गरज-लपक के साथ हुई बारिश, मौसम हुआ सुहाना, अहिंसा, सत्य का संदेश, महावीर स्वामी की मनाई जयंती
अनूपपुर
धार्मिक-आध्यात्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में चैत्र शुक्ल पक्ष की मदन द्वादशी (प्रदोष) के अवसर पर मौसम ने अचानक करवट ली। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार दोपहर बाद गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा हुई, जिससे बढ़ते तापमान पर विराम लग गया।
दोपहर तक जहां गर्मी अपना असर दिखाने लगी थी, वहीं अचानक आसमान में काले घने बादलों ने डेरा डाल लिया। तेज हवाओं के साथ उमड़-घुमड़कर बादल गरजते रहे और बीच-बीच में बिजली चमकती रही। लगभग आधे से एक घंटे तक कभी रिमझिम तो कभी मध्यम बारिश होती रही, जिससे पूरे क्षेत्र का मौसम सुहाना और खुशनुमा हो गया।
इस अप्रत्याशित मौसम परिवर्तन का आनंद लेने में देशभर से आए पर्यटक और श्रद्धालु पीछे नहीं रहे। महाराष्ट्र के नासिक और मालेगांव से आए नर्मदा परिक्रमा वासियों सहित उत्तर प्रदेश के कानपुर, लखनऊ, रीवा, सिंगरौली और पुणे से आए तीर्थयात्रियों ने बारिश का भरपूर लुत्फ उठाया। सभी ने अमरकंटक के मनोहारी और शीतल मौसम की जमकर सराहना की। तमिलनाडु के चेन्नई से आए पर्यटकों ने बताया कि बड़े शहरों में बारिश के बाद जहां उमस और चिपचिपी गर्मी बढ़ जाती है, वहीं अमरकंटक में वर्षा के बाद वातावरण और अधिक शीतल एवं आनंददायक हो जाता है।
*अहिंसा, सत्य और करुणा का संदेश, महावीर स्वामी की मनाई जयंती*
अनूपपुर जिले के पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित दिगंबर जैन सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र में आज परम पूज्य भगवान महावीर स्वामी की जयंती अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुई। मंदिर परिसर प्रातःकाल से ही भक्तिमय वातावरण, मंत्रोच्चार और जयघोष से गुंजायमान रहा।
इस अवसर पर भगवान महावीर स्वामी का विशेष अभिषेक, पूजन, अर्चन एवं आरती विधि-विधानपूर्वक संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से प्रभु के चरणों में नमन कर आत्मशुद्धि एवं कल्याण की कामना की। संध्याकाल में भक्तांबर विधान एवं भव्य महा आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए।
जयंती के उपलक्ष्य में मंदिर परिसर से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो ध्वज, गाजे-बाजे एवं धार्मिक प्रतीकों के साथ नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। शोभायात्रा के दौरान जैन समाज के लोगों ने धर्म, अहिंसा और सदाचार के जयघोष कर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया।
कार्यक्रम के समापन पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच खीर प्रसाद का वितरण किया गया, जिससे सेवा, समरसता और सद्भावना का वातावरण और भी प्रगाढ़ हो उठा। इस पावन अवसर पर भगवान महावीर स्वामी के जीवन संदेशों का भी स्मरण किया गया। उनके उपदेश आज भी मानव जीवन के लिए मार्गदर्शक हैं।
