डंडे से की पिटाई, मामला दर्ज,18 माह का वेतन हड़पने का आरोप, न्याय के लिए भटक रहा चौकीदार
अनूपपुर
पुलिस चौकी फुनगा अंतर्गत ग्राम रक्शा में पारिवारिक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। सगे भाई सहित दो लोगों द्वारा एक व्यक्ति के साथ गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। पुलिस ने फरियादी की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रामनाथ साहू (40) निवासी ग्राम रक्शा ने चौकी फुनगा में रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह अपनी दूसरी पत्नी हीरावती यादव के साथ फुनगा में किराये के मकान में रहता है, जबकि पहली पत्नी व बच्चे ग्राम रक्शा में रहते हैं। 18 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 2:30 बजे वह ग्राम रक्शा में अपने बड़े भाई रामबदन साहू के घर गया था। कुछ देर बाद विवाद बढ़ गया और भाई ने उसे वहां से हट जाने को कहा।
रामनाथ साहू के अनुसार, जब वह इंदल सिंह के घर के सामने बैठा था, तभी रामबदन साहू डंडा लेकर पहुंचा और मां-बहन की गालियां देते हुए 4-5 डंडे उसके दोनों पैरों की जांघों पर मार दिए। इसी दौरान गांव का देवधर मिश्रा भी मौके पर आया और गाली-गलौज करते हुए हाथ-मुक्कों से मारपीट करने लगा। शोर-शराबा सुनकर इंदल सिंह, राकेश साहू, गोपाल सिंह एवं उनकी पत्नी ने बीच-बचाव किया।
फरियादी का आरोप है कि जाते-जाते दोनों आरोपी जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए। मारपीट में उसके बाएं पैर की जांघ व घुटने, दाएं पैर की जांघ तथा सिर में चोट आई है।ें पदस्थ चौकीदार बाबूलाल सिंह का आरोप है कि उसका 18 माह का वेतन तत्कालीन बीट गार्ड सोमपाल सिंह कुशराम द्वारा हड़प लिया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि दो वर्ष बीत जाने के बाद भी उसे आज तक उसका हक नहीं मिल पाया है।
पीड़ित चौकीदार बाबूलाल सिंह न्याय की आस में कलेक्टर कार्यालय एवं वन विभाग के अधिकारियों के चक्कर लगाते-लगाते थक चुका है, किंतु हर बार उसे सिर्फ आश्वासन ही मिला। कार्रवाई के नाम पर विभाग की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।
इस पूरे प्रकरण ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि
क्या वन विभाग अपने ही कर्मचारियों के साथ अन्याय होने पर भी लाचार है?
क्या दोषी बीट गार्ड को संरक्षण मिल रहा है?
या फिर एक गरीब चौकीदार की आवाज़ सिस्टम तक पहुंच ही नहीं पा रही?
मंगलवार, 20 जनवरी को एक बार फिर चौकीदार बाबूलाल सिंह ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी फरियाद दोहराई, और न्याय की गुहार लगाई। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस बार केवल फाइलें आगे बढ़ाएगा या वास्तव में पीड़ित को उसका मेहनताना दिलाने के लिए ठोस कदम उठाएगा।
