श्रद्धालु पारंपरिक विधि-विधान से कर रहे है कुलदेवी-देवताओं व अस्त्र-शस्त्र की पूजा, रामघाट में भजन कीर्तन
अनूपपुर
धार्मिक एवं आध्यात्मिक आस्था की पावन नगरी अमरकंटक में इन दिनों मालवा अंचल से बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त श्रद्धालु अपने कुलदेवी-देवताओं तथा उनके अस्त्र-शस्त्रों की पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। पतित पावनी मां नर्मदा के पावन रामघाट के उत्तर एवं दक्षिण तट पर मालवा क्षेत्र से आए श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ में लीन दिखाई दे रहे हैं।
सायंकाल श्रद्धालु रामघाट तट पर अपने कुलदेवी-देवताओं तथा उनके प्रतीकात्मक अस्त्र-शस्त्रों की स्थापना कर दीप प्रज्वलित करते हैं और भक्ति भाव से भजन-कीर्तन करते हैं। इसके बाद प्रातःकाल पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के साथ मां नर्मदा में स्नान-डुबकी लगाकर विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है तथा अपने आराध्य देवी-देवताओं से मनोकामनाएं और मन्नतें मांगी जाती हैं। यह धार्मिक अनुष्ठान सायंकाल से प्रारंभ होकर दोपहर तक निरंतर चलता रहता है।
इस अवसर पर श्रद्धालु अपने पारंपरिक व्यंजन जैसे लिट्टी-चोखा और दाल-बाटी बनाकर सामूहिक रूप से भोजन भी करते हैं। रामघाट तट पर पूजा-अर्चना के दौरान कई श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते-नाचते भी दिखाई देते हैं। भक्ति भाव के वातावरण में कई श्रद्धालु अपने आराध्य के प्रति गहरी आस्था व्यक्त करते हुए उनसे जुड़े प्रश्नों के समाधान भी प्राप्त करते देखे गए। उज्जैन, रायसेन, देवास, रतलाम, धार और सीहोर सहित मालवा क्षेत्र के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु अमरकंटक पहुंच रहे हैं।
मालवांचल के श्रद्धालुओं द्वारा कुलदेवी-देवताओं तथा उनके अस्त्र-शस्त्रों की यह पूजा प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि के पूर्व की जाती है। विगत दिवस उज्जैन क्षेत्र से लगभग 10 बसों में सवार होकर बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं, युवक-युवतियां अमरकंटक पहुंचे और मां नर्मदा के पावन तट पर श्रद्धा-भक्ति के साथ अपने कुलदेवी-देवताओं की आराधना की।
