छोहरी में 55 एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जे का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की कब्जा मुक्त कराने की मांग

छोहरी में 55 एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जे का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की कब्जा मुक्त कराने की मांग

*चारागाह भूमि पर भी अतिक्रमण, मवेशियों के लिए चारा संकट*


अनूपपुर

जमुना कोतमा अनूपपुर जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत छोहरी में लगभग 55 एकड़ शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का गंभीर मामला सामने आया है इस संबंध में ग्रामवासियों ने नायब तहसीलदार अनूपपुर एवं कलेक्टर हर्षल पंचोली को लिखित शिकायत सौंपकर शासकीय भूमि को कब्जामुक्त कराने, सीमांकन कराने एवं दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि ग्राम पंचायत छोहरी में खसरा नंबर 604, 184, 177/1, 228/1, 13, 14, 148, 158, 159 एवं 161 सहित कुल लगभग 55 एकड़ भूमि राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय दर्ज है आरोप है कि इस शासकीय भूमि पर प्रभावशाली लोगों द्वारा लगातार अवैध कब्जा कर निजी उपयोग में लिया जा रहा है ग्रामीणों का कहना है कि उक्त भूमि पर कब्जे के कारण गांव में शासकीय कार्यों एवं जनहित से जुड़े निर्माण कार्यों के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

शिकायतकर्ताओं में ज्ञान सिंह, प्रीतम दास, लल्लू सिंह (पंच), भारत लाल, जीवन दास (पंच), राम सिंह (पूर्व पंच), पूजा चौधरी (पंच), सुग्रीव कुमार, सुमेर, विजय कुमार, हंसलाल, कमलेश्वर, महेश, सूर्य, गुमान, राम शंकर दास, लालू दास, महेश कुमार, गया प्रसाद अहिरवार एवं ओमप्रकाश रजक सहित अनेक ग्रामवासी शामिल हैं।

आवेदन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले ओमप्रकाश रजक ने बताया कि उक्त 55 एकड़ शासकीय भूमि पर ग्राम के वर्तमान सरपंच केदार सिंह, पूर्व सरपंच रामा सिंह एवं उनके परिवार के लोगों द्वारा कब्जा कर लिया गया है उन्होंने आरोप लगाया कि यह भूमि शासन की होने के बावजूद निजी उपयोग में ली जा रही है, जिससे ग्रामवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कब्जे में ली गई भूमि का एक हिस्सा चारागाह (चरनोई) के लिए आरक्षित था, जहां गांव के मवेशी चरते थे लेकिन चारागाह भूमि पर भी अतिक्रमण हो जाने से पशुपालकों को मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध कराने में भारी कठिनाई हो रही है इससे गांव में पशुपालन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित भूमि का तत्काल सीमांकन कर अवैध कब्जा हटाया जाए, चारागाह भूमि को मुक्त कराया जाए। यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

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