वर्दीधारी एएसआई ने नशे में स्काउट छात्र को पीटा, आवेदन पर प्राचार्य द्वारा थाना प्रभारी को लिखा पत्र

वर्दीधारी एएसआई ने नशे में स्काउट छात्र को पीटा, आवेदन पर प्राचार्य द्वारा थाना प्रभारी को लिखा पत्र


अनूपपुर

जिला मुख्यालय अनूपपुर की धरती से ऐसा शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरे पुलिस सिस्टम के माथे पर सवालिया निशान लगा दिया है। शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय की वही ग्राउंड जहाँ बच्चे देशभक्ति, अनुशासन और सेवा का पाठ सीखते हैं वहीं एक शराबी वर्दीधारी पुलिसकर्मी ने वर्दी के नशे, गाली और तमाचे से कलंकित कर दिया।कक्षा दसवीं के छात्र सागर यादव का कसूर सिर्फ इतना था कि वह स्काउट की ट्रेनिंग ले रहा था। आरोप है कि सहायक उप-निरीक्षक (ASI) परसादीलाल, शराब के नशे में, मुंह में गुटखा दबाए, शर्ट के बटन खुले हुए, ग्राउंड पर पहुंचा और नाबालिग छात्र का हाथ पकड़कर खींचा, फिर गले पर जोरदार तमाचा जड़ दिया।इतना ही नहीं—वर्दी की आड़ में घटिया भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा गया—“हमारी उम्र में होते तो .... मार कर परेड कराते थे।”यह कोई बयान नहीं—यह एक विकृत मानसिकता का खुला कबूलनामा है।

घटना के समय पूरी स्काउट टीम और कमांडर मौके पर मौजूद थे। यानी यह हमला किसी कोने में नहीं, खुले मैदान में सबके सामने हुआ। यह घटना बीते दिनांक 19 जनवरी 2026 के सायं लगभग 5:00 बजे की बताई जा रही है जहां पर शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अनूपपुर के स्काउट छात्रों को 26 जनवरी की तैयारी को लेकर एक पुलिसकर्मी के द्वारा परेड कराई जा रही थी। मारपीट की घटना के पश्चात छात्र ने अपना लिखित आवेदन प्राचार्य को प्रस्तुत किया संबंधित विद्यालय के प्राचार्य ने मूलत: आवेदन को थाना प्रभारी अनूपपुर के नाम प्रेषित कर छात्र को रिसीविंग दी गई है। अब देखना है कि पुलिस प्रशासन निर्दोष नाबालिक छात्र को न्याय देते हुए क्या कार्रवाई करती है।

सवाल यह भी है अगर आज एक छात्र पिटा, तो कल किसकी बारी?वीडियो कैमरे के सामने सवाल और वर्दी का डर,घटना के बाद जब पूरे मामले की वीडियो रिकॉर्डिंग चालू कर संबंधित पुलिसकर्मी से सवाल किए गए, तो सच्चाई और भी ज्यादा चौंकाने वाली सामने आई।कैमरा चालू होते ही पुलिसकर्मी ने सबसे पहले अपना नेम बैच  निकालकर जेब में रख लिया।इसके बाद पत्रकार द्वारा सवाल किया गया “स्काउट सीख रहे बच्चों को मारना क्या सही था?”इस पर पुलिसकर्मी ने जवाब दिया “मैंने ना मारा है, ना कुछ किया है।”जब अगला सीधा सवाल किया गया “नाबालिग बच्चों पर हाथ उठाना क्या पुलिस की ड्यूटी है?”तो इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया गया। पुलिसकर्मी सीधे अपनी गाड़ी में बैठे और मौके से निकल लिए।

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