संविलियन भर्ती के नियुक्ति पत्र में जारी आदेशों में गड़बड़, अधिकारियों की मिलीभगत रजनीश की चांदी ही चांदी
*न्यायालय के आदेशों की गलत व्याख्या कर जनहित के मुद्दों से दूरी भ्रष्टाचार को दे रहे बढ़ावा*
अनूपपुर
नवगठित निकाय डूमरकछार में गलत तरीके से संविलियन भर्ती, परिवीक्षा अवधि समाप्त होने के उपरांत भी नियम विरुद्ध पदस्थापना,गलत तरीके से अपने पुत्र/पुत्री एवं सगे संबंधियों को नवगठित निकायों में संविलियन कराए जाने की जांच किये जाने की मांग निकाय अध्यक्ष सहित लगातार निकाय क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के द्वारा सक्षम अधिकारियों से की जा रही है,निकाय डूमरकछार में पदस्थ संविलियन कर्मचारी रजनीश प्रसाद शुक्ला के द्वारा संविलियनल भर्ती में गठित समिति में सदस्य के रूप में फर्जी आंकड़े प्रस्तुत कर संविलियन में जो फर्जीवाड़ा किया गया वह तो किया ही गया अब निकाय गठन के बाद से अब तक तक फर्जी प्रस्तावों एवं दस्तावेजों में हेराफेरी करके कुछ निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों एवं फर्मों और अपने चहेतों के नाम पर नगर पालिका अधिनियम एवं लेखा वित्त नियम का उलंघन करते हुए लेखापाल के द्वारा लाखों की राशि फर्जी तरीके से समय-समय पर पदस्थ सीएमओ के माध्यम से गबन किया गया है,इसकी भी शिकायत उच्च अधिकारियों को की गयी है, परन्तु इस पूरे मामले की जांच आज दिनांक तक नहीं की गयी है।
ज्ञात हो कि नवगठित निकाय डूमरकछार में पंचायत कालीन कर्मचारियों को निकाय में संविलियन किए जाने हेतु जिला चयन समिति के द्वारा 06.02.2021 को नियत की गयी थी,जिला चयन समिति द्वारा ग्राम पंचायत कालीन कर्मचारियों को म.प्र. नगर पालिका सेवा (वेतन एवं भत्ता) नियम 1967 के नियम 8 के प्रावधान अंतर्गत संविलियन किये जाने का निर्णय लिया गया था,इस निर्णय में रजनीश प्रसाद शुक्ला (तात्कालिक सचिव,ग्राम पंचायत डूमरकछार) को राजस्व उपनिरीक्षक के पद पर संविलियन किया गया था,जारी आदेश के तहत संविलियन किये गये कर्मचारियों को 03 वर्ष की परिवीक्षा अवधि के लिए पदस्थ किया गया था, 03 वर्ष के दौरान रजनीश प्रसाद शुक्ला को एलएसजीडी डिप्लोमा प्राप्त करना अनिवार्य था, यदि डिप्लोमा प्राप्त नहीं करेंगे तो मूल पद पर वापस पदस्थ कर दिया जाएगा ऐसा इनके नियुकि आदेश में वर्णित है,इनके द्वारा परिवीक्षा अवधि के दौरान एलएसजीडी डिप्लोमा प्राप्त नही किया गया है,फिर भी इन्हें वापस ग्राम पंचायत सचिव के मूल पद पर आज दिनांक तक पदस्थ नही गया है,मूल पद पर इनकी वापसी की मांग निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने उच्चाधिकारियों से की है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नवगठित निकाय डूमरकछार में राजस्व उपनिरीक्षक एवं लेखापाल रजनीश प्रसाद शुक्ला का ग्राम पंचायत सचिव से नगरीय निकाय में राजस्व उपनिरीक्षक के पद पर संविलियन नियमों के विरुद्ध किया गया है,ज्ञात हो कि पंचायत राज संचालनालय मध्य प्रदेश के द्वारा जारी पत्र क्रमांक/प.रा./पंचायत-1942/2016/10123 भोपाल दिनांक-28.06.2017 के अनुसार ग्राम पंचायत के सचिव का संविलियन शहरी विकास विभाग में नहीं हो सकता है फिर भी नवगठित निकाय डूमरकछार में रजनीश प्रसाद शुक्ला का संविलियन किया गया है, प्रदेश की कई नवगठित निकायों में इसी आधार पर पंचायत में कार्यरत कर्मचारियों का संविलियन नगरीय निकाय में नहीं किया गया तो फिर यह इस क्षेत्र में ऐसा जानबूझकर क्यों किया गया,निकाय अध्यक्ष सहित कई निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने वरिष्ठ उच्च अधिकारियों से पत्राचार कर इस पूरे मामले की जांच कराकर विभागीय,अग्रिम एवं उचित कार्यवाही किए जाने की मांग की है।
उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देकर सीएमओ और लेखापाल की मिली भगत से निकाय में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है,इस पूरे मामले की जांच भी आवश्यक है,सवाल यह उठता है कि क्या मान. उच्च न्यायालय ने फर्जीवाड़ा करने के लिए इन्हें छूट दे रखी है,ये न्यायालय की आड़ में भ्रष्टाचार को अंजाम देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं,जिससे शासन -प्रशासन के द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर जनहित में नागरिकों को नहीं मिल पा रहा है,जिससे निकाय क्षेत्र में निर्वाचित स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों का निकाय के अधिकारियों के प्रति रोष व्याप्त है, इस संबंध में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने समय-समय पर कई स्तरों पर पत्राचार किया है परंतु जांच कार्यवाही न होने से भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद है।
