पंचायत दर्पण में 'धुंधले बिलों' का महाघोटाला, सीईओ की मौन सहमति, आँखों में बंधी है पट्टी

पंचायत दर्पण में 'धुंधले बिलों' का महाघोटाला, सीईओ की मौन सहमति, आँखों में बंधी है पट्टी

*बिना सत्यापन के वित्तीय स्वीकृति कैसे, सरकारी खजाने की लूट*


अनूपपुर

जिले की जनपद पंचायत अनूपपुर इन दिनों भ्रष्टाचार की एक नई और शातिर प्रयोगशाला बन गई है। सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने और लीकेज रोकने के लिए शासन द्वारा बनाए गए 'पंचायत दर्पण' पोर्टल का इस्तेमाल अब भ्रष्टाचारियों द्वारा अपने सुबूत मिटाने के लिए किया जा रहा है। बदरा जनपद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने की खुलेआम लूट हो रही है, और इसका जरिया बने हैं— 'धुंधले बिल'।

पंचायत दर्पण पोर्टल की पड़ताल से एक बेहद चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। ग्राम पंचायतों द्वारा पोर्टल पर सामग्री खरीदी और निर्माण कार्यों के बिल तो अपलोड किए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें एक सोची-समझी साजिश के तहत इतना 'धुंधला' (Blur) कर दिया जाता है कि उनमें लिखी गई कोई भी जानकारी स्पष्ट रूप से पढ़ी ही न जा सके।

इन धुंधले बिलों को देखकर यह पता लगाना नामुमकिन है कि निर्माण सामग्री किस फर्म या दुकान से खरीदी गई है। बिल में सामग्री की मात्रा (Quantity) क्या है और किस दर (Rate) पर खरीदी गई है, यह सब धुंधलेपन के पीछे छिपा दिया जाता है। बिल पर तारीख तक स्पष्ट नहीं होती, जिससे एक ही बिल को बार-बार इस्तेमाल करने की आशंका बढ़ जाती है। इस तकनीकी खेल के जरिए बिना वास्तविक काम किए या बेहद घटिया सामग्री का उपयोग करके लाखों रुपये के फर्जी बिल आसानी से पास कराए जा रहे हैं।

इस पूरे सुनियोजित घोटाले में सबसे बड़ा सवाल जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रवि ग्वाल की भूमिका पर खड़ा हो रहा है। एक सीईओ के कंधों पर जनपद के अंतर्गत आने वाली सभी ग्राम पंचायतों की सीधी निगरानी, बिलों के भौतिक सत्यापन और वित्तीय कार्यों की पारदर्शी समीक्षा की अहम जिम्मेदारी होती है। यदि पोर्टल पर लगातार धुंधले और अपठनीय बिल अपलोड हो रहे हैं, तो सीईओ कार्यालय द्वारा उन्हें बिना सत्यापन के वित्तीय स्वीकृति कैसे दी जा रही है?

पंचायत के पैसों की इस बंदरबांट को लेकर नागरिकों ने जिला कलेक्टर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अपलोड किए गए सभी संदिग्ध और धुंधले बिलों की एक उच्च स्तरीय समिति से जांच कराई जाए और मौके पर जाकर कार्यों का भौतिक सत्यापन हो। इस कृत्य में संलिप्त पंचायत सचिवों, सरपंचों और बिना देखे बिल पास करने वाले अधिकारियों पर गबन का आपराधिक मामला दर्ज कर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

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