नगर परिषद में तीन अध्यक्ष, अध्यक्ष का भतीजा निभा रहा ‘फ्री झूला’ का चुनावी वादा?

नगर परिषद में तीन अध्यक्ष, अध्यक्ष का भतीजा निभा रहा ‘फ्री झूला’ का चुनावी वादा?

*150 के बाद 100 पास की मांग ने खोले राज, बरगवां-अमलाई मेला बना वसूली का अड्डा* 


अनूपपुर।

नगर परिषद बरगवां–अमलाई एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित मेले में झूला संचालन को लेकर जो घटनाक्रम सामने आया है, उसने न केवल नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह मेला अब रोजगार का माध्यम न रहकर अवैध वसूली का केंद्र बनता जा रहा है।

मेले में लगे झूले को लेकर झूला संचालक ने आरोप लगाया है कि नगर परिषद अध्यक्ष के भतीजे द्वारा उस पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया और 150 के बाद 100 पास अतिरिक्त देने की मांग की गई। सवाल यह उठता है कि यह अतिरिक्त पास आखिर क्यों मांगे जा रहे थे?क्या यह मतदाताओं को मुफ्त झूला झुलाने का कोई चुनावी वादा था, जिसकी भरपाई झूला संचालक से की जा रही थी?

झूला संचालक का दावा है कि उसके पास संचालन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज मौजूद थे और नगर परिषद की लिखित अनापत्ति के बाद ही झूला लगाया गया था। इसके बावजूद जब उसने अतिरिक्त वसूली देने से इनकार किया, तो कभी नियम-कानून का डर दिखाया गया, तो कभी अन्य तरीकों से परेशान किया गया। आरोप है कि दबाव बढ़ाने के लिए एक चूड़ी विक्रेता को ढाल बनाकर थाने में फर्जी प्रकरण दर्ज कराने की धमकी दी गई और सीधे ₹68,000 की मांग रख दी गई।

स्थानीय लोगों में यह चर्चा आम है कि यह शायद मध्य प्रदेश का इकलौता नगर परिषद है, जहां निर्णय लेने वाला केवल अध्यक्ष नहीं, बल्कि अध्यक्ष पति, अध्यक्ष भतीजा और स्वयं अध्यक्ष—तीनों माने जाते हैं। सवाल उठता है कि क्या जनता द्वारा चुना गया अध्यक्ष सिर्फ नाम का है और असली सत्ता परिवार के अन्य सदस्यों के हाथों में है?मामला यहीं नहीं रुका। बताया जा रहा है कि शहडोल संभाग से आया एक भिक्षुक, जो मेले में भीख मांगकर जीवन यापन करना चाहता था, उससे भी ₹500 की बैठकी वसूली गई। अब यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या बरगवां-अमलाई नगर परिषद अब भिखारियों से भी टैक्स वसूलने लगी है? मेले में कॉटन कैंडी बेचने वाले और खाने-पीने की छोटी टेबल दुकानों से भी ₹500 प्रति दुकान वसूले जाने के आरोप हैं। कई दुकानदारों का कहना है कि इतनी वसूली के बाद उनकी कुल बिक्री भी लागत नहीं निकाल पाई।

झूला संचालक का यह भी आरोप है कि जब उसने अवैध वसूली की शिकायत नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों से की, तो किसी ने कुछ नहीं कहा। उल्टा एक कथित गैर-जिम्मेदार व्यक्ति ने खुलेआम धमकी देते हुए कहा की अगर हिम्मत है तो अगले साल झूला लगाकर दिखाना, हमारे रहते यहां कोई काम नहीं कर सकता। मैं अध्यक्ष के परिवार का प्रतिष्ठित व्यक्ति हूं।

क्या नगर परिषद इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगी? क्या अवैध वसूली के आरोपों पर कार्रवाई होगी? या फिर हर साल की तरह यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? बरगवां-अमलाई का मेला अब आस्था और उत्सव का नहीं, बल्कि अवैध वसूली और दबंगई का प्रतीक बनता जा रहा है। जनता और छोटे व्यापारियों की नजर अब प्रशासन और शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

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