संभाग के शहडोल व अनूपपुर जिले से रेवांचल मीड़िया की उड़ान पत्रिका का प्रकाशन किया जा रहा है, पत्रिका “उड़ान” का उद्देश्य यही है कि सम्भाग के सभी शिक्षण संस्थानों की गतिविधियों, उपलब्धियों और विशेषताओं की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जाए। यह पत्रिका विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के लिए एक उपयोगी स्रोत बनेगी। शिक्षा के संबंध जिले में चल रहे विद्यालय के बारे में प्रकाश डालने का एक छोटा सा प्रकाश डाला गया है। विद्यालयो में शिक्षा स्तर कैसा है, क्या-क्या सुविधाएं है, छात्र-छात्राओं को किस माध्यम से शिक्षा प्रदान किया जा रहा हैं, खेलकूद व मनोरंजन के लिये कैसी सुविधाएं है, विद्यालय में शिक्षा प्रदान करने, छात्रों को प्रेरित करने, अनुशासन सिखाने और उनके सर्वांगीण विकास के मार्गदर्शन शिक्षको की भूमिका कैसी है आदि बहुत सी बातों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है।
समाज के लिए शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, भारतीय संविधान शिक्षा को 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए एक मौलिक अधिकार तहत मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित की गई है। शिक्षा के क्षेत्र में समाज को शिक्षित करने की दिशा में निजी विद्यालय का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है। शहरों से लेकर गांव-गांव तक निजी विद्यालयों का जाल बिछ चुका है। जिसके कारण ज्यादातर लोग साक्षर हो रहे है, धीरे धीरे साक्षरता दर बढ़ती जा रही है। समय के अनुसार शिक्षा में बदलाव देखने को मिलता है। पहले की शिक्षा विद्यालय में कक्षा एक से शुरू होकर बारह तक उसके बाद आगे की पढ़ाई कॉलेज में हुआ करती थी। उसके बाद कुछ लोग नौकरी मे, व्यापार में, कृषि में और अन्य कार्यो में कही न कही लग जाते थे, जैसे-जैसे समय बदला पढ़ाई का स्तर भी बदलता गया पहले के समय मे 70 से 80 प्रतिशत वाले विद्यार्थी टॉप कर जाते थे, लेकिन आजकल 95 से 99 प्रतिशत के विद्यार्थी टॉप सूची में आ पाते हैं। आजकल की शिक्षा स्वरूप और भी बदल गया है। सरकार कक्षा एक से पहले आंगनबाड़ी में बच्चों को शिक्षा की शुरुआत करवाती है, वही निजी विद्यालयों में कक्षा एक से पहले नर्सरी, केजी एक, केजी दो व प्ले स्कूल का चलन आ चुका है। पहले कक्षा 06 से ABCD की पढ़ाई शुरू होती थी वही ABCD की पढ़ाई आजकल नर्सरी से शुरू हो जाती है। शिक्षा के क्षेत्र में अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई के लिए बहुत बड़ी क्रांति आ गई है, अंग्रेजी भाषा को बहुत ज्यादा महत्व दिया जाना, सभी जगह अंग्रेजी का महत्व बढ़ जाने के कारण निजी विद्यालयों में हिंदी माध्यम की जगह ज्यादातर अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई होने लगी है। आज के समय मे हिंदी माध्यम के विद्यालय बहुत ही संघर्षपूर्ण स्थित से गुजर रहे हैं। बहुत से विद्यालय बन्द होने की कगार में पहुँच गए हैं।
शिक्षा किसी भी समाज की प्रगति की नींव होती है। यह केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, सोचने की क्षमता और जीवन के उद्देश्य को समझने का भी साधन है। हमारे सम्भाग के लिए यह गर्व की बात है कि यहाँ शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है। प्राथमिक विद्यालयों से लेकर उच्च शिक्षा संस्थानों तक, हमारे क्षेत्र के विद्यालय और कॉलेज शिक्षा की गुणवत्ता, नई सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति सजग हैं।
संभाग के सरकारी और निजी स्कूल शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग, खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कई विद्यालयों ने हाल के वर्षों में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। शिक्षक समुदाय भी नई शिक्षण पद्धतियों को अपनाते हुए विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान देने पर जोर दे रहा है। संभाग के शहडोल अनूपपुर के विद्यालयों व कोचिंग सेंटर निकलने वाले छात्र-छात्राएं संभाग, जिले, विद्यालय व अपने परिवार का नाम रोशन कर रहे हैं, मंत्री, सांसद, विधायक, कमिश्नर, कलेक्टर, आईजी, एसपी, डीएफओ, सांसद, न्यायधीश, डॉक्टर, राज्य प्रशासनिक सेवा में महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित कर रहे हैं। बहुत से छात्र-छात्राएं फिल्मी दुनिया मे तथा विदेशों में अपनी सेवाएं देकर देश का नाम रोशन कर रहे है।
शिक्षा के क्षेत्र में सम्भाग ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। यहाँ के विज्ञान, कला व वाणिज्य आधुनिक प्रयोगशालाएँ, पुस्तकालय और शोध सुविधाएँ छात्रों को उत्कृष्ट वातावरण प्रदान कर रही हैं। साथ ही व्यावसायिक शिक्षा, तकनीकी कोर्स, कंप्यूटर प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित किया जा रहा है।
“उड़ान” पत्रिका इन सभी संस्थानों की विशेष उपलब्धियों को उजागर करने का माध्यम बनेगी चाहे वह किसी छात्र की सफलता की कहानी हो, किसी शिक्षक का नवाचार हो, या किसी कॉलेज का समाज सेवा से जुड़ा योगदान। इस मंच के माध्यम से हम शिक्षा जगत के उन प्रेरक चेहरों को सामने लाएँगे जो दूसरों के लिए आदर्श बन सकते हैं। हमारा उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति नई सोच जगाना है, ताकि हर विद्यार्थी यह महसूस करे कि सीखना केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवनभर की प्रक्रिया है।
अंत में, हम सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षा प्रेमियों से अपील करते हैं कि वे “उड़ान” के इस प्रयास में सहयोग करें। आइए, हम मिलकर ऐसी शैक्षिक संस्कृति का निर्माण करें जहाँ हर बच्चे को अपने सपनों को उड़ान देने का अवसर मिले।