सोहागी पहाड़ पर 'गुंडा टैक्स' का नंगा नाच! चेक पॉइंट पर अवैध वसूली के खिलाफ भड़के चालक
*कमांडो अरुण गौतम ने संभाला मोर्चा*
रीवा
जिले के सोहागी नेशनल हाईवे 30 (NH-30) स्थित सोहागी पहाड़ एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई सड़क हादसा नहीं, बल्कि प्रशासन की नाक के नीचे चल रही 'अवैध वसूली' का काला खेल है। चेक पॉइंट के नाम पर चालकों से की जा रही अनाधिकृत धनउगाही को लेकर ट्रक चालकों का गुस्सा फूट पड़ा, जिससे नेशनल हाईवे पर घंटों जाम की स्थिति बनी रही।
*अवैध वसूली ने थामी पहियों की रफ्तार*
प्रत्यक्षदर्शियों और चालकों के अनुसार, सोहागी पहाड़ पर बने चेक पॉइंट पर तैनात कर्मियों द्वारा बिना किसी वैध रसीद या आदेश के चालकों से अवैध पैसों की मांग की जा रही थी। विरोध करने पर चालकों के साथ अभद्रता की गई, जिसके बाद आक्रोशित ड्राइवरों ने अपने वाहन बीच सड़क पर खड़े कर दिए। देखते ही देखते उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाले इस मुख्य मार्ग पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया।
*मैदान में उतरे 'कमांडो' अरुण गौतम*
हंगामे की सूचना मिलते ही कांग्रेस नेता कमांडो अरुण कुमार गौतम समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने चालकों की समस्याओं को सुना और मौके पर मौजूद कर्मियों से वसूली के आधार पर तीखे सवाल किए। अरुण गौतम ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि "चेक पॉइंट सुरक्षा के लिए होते हैं, लूट के लिए नहीं। गरीबों और मेहनतकश चालकों की जेब पर डाका डालना बंद किया जाए।
*घंटों बाधित रहा यातायात*
इस विरोध प्रदर्शन और हंगामे के कारण सोहागी पहाड़ पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बस यात्रियों और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बाद में पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप और उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद चालकों ने प्रदर्शन समाप्त किया और यातायात बहाल हो सका।
रीवा जिले में RTO उड़नदस्ते द्वारा खुलेआम की जा रही अवैध वसूली, ड्राइवरों के साथ मारपीट और गुंडागर्दी ने कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं। यह सवाल अब जन-जन की जुबान पर है कि आखिर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, कलेक्टर प्रतिभा पाल और एसपी राकेश सिंह चौहान की नाक के नीचे यह 'लूटतंत्र' कैसे फल-फूल रहा है?
*प्रशासन से सीधे सवाल*
मौन की वजह क्या है?: जब अन्य राज्यों से आने वाले ट्रक ड्राइवरों के साथ सरेआम मारपीट और लूट होती है, तो जिले के आला अधिकारियों की चुप्पी क्या इसे "मौन सहमति" नहीं दर्शाती? क्या भ्रष्टाचारियों को शासन का वरदहस्त प्राप्त है? मध्य प्रदेश परिवहन विभाग नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों पर एक्शन क्यों नहीं?
डर किसका है?: रीवा के मुखिया और पुलिस कप्तान आखिर किस बात से डरे हुए हैं? क्या ये भ्रष्ट कर्मचारी सत्ता के इतने करीब हैं कि उन पर हाथ डालने से प्रशासन के हाथ कांप रहे हैं। जनता अब केवल बयानों से संतुष्ट नहीं होगी। अगर जल्द ही इन भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि प्रशासन और शासन दोनों ही इस 'अवैध वसूली' के खेल में बराबर के हिस्सेदार हैं।
