाब' की मापन पुस्तिका (MB) कैसे भर दी गई?
एक तरफ गरीब मजदूर अपनी जायज मजदूरी के लिए भटक रहे हैं और खुलेआम मशीनों से काम हो रहा है, गरीबों के हक की कमाई पर डाका डालने वाले इन भ्रष्ट सचिव, सरपंच और रोजगार सहायक और सब इंजीनियर। को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है, जो कई शिकायतों के बाद भी प्रशासन उन पर हाथ डालने से कतरा रहा है।
