वादों की रेल फाइलों में दौड़ी, पटरियों पर सन्नाटा कायम, अनदेखी पर जनता में आक्रोश, सांसद से जवाब की मांग
अनूपपुर/कोतमा
सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े दावे, रेल मंत्री से मुलाकात की तस्वीरें और लंबी-चौड़ी मांगों की सूची सब कुछ चमकता हुआ नजर आता है, लेकिन जमीनी हकीकत कोतमा रेलवे स्टेशन के सूने प्लेटफॉर्म पर साफ दिखाई दे रही है। क्षेत्र की जनता अब खुलकर सवाल पूछ रही है कि आखिर रेल सुविधाओं को लेकर किए गए वादों का क्या हुआ?
हाल ही में सांसद द्वारा रेल मंत्री से भेंट कर विभिन्न ट्रेनों के ठहराव, नई ट्रेन संचालन और विस्तार की मांगों को लेकर पत्र सौंपे जाने की जानकारी सार्वजनिक की गई थी। इनमें अंबिकापुर-निजामुद्दीन ट्रेन के ठहराव, मुंबई के लिए नई ट्रेन, नागपुर कनेक्टिविटी सहित कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल थीं। दस्तावेजों में इन मांगों की स्वीकृति और परीक्षण के आदेशों का उल्लेख भी सामने आया।
बताया गया कि 18233-34 नर्मदा एक्सप्रेस के वेंकटनगर स्टेशन में पूर्व स्वीकृत ठहराव को प्रारंभ कराने, 15231 के बिरसिंहपुर स्टेशन में ठहराव, 18235-36 भोपाल-बिलासपुर ट्रेन का विस्तार, 12852 बिलासपुर-चेन्नई एक्सप्रेस का अनूपपुर-कोतमा-अंबिकापुर तक विस्तार, 22407 अंबिकापुर-निजामुद्दीन में स्लीपर कोच बढ़ाने और कोतमा स्टेशन में ठहराव जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए गए थे।
रेलवे बोर्ड के पत्राचार में कुछ ट्रेनों के “प्रयोगात्मक ठहराव” की बात भी कही गई है, लेकिन कोतमा क्षेत्र की जनता का कहना है कि आज भी अपेक्षित ट्रेनों का नियमित ठहराव नहीं हो पा रहा है। स्टेशन पर यात्रियों की संख्या होने के बावजूद सुविधाओं का अभाव और ट्रेनों का न रुकना स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
जनता का सीधा सवाल है—जब केंद्र में भी आपकी ही सरकार है और आप सत्ता का हिस्सा हैं, तो फिर यह निष्क्रियता क्यों? क्या रेल सुविधाओं की मांगें केवल जनसंपर्क और प्रचार तक सीमित रहीं? क्या क्षेत्रीय विकास के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता दिखाई गई?
